पशुओं को साल भर मिलेगा हरा चारा
पशुपालक किसानों को चारे के नि:शुल्क बीज, खाद और कटाई के उपकरण
छत्तीसगढ़ में चार सौ हेक्टेयर में लिया जाएगा त्वरित चारा विकास कार्यक्रम
पशुओं के लिए साल भर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पशुपालक किसानों को चारा उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्य सरकार के पशुधन विकास विभाग द्वारा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत इस वर्ष से त्वरित चारा विकास कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। जिसके तहत किसानों को चारा उत्पादन के लिए उन्नत किस्म के बीज और खाद के साथ ही चारा कटाने के लिए कटर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रदेश में चालू वित्तीय वर्ष में इस योजना के तहत 420 हेक्टेयर में चारा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
कृषि एवं पशुधन विकास मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू ने आज यहां बताया कि कृषि की विकास दर को बढ़ाने के लिए पशुधन की उत्पादकता को बढ़ाना बहुत जरूरी है। इसके लिए आवश्यक है कि पशुओं को नियमित रूप से हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित हो। उन्होंने बताया कि वर्तमान में बहुत कम क्षेत्र में चारा का उत्पादन लिया जाता है। जिसके कारण बड़ी मात्रा में हरे चारे की समस्या रहती है। इस कमी को दूर करने के लिए इस साल से राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत प्रदेश के किसानों को चारा उत्पादन के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में 420 हेक्टेयर में त्वरित चारा उत्पादन कार्यक्रम लिया जा रहा है। इसके लिए प्रत्येक जिले में किसानों का चयन किया जा रहा है। चारा उत्पादन के लिए इन किसानों को प्रति हेक्टेयर तीन हजार दो सौ रूपए कीमत के बीज, खाद और अन्य आवश्यक दवाएं प्रदान की जाएगी। चारा कटाने के लिए किसानों को हाथ से चलित कटर के लिए चार हजार रूपए और डीजल तथा शक्ति से चलने वाले कटर के लिए बीस हजार रूपए की सहायता दी जाएगी।
श्री साहू ने बताया कि छत्तीसगढ़ देश का प्रमुख धान उत्पादक राज्य है। यहां किसान पशुओं को मुख्यत: धान का पैरा खिलाते है। धान के पैरे में तीन से चार प्रतिशत प्रोटीन और 40 प्रतिशत उर्जा होती है साथ ही इसमें हानिकारक आक्जलेटों की उपस्थिति के कारण यह पशुओं के स्वास्थ्य पर विपरीत असर भी डालता है। यदि धान के पैरा को यूरिया से उपचारित कर पशुओं को खिलाया जाए तो इसमें 9 से 10 प्रतिशत प्रोटीन और 56 प्रतिशत उर्जा की उपस्थिति हो जाती है। यूरिया से उपचारित होने पर पैरा में उपस्थित हानिकारक आक्जलेट भी कम हो जाते है। श्री साहू ने बताया कि इस योजना के तहत किसानों को धान के पैरा को यूरिया से उपचारित करने के लिए दो हजार तीन सौ रूपए का किट भी प्रदान किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक विकासखण्ड में 50-50 पशुपालक किसानों का चयन किया जा रहा है। इन किसानों को विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन में धान के पैरा को उपचारित करने के लिए किट के साथ आवश्यक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि ये किसान इस किट की सहायता से धान के पैरा को उपचारित कर सके।

