पशुधन बीमा योजना : तीन हजार से अधिक दुधारू पशुओं का बीमा
रायपुर, 26 मार्च 2011
छत्तीसगढ़ में पशुपालकों को उनके दुधारू पशुओं की आकस्मिक मृत्यु होने पर उसके नुकसान की भरपाई के लिए राष्ट्रीय पशुधन बीमा योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस योजना के तहत पशुपालकों को पशुओं का बीमा कराने के लिए प्रीमियम की राशि पर पचास प्रतिशत अनुदान भी दिया जा रहा है। यह योजना प्रदेश के पांच जिलों- रायपुर, दुर्ग, महासमुंद, धमतरी और राजनांदगांव में संचालित की जा रही है।
पशुधन विकास विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि राष्ट्रीय पशुधन बीमा योजना के तहत गत वर्ष 3 हजार 205 दुधारू पशुओं का बीमा कराया गया है। इस योजना के तहत बीमा हेतु प्रीमियम की पचास प्रतिशत राशि शासन द्वारा और पचास प्रतिशत राशि पशुपालकों द्वारा दी जाती है। उन्होंने बताया कि दुधारू पशुओं का बीमा कराने के लिए सभी श्रेणी और जाति वर्ग के किसान पात्र है। बीमा हेतु उत्तम नस्ल के दुधारू गौ-वंशी तथा भैसवंशी पशु जो अपने एक दुग्धकाल में कम से कम डेढ़ हजार लीटर दूध देता हो का बीमा किया जाता है। एक किसान के अधिकत्तम दो दुधारू पशुओं जिनकी उम्र दो वर्ष से 12 वर्ष के बीच हो, का ही बीमा किया जाता है। पशुधन बीमा योजना में पशुओं के किसी बीमारी, आग, बिजली (आकाशीय व जमीनी), सर्पदंश, जंगली पशुओं द्वारा शिकार, बाढ़, नदी, तालाब, झील व अन्य पानी के स्थान में डूबने, तूफान व सूखा आदि के साथ-2 दैविक प्रकोप, भूकंप, चक्रवात और भूस्खलन आदि कारणों से मृत्यु होने अथवा पूर्ण स्थाई अपंगता पर उनके मालिकों को इसका लाभ मिलता है। पशुधन बीमा योजना की अधिक जानकारी के लिए अपने नजदीक के पशुधन विकास विभाग की संस्था अथवा पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।

