छत्तीसगढ़ में जलग्रहण परियोजनाओं के माध्यम से 62 हजार 755 हेक्टेयर भूमि का उपचार ढाई हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा का विस्तार
रायपुर 07 जून 2010
जलग्रहण क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत छत्तीसगढ़ में संचालित सूखा उन्मूलन क्षेत्र कार्यक्रम (डी.पी.ए.पी.) और एकीकृत पड़त भूमि विकास कार्यक्रम (आई.डब्ल्यू.डी.पी.) की परियोजनाओं के माध्यम से पिछले वित्तीय वर्ष 2010-11 में 62 हजार 755 हेक्टेयर भूमि को उपचारित किया गया और दो हजार 533 हेक्टेयर क्षेत्र में नई सिंचाई सुविधा बढ़ी है। इसमें सूखा उन्मूलन क्षेत्र कार्यक्रम के तहत 44 हजार 510 हेक्टेयर भूमि उपचारित की गई है और 963 हेक्टेयर के नए सिंचित क्षेत्र में प्राप्त हुई है। एकीकृत पड़त भूमि विकास परियोजना के माध्यम से 18 हजार 754 हेक्टेयर भूमि उपचारित की गई और दो हजार 533 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध हुई है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना की तर्ज पर जलग्रहण क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत किए गए सभी कार्यो का सामाजिक अंकेक्षण किया जाएगा।
पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि जलग्रहण विकास कार्यक्रम के तहत सूखा उन्मूलन क्षेत्र कार्यक्रम में प्रारंभ से अब तक प्रदेश में दो लाख 64 हजार 409 हेक्टेयर भूमि का उपचार किया गया है एवं 23 हजार 191 हेक्टेयर नवीन सिंचित क्षेत्र में वृध्दि प्राप्त हुई है। इसी प्रकार एकीकृत पड़त भूमि विकास परियोजना के माध्यम से प्रारंभ से अब तक दो लाख 18 हजार 830 हेक्टेयर भूमि उपचारित की जा चुकी है और 22 हजार 996 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध हुई है। अधिकारियों ने बताया कि जलग्रहण विकास कार्यक्रम के तहत सूखा उन्मूलन क्षेत्र कार्यक्रम में प्रि-हरियाली के तहत प्रदेश के आठ जिलों के 425 माइक्रो वाटरशेड परियोजनाएं संचालित की जा रही है। इन परियोजनाओं में विभिन्न कार्यो के लिए पिछले वित्तीय वर्ष 2010-11 में आवंटित 39 करोड़ 10 लाख रूपए की राशि में से 22 करोड़ 88 लाख रूपए खर्च किए जा चुके हैं। एकीकृत पड़त भूमि विकास कार्यक्रम में भी प्रि-हरियाली के तहत प्रदेश के 11 जिलों में एक करोड़ 69 लाख 58 हजार रूपए खर्च किए गए है। जबकि सूखा उन्मूलन क्षेत्र कार्यक्रम में हरियाली के तहत प्रदेश के आठ जिलों में 507 माइक्रोवाटर शेड परियोजनाओं के माध्यम से आवंटित 27 करोड़ 77 लाख रूपए में से 16 करोड़ 25 लाख 35 हजार रूपए खर्च हो चुके है। एकीकृत पड़त भूमि विकास कार्यक्रम में भी हरियाली के तहत प्रदेश के 14 जिलों में दस करोड़ 55 लाख 97 हजार रूपए विभिन्न कार्यो पर खर्च किए गए है। वित्तीय वर्ष 2010-11 में 18 हजार 244 हेक्टेयर भूमि का उपचार किया गया और एक हजार 570 हेक्टेयर क्षेत्र में नवीन सिंचाई सुविधा में वृध्दि हुई है। तीन लाख 86 हजार 533 हेक्टेयर क्षेत्र में संचालित हो रही हैं। योजना प्रारंभ से अब तब दो लाख 58 हजार 152 हेक्टेयर भूमि उपचारित की जा चुकी है। इन परियोजनाओं में विभिन्न कार्यो के लिए आवंटित 227 करोड़ रूपए की आवंटित राशि में से 156 करोड़ 43 लाख रूपए खर्च किए जा चुके हैं।
एकीकृत जलग्रहण प्रबंधन कार्यक्रम के तहत वित्तीय वर्ष 2010-11 में राज्य के 16 जिलों में कुल दो लाख 98 हजार 136 हेक्टेयर क्षेत्र के उपचार के लिए 357 करोड़ 76 लाख रूपए की लागत की 74 परियोजनाएं स्वीकृत की गई। इन परियोजनाओं की विस्तृत कार्य योजना तैयार करने, आस्थामूलक कार्य और क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण के कार्यो के लिए प्रथम किश्त की छह प्रतिशत राशि 18 करोड़ 42 लाख रूपए फरवरी 2011 में जिला पंचायतों को आवंटित की गई है। वर्ष 2011-12 में इन परियोजनओं की विस्तृत कार्य योजना के प्रस्तुतीकरण की कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के ऐसे जिले जहां जलग्रहण परियोजाओं क्षेत्र में 25 हजार हेक्टेयर या उससे अधिक भूमि का उपचार करने का लक्ष्य है, अथवा पूर्व से जिले में 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में परियोजनाएं संचालित है, वहां जिला स्तरीय जलग्रहण विकास इकाई का गठन किया जाएगा। इस संबंध में संबंधित जिलों को विभाग द्वारा आदेश जारी किए जा चुके है।
पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि जलग्रहण विकास कार्यक्रम के तहत सूखा उन्मूलन क्षेत्र कार्यक्रम में प्रारंभ से अब तक प्रदेश में दो लाख 64 हजार 409 हेक्टेयर भूमि का उपचार किया गया है एवं 23 हजार 191 हेक्टेयर नवीन सिंचित क्षेत्र में वृध्दि प्राप्त हुई है। इसी प्रकार एकीकृत पड़त भूमि विकास परियोजना के माध्यम से प्रारंभ से अब तक दो लाख 18 हजार 830 हेक्टेयर भूमि उपचारित की जा चुकी है और 22 हजार 996 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध हुई है। अधिकारियों ने बताया कि जलग्रहण विकास कार्यक्रम के तहत सूखा उन्मूलन क्षेत्र कार्यक्रम में प्रि-हरियाली के तहत प्रदेश के आठ जिलों के 425 माइक्रो वाटरशेड परियोजनाएं संचालित की जा रही है। इन परियोजनाओं में विभिन्न कार्यो के लिए पिछले वित्तीय वर्ष 2010-11 में आवंटित 39 करोड़ 10 लाख रूपए की राशि में से 22 करोड़ 88 लाख रूपए खर्च किए जा चुके हैं। एकीकृत पड़त भूमि विकास कार्यक्रम में भी प्रि-हरियाली के तहत प्रदेश के 11 जिलों में एक करोड़ 69 लाख 58 हजार रूपए खर्च किए गए है। जबकि सूखा उन्मूलन क्षेत्र कार्यक्रम में हरियाली के तहत प्रदेश के आठ जिलों में 507 माइक्रोवाटर शेड परियोजनाओं के माध्यम से आवंटित 27 करोड़ 77 लाख रूपए में से 16 करोड़ 25 लाख 35 हजार रूपए खर्च हो चुके है। एकीकृत पड़त भूमि विकास कार्यक्रम में भी हरियाली के तहत प्रदेश के 14 जिलों में दस करोड़ 55 लाख 97 हजार रूपए विभिन्न कार्यो पर खर्च किए गए है। वित्तीय वर्ष 2010-11 में 18 हजार 244 हेक्टेयर भूमि का उपचार किया गया और एक हजार 570 हेक्टेयर क्षेत्र में नवीन सिंचाई सुविधा में वृध्दि हुई है। तीन लाख 86 हजार 533 हेक्टेयर क्षेत्र में संचालित हो रही हैं। योजना प्रारंभ से अब तब दो लाख 58 हजार 152 हेक्टेयर भूमि उपचारित की जा चुकी है। इन परियोजनाओं में विभिन्न कार्यो के लिए आवंटित 227 करोड़ रूपए की आवंटित राशि में से 156 करोड़ 43 लाख रूपए खर्च किए जा चुके हैं।
एकीकृत जलग्रहण प्रबंधन कार्यक्रम के तहत वित्तीय वर्ष 2010-11 में राज्य के 16 जिलों में कुल दो लाख 98 हजार 136 हेक्टेयर क्षेत्र के उपचार के लिए 357 करोड़ 76 लाख रूपए की लागत की 74 परियोजनाएं स्वीकृत की गई। इन परियोजनाओं की विस्तृत कार्य योजना तैयार करने, आस्थामूलक कार्य और क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण के कार्यो के लिए प्रथम किश्त की छह प्रतिशत राशि 18 करोड़ 42 लाख रूपए फरवरी 2011 में जिला पंचायतों को आवंटित की गई है। वर्ष 2011-12 में इन परियोजनओं की विस्तृत कार्य योजना के प्रस्तुतीकरण की कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के ऐसे जिले जहां जलग्रहण परियोजाओं क्षेत्र में 25 हजार हेक्टेयर या उससे अधिक भूमि का उपचार करने का लक्ष्य है, अथवा पूर्व से जिले में 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में परियोजनाएं संचालित है, वहां जिला स्तरीय जलग्रहण विकास इकाई का गठन किया जाएगा। इस संबंध में संबंधित जिलों को विभाग द्वारा आदेश जारी किए जा चुके है।
क्रमांक-1122/चतुर्वेदी

