छत्तीसगढ़ में उन्नत और प्रमाणित बीज उत्पादन का रकबा दस गुना बढ़ा
किसानों को मिलेंगे अच्छे बीज
चालू खरीफ में 42 हजार हेक्टेयर में बीज उत्पादन कार्यक्रम
रायपुर, एक जुलाई 2011
छत्तीसगढ़ में किसानों को फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए राज्य सरकार द्वारा उन्नत और प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में अच्छी गुणवत्ता के बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके इसके लिए प्रदेश में बीज उत्पादन कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। वर्ष 2003-04 में राज्य में जहां केवल चार हजार 25 हेक्टेयर रकबे में बीज उत्पादन का कार्यक्रम लिया जाता था वहीं आज इसमें दस गुना से ज्यादा की बढ़ोत्तरी हो गयी है, और इस वर्ष खरीफ में 42 हजार हेक्टेयर में बीजोत्पादन का कार्यक्रम लिया जा रहा है। पिछले साल खरीफ में 35 हजार 471 हेक्टेयर में बीज उत्पादन के लिए फसलें लगायी गयी थी। जिसमें इस वर्ष साढ़े छह हजार हेक्टेयर की बढ़ोत्तरी की गयी है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य उन्नत और प्रमाणित बीजों के उत्पादन के मामले में तेजी से आत्मनिर्भर हो रहा है। प्रदेश के किसान स्वयं के द्वारा तैयार किए गए उन्नत और प्रमाणित बीज अपने खेतों में बो सकें इसके लिए राज्य सरकार द्वारा बीज उत्पादन के कार्यक्रम में निरंतर बढ़ोत्तरी की जा रही है। वर्ष 2003-04 में प्रदेश में जहां मात्र चार हजार 25 हेक्टेयर में बीजोत्पादन होता था वहीं वर्ष 2005-06 में छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के गठन के फलस्वरूप आज यह उत्तरोत्तर बढ़कर 42 हजार हेक्टेयर तक जा पहुंचा है। उन्होंने बताया कि चालू खरीफ मौसम में आधार बीज से प्रमाणित बीज बनाने के लिए 40 हजार हेक्टेयर में धान, अरहर, मक्का सहित सोयाबीन और तिल की फसलें लगायी जाएगी। इसी तरह प्रजनक बीज से आधार बीज बनाने के लिए एक हजार 960 हेक्टेयर में खरीफ की विभिन्न फसलों की बोआई की जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि आधार बीज से प्रमाणित बीज उत्पादन के लिए बीज निगम के प्रक्षेत्रों में 40 हजार हेक्टेयर रकबे में खरीफ फसलों को लगाया जाएगा। इसी प्रकार प्रजनक बीज से आधार बीज बनाने के लिए बीज निगम के प्रक्षेत्रों में एक हजार 335 हेक्टेयर में, शासकीय कृषि प्रक्षेत्रों में 480 हेक्टेयर में और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के प्रक्षेत्रों में 145 हेक्टेयर में बीजोत्पादन का कार्यक्रम लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पिछले खरीफ में 34 हजार 329 हेक्टेयर में आधार बीज से प्रमाणित बीज उत्पादन का कार्यक्रम लिया गया था। जिसमें बीज निगम के अधिकारियों की देख-रेख में सीधे किसानों के खेतों में 33 हजार 830 हेक्टेयर रकबे में बीजोत्पादन के लिए फसलें लगायी गयी थी। इसी तरह प्रजनक बीज से आधार बीज उत्पादन के लिए एक हजार 142 हेक्टेयर में फसलें लगायी गयी थी जिसमें कि 253 हेक्टेयर रकबे में सीधे किसानों के खेतों में बीजों का उत्पादन किया गया।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य उन्नत और प्रमाणित बीजों के उत्पादन के मामले में तेजी से आत्मनिर्भर हो रहा है। प्रदेश के किसान स्वयं के द्वारा तैयार किए गए उन्नत और प्रमाणित बीज अपने खेतों में बो सकें इसके लिए राज्य सरकार द्वारा बीज उत्पादन के कार्यक्रम में निरंतर बढ़ोत्तरी की जा रही है। वर्ष 2003-04 में प्रदेश में जहां मात्र चार हजार 25 हेक्टेयर में बीजोत्पादन होता था वहीं वर्ष 2005-06 में छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के गठन के फलस्वरूप आज यह उत्तरोत्तर बढ़कर 42 हजार हेक्टेयर तक जा पहुंचा है। उन्होंने बताया कि चालू खरीफ मौसम में आधार बीज से प्रमाणित बीज बनाने के लिए 40 हजार हेक्टेयर में धान, अरहर, मक्का सहित सोयाबीन और तिल की फसलें लगायी जाएगी। इसी तरह प्रजनक बीज से आधार बीज बनाने के लिए एक हजार 960 हेक्टेयर में खरीफ की विभिन्न फसलों की बोआई की जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि आधार बीज से प्रमाणित बीज उत्पादन के लिए बीज निगम के प्रक्षेत्रों में 40 हजार हेक्टेयर रकबे में खरीफ फसलों को लगाया जाएगा। इसी प्रकार प्रजनक बीज से आधार बीज बनाने के लिए बीज निगम के प्रक्षेत्रों में एक हजार 335 हेक्टेयर में, शासकीय कृषि प्रक्षेत्रों में 480 हेक्टेयर में और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के प्रक्षेत्रों में 145 हेक्टेयर में बीजोत्पादन का कार्यक्रम लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पिछले खरीफ में 34 हजार 329 हेक्टेयर में आधार बीज से प्रमाणित बीज उत्पादन का कार्यक्रम लिया गया था। जिसमें बीज निगम के अधिकारियों की देख-रेख में सीधे किसानों के खेतों में 33 हजार 830 हेक्टेयर रकबे में बीजोत्पादन के लिए फसलें लगायी गयी थी। इसी तरह प्रजनक बीज से आधार बीज उत्पादन के लिए एक हजार 142 हेक्टेयर में फसलें लगायी गयी थी जिसमें कि 253 हेक्टेयर रकबे में सीधे किसानों के खेतों में बीजों का उत्पादन किया गया।
क्रमांक-1484/पवन

