लाल क्रांति के नापाक मंसूबों से निपटने हरित क्रांति की जरूरत : श्री साहू
दूसरी हरित क्रांति की सफलता के लिए
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को विशेष सहायता का सुझाव
कोलकाता में आयोजित कार्यशाला में कृषि मंत्री ने किया छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व
रायपुर, 10 जुलाई 2010
कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू ने कहा है कि नक्सलियों की कथित लाल क्रांति के नापाक और विध्वंसक मंसूबों से निपटने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में हरित क्रांति की जरूरत है। श्री साहू ने पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में हरित क्रांति विस्तार योजना के संबंध में नौ जुलाई से आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के समापन दिवस पर आज इस आशय के विचार व्यक्त किए। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करते हुए श्री साहू ने केन्द्र सरकार को सुझाव दिया कि छत्तीसगढ़ सहित देश के अन्य पूर्वी राज्यों में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास के लिए खेती-किसानी को मुख्य आधार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि नक्सली समस्या से निपटने के लिए खेती का विकास और किसानों को सभी सुविधा उपलब्ध कराकर इन क्षेत्रों में हरित क्रांति के जरिए किसान को सभी जरूरी सुविधाएं दी जाए। श्री साहू ने दूसरी हरित क्रांति के तहत धान और अन्य फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए पूर्वी भारत विशेष कर छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष सहायता पैकेज उपलब्ध कराने का सुझाव दिया है, ताकि इन क्षेत्रों के किसानों को खेती के लिए खाद, बीज, दवा सहित सभी सुविधाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करायी जा सकें। श्री साहू ने कार्यशाला में यह भी सुझाव दिया कि हाईब्रिड बीजों के माध्यम से खेती को बढ़ावा देते समय देश के किसानों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाए। उन्होंने छत्तीसगढ़ में धान की विभिन्न किस्मों के लगभग 18 हजार जर्मप्लाज्मों से नयी किस्मों का विकास करने के लिए एक विशेष परियोजना स्वीकृत करने और धान फसल पर अनुसंधान करने के लिए राष्ट्रीय संस्थान की स्थापना का भी सुझाव दिया। कार्यशाला में केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शरद पवार, केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री प्रणव मुखर्जी सहित बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा के कृषि मंत्रियों ने भी दूसरी हरित क्रांति को सफल बनाने के लिए अपने-अपने सुझाव दिए।
कार्यशाला में कृषि मंत्री श्री साहू ने सुझाव दिया कि धान से धन की अवधारणा को साकार करने और किसानों को अधिक से अधिक लाभान्वित करने के लिए उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में इस योजना को सफल बनाने के लिए सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली है। वन अधिकार मान्यता अधिनियम 2006 के तहत वन भूमि का पट्टा प्राप्त करने वाले प्रदेश के अस्सी हजार किसानों को धान के उन्नत बीज और संतुलित उर्वरकों के मिनीकिट निःशुल्क प्रदान करने की योजना तैयार की गयी है। साथ ही आदिवासी बहुल क्षेत्रों में मक्का का उत्पादन और रकबा बढ़ाने के लिए एक-एक एकड़ रकबे पन्द्रह हजार प्रदर्शन भी इस योजना में आयोजित किए जाएंगे। श्री साहू ने बताया कि प्रदेश के तीन शक्कर कारखानों को गन्ना की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उन्नत गन्ने के टिश्यु कल्चर विधि से तैयार पौधों के पांच हजार फसल प्रदर्शनों का इस वर्ष आयोजन किया जाएगा। श्री साहू ने बताया कि छत्तीसगढ़ में बारिश के पानी को संग्रहित करने और भू-जल स्तर को बढ़ाने के लिए छोटे-छोटे तालाब और चेक डेम बनाने 40 करोड़ रूपए की योजना स्वीकृत की गयी है। इससे भू-जल के स्तर में सुधार के साथ-साथ कम वर्षा होने पर खरीफ फसलों को सुरक्षात्मक सिंचाई देना भी संभव हो पाएगा। साथ ही तालाबों में बचे पानी का उपयोग रबी फसलों में सिंचाई के लिए भी किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि हरित क्रांति विस्तर योजना के तहत धान की उत्पादकता बढ़ाने के लिए फसल प्रदर्शनों का आयोजन के अतिरिक्त प्रदेश के अल्पतम औसत उर्वरक उपयोग वाले 05 जिलों के अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के किसानों को 75 प्रतिशत अनुदान पर संतुलित उर्वरकों का किट प्रदान किया जा रहा है। धान के खेतों के मेढ़ों पर अरहर सहित दलहनी-तिलहनी फसलों की खेती और अंतवर्तीय फसल के रूप में भी सोयाबीन एवं कोदो-कुटकी के साथ अरहर-तिल तथा मक्का के साथ मूंग-उड़द की बोनी को बढ़ावा देने हरित क्रांति विस्तार योजनान्तर्गत प्रदेश में इस वर्ष 90 हजार दलहनी और तिलहनी फसलों के बीज मिनिकिट वितरण किये जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
श्री साहू ने सुझाव दिया कि भूमि की सेहत सुधारने और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए हरी खाद, कम्पोस्ट खाद और अन्य जैविक उर्वरकों के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को अधिक से अधिक आर्थिक सहायता उपलब्ध करायी जानी चाहिए। इससे उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ भारत सरकार द्वारा उर्वरकों पर दी जा रही अनुदान राशि में भी बचत की जा सकती है।

