बचत सह राहत योजना : सोलह सौ मछुआरों को मिली आर्थिक सहायता
वित्तीय वर्ष 2011-12 में मछुआरों को लाभान्वित करने 60 लाख रूपए का प्रावधान
रायपुर, 02 अप्रैल 2011
छत्तीसगढ़ में मछुआरों को बंद ऋतु काल के दौरान होने वाली आर्थिक तंगी से उबारने के लिए उन्हें प्रति माह छह सौ रूपए की सहायता मुहैया करायी जा रही है। इसके लिए राज्य शासन के मछलीपालन विभाग द्वारा बचत सह राहत योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस योजना के तहत बीते वित्तीय वर्ष 2010-11 में प्रदेश के सोलह सौ मछुआरों को बंद ऋतु काल के दौरान छह सौ रूपए प्रति माह की आर्थिक सहायता प्रदान की गयी है। वित्तीय वर्ष 2011-12 के बजट में विभाग द्वारा इस योजना के तहत मछुआरों को लाभान्वित करने 60 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है।
मछली पालन विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मछलियों के प्रजनन काल के दौरान प्रदेश की सभी नदी-नालों और सिंचाई जलाशयों में मछुआरों द्वारा मछलियों को पकड़ना प्रतिबंधित किया जाता है। इस अवधि में मछुआरों को रोजगार से वंचित होने के कारण आर्थिक कठिनाईयों का सामना न करना पड़े इसके लिए उन्हें आर्थिक सहायता मुहैया कराने का प्रावधान किया गया है। इस योजना के तहत मछुआरों से अंशदान के रूप में छह सौ रूपये लेकर उनके बैंक खातें में जमा किया जाता है। योजना के तहत राज्य शासन और केन्द्र शासन द्वारा भी छह-छह सौ रूपए का अंशदान जमा कराया जाता है। इस तरह मछुआरों के खाते में कुल एक हजार आठ सौ रूपए जमा होते हैं। इस राशि को मछलीपालन विभाग द्वारा मछुआरों को बारिश के मौसम में जब मछली पकड़ना प्रतिबंधित रहता है, तब छह सौ रूपये प्रतिमाह आर्थिक सहायता के रूप में तीन महीने तक दिया जाता हैं। अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2009-10 में इस योजना के तहत एक हजार 590 मछुआरों को तथा 2010-11 में सोलह सौ मछुआरों को लाभान्वित किया गया है।

