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मछली पालन के लिए जल संरक्षण सर्वोपरि : कृषि एवं मछली पालन मंत्री श्री साहू

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When Aug 19, 2011
from 08:25 PM to 08:25 PM
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मत्स्य सहकारियों के नेटवर्किंग और डाटाबेस सुदृढ़ीकरण पर कार्यशाला

रायपुर, 19 अगस्त 2011

    कृषि एवं मछली पालन मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू ने कहा है कि मछली पालन के साथ इस व्यवसाय से जुड़े मत्स्य कृषकों की सामाजिक-आर्थिक उन्नति के लिए जल के संग्रहण, संरक्षण और प्रबंधन की दिशा में कार्य करने की जरूरत है। श्री साहू आज यहां राष्ट्रीय मत्स्यजीवी सहकारी संघ मर्यादित (फिशकोपफेड) द्वारा आयोजित मत्स्य सहकारियों के नेटवर्किंग और डाटाबेस सुदृढ़ीकरण पर आयोजित कार्यशाला को 2367-190811सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर पांच मत्स्य कृषकों को दुर्घटना बीमा दावा की 2 लाख 70 हजार रूपए की राशि के चेक भी वितरित किए। इनमें स्वर्गीय श्री कीर्तन केवट की पत्नी संतोषी बाई, स्वर्गीय श्री गुलाब सिंह गोड़ की पत्नी बिन्दा बाई तथा श्री राम बघेल के पुत्र मोती राम को 50-50 हजार रूपए, स्वर्गीय श्री कवलसाय के पुत्र बुधवार साय को एक लाख रूपए एवं विकलांग होने पर श्रीमती गौरी बाई को 20 हजार रूपए की बीमा राशि प्रदान की गयी।
    मछली पालन मंत्री श्री साहू ने कहा कि कृषि के साथ मछली पालन के क्षेत्र में भी महिलाएं आगे आ रही हैं। उन्हें भी आगे लाने के साथ बेहतर उत्पादन करने पर पुरस्कृत कर प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है। श्री साहू ने कार्यशाला के आयोजन के साथ मत्स्य कृषकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम की सराहना करते हुए ऐसे आयोजनों का विकेन्द्रीकरण कर तहसील और ब्लाक स्तर पर किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कबीरधाम जिले के कवर्धा में खुले मत्स्य महाविद्यालय के युवा छात्र-छात्राओं का मछली पालन के क्षेत्र में आगे आकर बेहतर कार्य करने का आव्हान किया। श्री साहू ने कहा कि मछली पालन वास्तव में प्रकृति से नजदीकी संबंध रखने वाला व्यवसाय है, इस दृष्टि से इस व्यवसाय से जुड़े मत्स्य कृषकों की बीमा योजना महत्वपूर्ण है। उन्होंने मत्स्य कृषक सहकारी समितियों को गतिशील होकर पूरी जवाबदारी से कार्य करने आगे आने को कहा।
    राष्ट्रीय मत्स्यजीवी सहकारी संघ मर्यादित के अध्यक्ष श्री प्रकाश लोनारे ने कहा कि छत्तीसगढ़ में मछली पालन के क्षेत्र में क्रांति हो रही है, जो प्रशंसनीय है। उन्होंने बताया कि देश में इस संघ से 14 हजार 500 मछुआ सहकारी समितियां जुड़ी है, जिसमें छत्तीसगढ़ की 763 समितियां शामिल हैं। उन्होंने कहा यह राष्ट्रीय स्तर की सहकारी संस्था है, जो मछुआरों के लिए केन्द्रीय बीमा योजना का संचालन भी करती है। श्री लोनारे ने कहा कि संस्था का उद्देश्य सहकारी समितियों के माध्यम से मत्स्य कृषकों को एक शक्ति के रूप में उभारना है। संचालक मत्स्योद्योग श्री वी.के. शुक्ला ने छत्तीसगढ़ में 763 मछुआरा समितियों के डाटाबेस तैयार कर उन्हें नेटवर्किंग से जोड़ने की विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला को फिशकोपफेड के प्रबंध निदेशक श्री बी.के. मिश्रा ने भी सम्बोधित किया। कार्यशाला में प्रदेश भर से आए मछुआ सहकारी समितियों के अध्यक्ष, मत्स्य कृषक सदस्यगण सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

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