राष्ट्रीय विकास दर में वृध्दि के लिए कृषि विकास दर बढ़ाना जरूरी : श्री साहू
चौथे कृषि नेतृत्व शिखर सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री ने कहा
कृषि को संविधान की समवर्ती सूची में रखने की मांग
रायपुर 14 सितम्बर 2011
छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री श्री चंद्रशेखर साहू ने आज नई दिल्ली में आयोजित चौथे कृषि नेतृत्व शिखर सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय विकास दर को बढ़ाने के लिए कृषि विकास दर को बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कृषि देश की अर्थव्यवस्था का आधार है ऐसी स्थिति में कृषि व कृषकों के
लिए बदलती परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनानी होंगी। श्री साहू ने कृषि को संविधान की समवर्ती सूची में शामिल किए जाने की मांग की। उन्होंने राष्ट्रीय किसान आयोग द्वारा दी गई सिफारिशों को भी लागू करने की मांग की।
श्री साहू ने कहा कि कृषि में महिलाओं की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। कृषि में महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए आज यह जरूरी हो गया है कि उनकी भूमिका को चिन्हित कर उन्हें सम्मानित किया जाये। कृषि मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में किसानों और ग्रामीण कृषि मजदूरों को आगे बढ़ाने के लिए कई कल्याणकारी योजनायें लागू की गयी हैं। छत्तीसगढ़ एक मात्र ऐसा राज्य है, जहां गरीबों को एक रूपए व दो रूपए किलो में चावल प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कृषि के क्षेत्र में परम्परागत देशी तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने इसे आधुनिक कृषि विज्ञान से जोड़ने तथा इस दिशा में और अधिक शोध कार्य किये जाने पर जोर दिया।
श्री साहू ने कहा कि भारत में फसल उत्पादन पूरी तरह से मानसून पर ही निर्भर करता है। देश में कई दशक से मानसून में अनिश्चितता का दौर चल रहा है। ऐसी स्थिति में कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाना आज के समय की एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि कृषि को लाभकारी व्यवयाय बनाने के लिए यह बेहद जरूरी है कि उससे जुड़ी हर चुनौती का मुकाबला किया जाये। उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग व जलवायु परिर्वतन के कृषि पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी नये-नये शोध कर एक गाईड लाईन बनाये जाने का भी सुझाव दिया। सम्मेलन में प्रसिध्द कृषि वैज्ञानिक डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन, अन्य राज्यों के कृषि मंत्रियों सहित बड़ी संख्या में कृषि विशेषज्ञ उपस्थित थे।

