बीज खराब होने पर कम्पनियों से किसानों को मिले मुआवजा : श्री साहू
छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री ने बीज उत्पादक कम्पनियों के सम्मेलन में की मांग
रायपुर 13 सितम्बर 2010

छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू आज महाराष्ट्र की ग्रीष्मकालीन राजधानी नागपुर में आयोजित बीज उत्पादक कम्पनियों के सम्मेलन में शामिल हुए। सम्मेलन में श्री साहू ने बीजों की आपूर्ति के समय गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखने और बीजों को लम्बे समय तक अंकुरण लायक बनाए रखने के लिए पैंकिंग करते समय निर्धारित मापदण्डों का पालन करने की सलाह बीज उत्पादक कम्पनियों को दी। श्री साहू ने खेतों में बोने पर अंकुरित न होने वाले खराब बीजों के मामलों में कम्पनियों से किसानों को उचित मुआवजा अथवा आर्थिक क्षतिपूर्ति देने की भी मांग की। सम्मेलन में श्री साहू ने किसानों के हित में छत्तीसगढ़ में जैनेटिकली मॉडीफाईड बीजों की खेती को प्रतिबंधित रखने की राज्य सरकार की प्रतिबद्वता को दोहराया सम्मेलन का आयोजन महा सीडमेन एसोसिएशन द्वारा नागपुर के रजवाड़ा पैलेस में किया गया था। सम्मेलन में मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमारिया और प्याज एवं लहसून अनुसंधान संचालनालय, राजगुरूनगर के संचालक डॉ. के.ई. लावण्डे सहित महिको, अंकुर, कृषिधन, विभा, राशि आदि निजी बीज उत्पादक कम्पनियों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
सम्मेलन का संबोधित करते हुए कृषि मंत्री श्री साहू ने कहा कि खेती के लिए बीजों का महत्व सबसे अधिक है, इसे समझते हुए बीज उत्पादक कम्पनियों को अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों का उत्पादन करना चाहिए। बीजों की गुण्ावत्ता संबंधी सभी जांच करने के बाद ही उन्हें बेचने के लिए बाजार में भेजना चाहिए। श्री साहू ने विभिन्न बीज उत्पादक कम्पनियों के प्रतिनिधियों को कम पानी में भी अच्छा उत्पादन देने वाले और कीट-ब्याधियों के प्रति रोधक प्रजातियों के बीजों का अधिक से अधिक उत्पादन कर किसानों तक पहुंचाने की सलाह दी । उन्होंने कम्पनियों को विपरीत परिस्थितियों में भी अच्छा उत्पादन देने वाले बीज बनाने के लिए अनुसंधान कार्यो को भी प्राथमिकता से सहयोग देने पर जोर दिया। श्री साहू ने बीजों के खराब होने और खेतों में बोने पर अंकुरित न होने की स्थिति में किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए समय पर इन मामलों का समाधान करने की मांग की। श्री साहू ने कहा कि खराब बीजों से हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति के रूप में कम्पनियों द्वारा दी गयी सहायता से किसानों के बीच उनकी विश्वसनीयता बढ़ेगी और कम्पनी को उच्च गुणवत्ता के बीज उत्पादन की प्रेरणा भी मिलेगी।
कृषि मंत्री श्री साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पिछले दस वर्ष में बीज प्रतिस्थापन दर तेजी से बढ़ी है। धान की बीज प्रतिस्थापन दर 22 प्रतिशत, मक्का की 20 प्रतिशत, सोयाबीन की 65 प्रतिशत तथा अरहर और उड़द की बीज प्रतिस्थापन दर 15 प्रतिशत तक पहुंच गयी है। श्री साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हरित क्रांति विस्तार योजना को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए बीजों पर आत्म निर्भरता को मुख्य घटक के रूप में शामिल किया गया है। छत्तीसगढ़ तेजी से बीज उत्पादन में स्वावलंबन की तरफ बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में इस वर्ष लगभग 31 हजार हेक्टेयर रकबे में बीज उत्पादन कार्यक्रम लेने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। साथ ही किसानों को उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराने के लिए विक्रय दरों में भी भारी कमी की गयी है। सम्मेलन को मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमारिया ने भी संबोधित किया।
क्रमांक-2834/नागेश

