छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संस्थान खोला जाए : श्री चन्द्रशेखर साहू
केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री ने राज्य में जल्द ही राष्ट्रीय संस्थान खोलने का आश्वासन दिया
उद्यानिकी पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय कृषक प्रशिक्षण की शुरूआत
रायपुर, 14 नवम्बर 2011
छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू ने कहा है कि राज्य में कृषि और उद्यानिकी के विकास की असीम संभावनाएं हैं। छत्तीसगढ़ के किसान सीमित संसाधनों में भी देश के विकसित राज्यों के किसानों की बराबरी कर रहे हैं। श्री साहू ने कृषि और उद्यानिकी के विकास के लिए छत्तीसगढ़ में बुनियादी अधोसंरचनाओं के विकास पर जोर दिया। उन्होंने केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री डॉ. चरणदास महंत से छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संस्थान की स्थापना का अनुरोध किया। श्री साहू आज यहां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर और राष्ट्रीय बागवानी मिशन द्वारा आयोजित उद्यानिकी पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय कृषक प्रशिक्षण के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री डॉ. चरणदास महंत थे। डॉ. महंत और श्री चन्द्रशेखर साहू ने इस अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय प्रकाशित पुस्तकों विमोचन भी किया।
श्री चन्द्रशेखर साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ में उद्यानिकी के विस्तार में मुख्य बाधा फसलों की सुरक्षा का अभाव है। श्री साहू ने इस समस्या के निराकरण के लिए किसानों को फेन्सिंग के लिए अनुदान उपलबध कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृषि नीति में बदलाव करते हुए किसानों को खाद, बीज, दवा और कृषि यंत्रों पर दिए जाने वाले अनुदान की तरह ही खेतों की फेन्सिंग पर भी अनुदान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों के किसान भी नारियल और काजू सहित अनेक उद्यानिकी फसलों का बढ़िया उत्पादन कर रहे हैं। दिल्ली के बाजार में खपत होने वाली शिमला मिर्च का पचास प्रतिशत हिस्सा छत्तीसगढ़ से निर्यात होता है। श्री साहू ने कहा कि राज्य सरकार ने छोटे किसानों को उद्यानिकी फसलों के लिए प्रेरित करने के शाकंभरी योजना के माध्यम से अनुदान और अन्य सुविधाएं दी जा रही है। यह उनकी अतिरिक्त आमदनी का बेहतर जरिया बन गया है।
केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री डॉ. चरणदास महंत ने देश में उद्यानिकी फसलों के रकबे और उत्पादन को बढ़ावा दिए जाने की जरूरत जताते हुए केन्द्र सरकार द्वारा इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने देश में वर्षा की घटती मात्रा पर चिन्ता जाहित करते हुए शुष्क खेती को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों को शुष्क खेती के लिए उपयुक्त किस्मों के विकास पर अधिक ध्यान देना चाहिए। उन्होंने किसानों से भी शुष्क खेती की उन्नत तकनीकों को अपनाकर बेहतर उत्पादन करने की अपील की। डॉ. महंत ने कहा कि छत्तीसगढ़ में जल्द ही राष्ट्रीय स्तर का एक कृषि अनुसंधान संस्थान खोला जाएगा। उन्होंने छत्तीसगढ़ में धान की परम्परागत किस्मों के संरक्षण के लिए भी केन्द्र सरकार की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. पाटिल ने विश्वविद्यालय द्वारा उद्यानिकी विकास के लिए किए जा रहे कार्यो की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यहां आम, आंवला, बेर, सीताफल, लीची, काजू, नारियल आदि फसलों पर अनुसंधान कार्य किए जा रहे हैं। डॉ. पाटिल ने केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री से विश्वविद्यालय द्वारा बिलासपुर में आम अनुसंधान केन्द्र और जगदलपुर में काजू अनुसंधान केन्द्र खोलने के लिए केन्द्र सरकार को भेजे गए प्रस्ताव को जल्द स्वीकृति दिलाने का अनुरोध किया। इस अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के संचालक विस्तार सेवाएं डॉ. जे.एस. उरकुरकर सहित अनेक कृषि वैज्ञानिक और बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसान उपस्थित थे।

