खेतों के काया-कल्प से बदल रही जीवन की तस्वीर
वन अधिकार मान्यता पत्रों से मिलेगा 64 हजार से ज्यादा किसानों को फायदा
रायपुर, 12 नवम्बर 2010
वन अधिकार मान्यता पत्र धारक बस्तरिया किसानों को छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से भूमि समतीकरण के लिए मिल रही सहायता के फलस्वरूप जहां उनके खेतों का काया-कल्प हो रहा है, वहीं उनकी जिंदगी की तस्वीर भी बदल रही है और वे एक बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं। उल्लेखनीय है कि राज्य के आदिवासी बहुल बस्तर (जगदलपुर) जिले में 64 हजार 180 किसानों को वन अधिकार मान्यता पत्र दिए जा चुके हैं। इससे अब ये वनवासी सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए भी पात्रता के दायरे में आ चुके हैं। उन्हें कृषक के रूप में खेती के लिए भी शासकीय योजनाओं का हर संभव लाभ मिल सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के निर्देश पर अब उनके खेतों में भूमि सुधार की दृष्टि से उन्हें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत समतलीकरण के लिए और पिछड़ा क्षेत्र अनुदान कोष योजना के तहत इन खेतों में तार का घेरा लगाने और सिंचाई नलकूप खनन के लिए भी सहायता दी जा रही है।
राज्य सरकार के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि जिले के बास्तानार विकासखंड में किलेपाल के छह, विकासखंड तोकापाल में रानसरगीपाल के 17 और विकासखंड लोहंडीगुड़ा में ग्राम चित्रकोट के 23 वन अधिकार मान्यता पत्रधारक किसानों के खेतों में इस प्रकार के अनेक कार्य कराए जा चुके हैं। जिन खेतों का समतलीकरण और तार फेंसिंग का कार्य पूर्ण हो गया है उनमें मक्का, धान, अरहर तथा रामतिल फसल के प्रदर्शन नि:शुल्क उन्नतबीज और उर्वरक देकर उन्नत तकनीकी से खेती करना प्रायोगिक रूप से सिखाया जा रहा है। जिसमें संबंधित विकासखंड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी सतत तकनीकी मार्गदर्शन दे रहे हैं। वर्तमान में फसल की स्थिति ग्राम बड़ेकिलेपाल और रानसरगीपाल में बहुत अच्छी है। किसान बहुत खुश नजर आ रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि बस्तर (जगदलपुर) जिले के ग्राम चित्रकोट में कार्य पूर्ण होने के उपरांत फसल प्रदर्शन आयोजित कर किसानों को विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा। तोकापाल विकासखंड के ग्राम रानसरगीपाल में माड़िया जनजाति के सर्वश्री पिरला, लालू, बबलू, चैतू, बोरा, मंगलू, हिरमा और कोरीसुदय को भी वन अधिकार मान्यता पत्र दिए जा चुके हैं। इनकी 4.93 हेक्टेयर रकबे की जमीन के
भूमि समतलीकरण कार्य के लिए लगभग दो लाख 72 हजार की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गयी है। इसमें से एक लाख 38 हजार रूपए की राशि आरंभिक कार्य याने भूमि समतलीकरण करने के लिए जिला पंचायत द्वारा जारी की जा चुकी है। इन हितग्राहियों ने कहा कि इससे हमारी जमीन का कायाकल्प हो गया है। हम विपुल साग-सब्जी का उत्पादन करने में सक्षम हो रहे हैं। इसी प्रकार तोकापाल विकासखंड के अन्तर्गत ही आने वाले ग्राम पंचायत रानसरगीपाल के ही एक अन्य ''चक'' के ही आदिवासी वनवासी सर्वश्री भागीरथी, लछिन्दर, तुलाराम, सोनू, सिन्दू, ललित, लक्ष्मण, पिताम्बर और लेखन ने भी कहा कि राज्य शासन से उन्हें वन अधिकार मान्यता पत्र मिल गया है और उनकी कुल चार सौ हेक्टेयर से अधिक जमीन में समतलीकरण के लिए जिला पंचायत बस्तर द्वारा लगभग दो लाख 35 हजार की तकनीकी और प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान कर अब तक एक लाख 19 हजार रूपए की धनराशि जारी की जा चुकी है। भूमि समतलीकरण करने के बाद इन हितग्राहियों के खेतों में कृषि, उद्यानिकी और अन्य सहयोजित विभागों तथा बैंकर्स के द्वारा समानान्तर रूप से कार्य शुरू कर दिए गए। इन सभी ग्रामीणों ने कहा कि हमें बेहद खुशी है कि वन अधिकार मान्यता पत्र के बदौलत उनके जीवन की तकदीर बदल रही है। बास्तानार विकासखंड के अन्तर्गत आने वाले ग्राम पंचायत बड़ेकिलेपाल के आदिवासी वनवासी सर्वश्री गंगारोका, कोसा, सुकड़ा, मुंगड़ा, बामन और सुखमन ने भी बताया कि उनके हिस्से की सवा पन्द्रह हेक्टेयर की जमीन में भूमि समतलीकरण होने के पश्चात कृषि, उद्यानिकी विभाग के जरिए विपुल साग-सब्जी उत्पादन की योजना बनायी गयी है, जिसका फायदा वे उठाने के लिए तत्पर हैं। जिला पंचायत ने इन हितग्राहियों की जमीन के भूमि समतलीकरण के लिए लगभग आठ लाख 13 हजार की तकनीकी और प्रशासकीय स्वीकृति दी जा चुकी है।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि वन अधिकार मान्यता पत्र धारकों के खेतों में भूमि सुधार और अन्य जरूरी सुविधाओं के लिए कार्य शुरू करने के लिए वर्तमान में जिला पंचायत द्वारा नियुक्त क्रियान्वयन एजेंसी सहायक भूमि संरक्षण कार्यालय जगदलपुर को चार लाख रूपए का आवंटन जारी किया जा चुका है। इसी प्रकार लोहंडीगुड़ा विकासखंड के अन्तर्गत आने वाले ग्राम पंचायत चित्रकोट के आदिवासी वनवासी सर्वश्री बुदरू, राजूराम, पीलाराम, सायण्ाो, रूपधर, लक्ष्मण, आयतू, तेपेश्वर, दश्मन, मिठू, मनीराम, पाकलू, सुकूल, रामाराम, सोनूराम, बोडी, मुडका, सुखराम, बुदरू, डूडी, पेदा, मंगल और ठोई को भी वन अधिकार मान्यता पत्र प्रदान किया गया है। इन हितग्राहियों को 5.40 हेक्टेयर रकबे की जमीन उपलब्ध करायी गयी है। इनके इस हिस्से की जमीन के समतलीकरण के लिए लगभग तीन लाख 18 हजार की तकनीकी और प्रशासकीय स्वीकृति के आधार पर कार्य शुरू करने के लिए जिला पंचायत बस्तर द्वारा एक लाख 58 हजार रूपए की धनराशि जारी की जा चुकी है।

