औषधीय और सुगंधित फसलों को बढ़ावा
खेती के लिए 50 हजार रूपए तक अनुदान
पिछले दो वर्ष में 20 हजार किसानों को मिला फायदा
रायपुर, 26 अप्रैल 2011
औषधीय और सुगंधित फसलों की बढ़ती मांग और कीमतों को देखते हुए छत्तीसगढ़ में इनके उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा किसानों को एलोवेरा, लेमनग्रास, सिट्रीडोरा, खस और पामारोजा जैसी सुगंधित फसलों के उत्पादन के लिए नि:शुल्क बीज मिनीकिट और इन फसलों के क्षेत्र विस्तार के लिए 50 हजार रूपए तक अनुदान सहायता दी जा रही है। राज्य शासन के उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी विभाग द्वारा औषधीय और सुगंधित फसल उत्पादन योजना के तहत पिछले दो वर्षो में प्रदेश में पांच हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र विस्तार करते हुए करीब 20 हजार किसानों को लाभान्वित किया गया है।
उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि प्रदेश में औषधीय और सुगंधित फसलों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि किसान इन फसलों के उत्पादन से अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर सके। किसानों को एलोवेरा, लेमनग्रास, सिट्रीडोरा, खस और पामारोजा आदि फसलों के एक सौ रूपए की कीमत वाले बीज मिनीकिट नि:शुल्क प्रदान किए जा रहे है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2009-10 में चार हजार 450 किसानों को और वित्तीय वर्ष 2010-11 में 6 हजार 870 किसानों को नि:शुल्क बीज मिनीकिट प्रदान किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि औषधीय और सुगंधित फसलों के क्षेत्र विस्तार के लिए राष्ट्रीय बागवानी मिशन और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत किसानों को प्रति हेक्टेयर 12 हजार 500 रूपए का अनुदान भी दिया जा रहा है। एक किसान को अधिकतम चार हेक्टेयर तक कुल 50 हजार रूपए का अनुदान मिलता है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2009-10 में दो हजार एक सौ हेक्टेयर क्षेत्र विस्तार के लिए तीन हजार 846 किसानों को तथा वर्ष 2010-11 में दो हजार 260 हेक्टेयर क्षेत्र विस्तार के लिए पांच हजार 230 किसानों को अनुदान सहायता प्रदान की गयी है।

