छत्तीसगढ़ में रबी फसलों के बीज उत्पादित करने का सबसे बड़ा कार्यक्रम
आठ हजार 892 हेक्टेयर क्षेत्र में लिया गया कार्यक्रम
रायपुर, 25 मार्च 2010
छत्तीसगढ़ में चालू रबी मौसम में राज्य निर्माण के बाद सर्वाधिक रकबे में बीज उत्पादन के लिए फसलें लगाई गयी हैं। चालू रबी मौसम में आठ हजार 892 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में विभिन्न फसलों के बीजों का उत्पादन कार्यक्रम लिया जा रहा है। इसमें से आठ हजार 317 हेक्टेयर रकबे में सीधे किसानों के खेतों पर ही उन्नत किस्म के बीज प्राप्त करने के लिए बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत फसलें लगाई गई हैं, जबकि शासकीय कृषि प्रक्षेत्रों, बीज विकास निगम के प्रक्षेत्रों और इंदिरागांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रक्षेत्रों में भी चार सौ हेक्टेयर से अधिक रकबे में बीज उत्पादन कार्यक्रम लिया जा रहा है। इस वर्ष रबी मौसम में बीज उत्पादन का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में दो हजार हेक्टेयर बढ़ा है। पिछले पांच वर्षों में राज्य में रबी मौसम में बीज उत्पादन का रकबा एक हजार 419 हेक्टेयर से बढ़कर आठ हजार 892 हेक्टेयर हो गया है। गत वर्ष रबी मौसम में सात हजार 981 हेक्टेयर रकबे में बीज उत्पादन कार्यक्रम लिया गया था। किसानों को उन्नत किस्म के पूर्णत: शुध्द बीज उपलब्ध कराने के लिए पूरे राज्य में चालू रबी मौसम में सरसों, अलसी, तोरिया, मटर, गेंहू, चना सहित तिवड़ा और मूंग फसल का बीजोत्पादन किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा इस प्रकार उत्पादित बीज को किसानों के खलिहानों से ही बाजार मूल्य से अधिक दामों में खरीदकर बीजों के रूप में पुन: कृषकों को उपलब्ध कराया जाता हैं।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि राज्य निर्माण के बाद राज्य सरकार ने वर्ष 2002-03 में रबी मौसम में 967 हेक्टेयर रकबे में रबी फसलों का बीज उत्पादन कार्यक्रम किया था। बीज एवं कृषि विकास निगम द्वारा इस अवधि में उन्नत किस्म के चार हजार 779 क्विंटल बीजों का उत्पादन किया था। वर्ष 2003-04 में एक हजार 787 हेक्टेयर रकबे में रबी फसलों के बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत सात हजार 778 क्विंटल, वर्ष 2004-05 में एक हजार 419 हेक्टेयर क्षेत्र में बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत पांच हजार 695 क्विंटल बीज उत्पादित किए गए थे। बीज एवं कृषि विकास निगम द्वारा वर्ष 2005-06 में रबी फसलों के बीज उत्पादन के लिए एक हजार 814 हेक्टेयर रकबे में फसले लगाकर चार हजार 752 क्विंटल बीज उत्पादित किए गए। वर्ष 2006-07 के रबी मौसम में रबी फसलों के बीज उत्पादन कार्यक्रम का यह रकबा एक हजार 917 हेक्टेयर हो गया था, जिससे नौ हजार 265 क्विंटल बीज उत्पादित हुए थे। छत्तीसगढ़ में बीज एवं कृषि विकास निगम द्वारा पहली बार वर्ष 2007-08 में साढ़े चार हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में रबी फसलों का बीज उत्पादन कार्यक्रम लेने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। इस अवधि में चार हजार 659 हेक्टेयर से अधिक रकबे में बीज उत्पादन के लिए रबी की फसलें लगाई गयी और 27 हजार 535 क्विंटल उन्नत किस्म के बीज उत्पादित किए गए। वर्ष 2008-09 के रबी मौसम में यह रकबा बढ़कर छह हजार 136 हेक्टेयर और बीज उत्पादन 44 हजार 868 हो गया।
अधिकारियों ने बताया कि चालू रबी मौसम में बीज विकास निगम द्वारा लगभग आठ हजार 447 हेक्टेयर रकबे में रबी की विभिन्न फसलों के बीज उत्पादन किए जा रहे हैं। कृषि विभाग द्वारा भी 317 हेक्टेयर रकबे में रबी फसलों का बीजोत्पादन लिया जा रहा है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रक्षेत्रों में 79 हेक्टेयर और निजी संस्थाओं द्वारा लगभग 50 हजार हेक्टेयर में रबी फसलों का बीज उत्पादन किया जा रहा है। इस वर्ष चालू रबी मौसम में बीज एवं कृषि विकास निगम और कृषि विभाग के प्रक्षेत्रों में 447 हेक्टेयर रकबे में बीज उत्पादन के लिए रबी की विभिन्न फसलें लगाई गई हैं। बीज निगम के अधिकारियों की देख-रेख में सीधे किसानों के खेतों पर आठ हजार 235 हेक्टेयर रकबे में बीज उत्पादन के लिए फसलें लगाई गई हैं। कृषि विभाग ने भी अपने अधिकारियों के मार्ग दर्शन में 82 हेक्टेयर रकबे में बीज उत्पादन के लिए किसानों को तैयार कर फसलें लगवाई हैं।
इस संबंध में बीज प्रमाणीकरण संस्था के अधिकारियों ने भी बताया कि कोई भी कृषक या बीज उत्पादक संस्था जो बीज उत्पादन करना चाहता हो, उसे इस संस्था में अपना पंजीयन कराना पड़ता है। किसान फसल बोने के बीस दिनों के अन्दर आवेदन पत्र तथा निर्धारित शुल्क संस्था के कार्यालय में जमा कर पंजीयन करा सकते हैं। निर्धारित शुल्क का भुगतान प्रबंधक राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था के नाम से बैंक ड्राफ्ट बनाकर आवेदन पत्र के साथ संलग्न कर किया जाता है। बीज उत्पादक कृषक द्वारा पंजीयन कराने के बाद बीज प्रमाणीकरण संस्था के अधिकारी फसल का निरिक्षण करते है। अधिकारियों ने बताया कि बीजों की कटाई आदि के बाद उनकी सुखाकर उसकी ग्रेडिंग बीज प्रमाणीकरण संस्था द्वारा बीज प्रक्रिया केन्द्र पर 5 रूपए प्रति क्विंटल शुल्क देकर की जाती है। प्रत्येक किसान के बीज की प्रक्रिया के लिए प्रभारी द्वारा दिन निर्धारित किए जाते है तथा उसकी सूचना कृषकों को दी जाती है। बीज की प्रक्रिया के बाद बचे या अंडर साइज बीज को वापस ले जाया जा सकता है। प्रक्रिया उपरांत बीजों को बोरो में भरकर टैंगिंग कर दी जाती है तथा यहीं बीज कृषकों को पुन: बोने के लिए उपलब्ध कराया जाता है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि राज्य निर्माण के बाद राज्य सरकार ने वर्ष 2002-03 में रबी मौसम में 967 हेक्टेयर रकबे में रबी फसलों का बीज उत्पादन कार्यक्रम किया था। बीज एवं कृषि विकास निगम द्वारा इस अवधि में उन्नत किस्म के चार हजार 779 क्विंटल बीजों का उत्पादन किया था। वर्ष 2003-04 में एक हजार 787 हेक्टेयर रकबे में रबी फसलों के बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत सात हजार 778 क्विंटल, वर्ष 2004-05 में एक हजार 419 हेक्टेयर क्षेत्र में बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत पांच हजार 695 क्विंटल बीज उत्पादित किए गए थे। बीज एवं कृषि विकास निगम द्वारा वर्ष 2005-06 में रबी फसलों के बीज उत्पादन के लिए एक हजार 814 हेक्टेयर रकबे में फसले लगाकर चार हजार 752 क्विंटल बीज उत्पादित किए गए। वर्ष 2006-07 के रबी मौसम में रबी फसलों के बीज उत्पादन कार्यक्रम का यह रकबा एक हजार 917 हेक्टेयर हो गया था, जिससे नौ हजार 265 क्विंटल बीज उत्पादित हुए थे। छत्तीसगढ़ में बीज एवं कृषि विकास निगम द्वारा पहली बार वर्ष 2007-08 में साढ़े चार हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में रबी फसलों का बीज उत्पादन कार्यक्रम लेने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। इस अवधि में चार हजार 659 हेक्टेयर से अधिक रकबे में बीज उत्पादन के लिए रबी की फसलें लगाई गयी और 27 हजार 535 क्विंटल उन्नत किस्म के बीज उत्पादित किए गए। वर्ष 2008-09 के रबी मौसम में यह रकबा बढ़कर छह हजार 136 हेक्टेयर और बीज उत्पादन 44 हजार 868 हो गया।
अधिकारियों ने बताया कि चालू रबी मौसम में बीज विकास निगम द्वारा लगभग आठ हजार 447 हेक्टेयर रकबे में रबी की विभिन्न फसलों के बीज उत्पादन किए जा रहे हैं। कृषि विभाग द्वारा भी 317 हेक्टेयर रकबे में रबी फसलों का बीजोत्पादन लिया जा रहा है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रक्षेत्रों में 79 हेक्टेयर और निजी संस्थाओं द्वारा लगभग 50 हजार हेक्टेयर में रबी फसलों का बीज उत्पादन किया जा रहा है। इस वर्ष चालू रबी मौसम में बीज एवं कृषि विकास निगम और कृषि विभाग के प्रक्षेत्रों में 447 हेक्टेयर रकबे में बीज उत्पादन के लिए रबी की विभिन्न फसलें लगाई गई हैं। बीज निगम के अधिकारियों की देख-रेख में सीधे किसानों के खेतों पर आठ हजार 235 हेक्टेयर रकबे में बीज उत्पादन के लिए फसलें लगाई गई हैं। कृषि विभाग ने भी अपने अधिकारियों के मार्ग दर्शन में 82 हेक्टेयर रकबे में बीज उत्पादन के लिए किसानों को तैयार कर फसलें लगवाई हैं।
इस संबंध में बीज प्रमाणीकरण संस्था के अधिकारियों ने भी बताया कि कोई भी कृषक या बीज उत्पादक संस्था जो बीज उत्पादन करना चाहता हो, उसे इस संस्था में अपना पंजीयन कराना पड़ता है। किसान फसल बोने के बीस दिनों के अन्दर आवेदन पत्र तथा निर्धारित शुल्क संस्था के कार्यालय में जमा कर पंजीयन करा सकते हैं। निर्धारित शुल्क का भुगतान प्रबंधक राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था के नाम से बैंक ड्राफ्ट बनाकर आवेदन पत्र के साथ संलग्न कर किया जाता है। बीज उत्पादक कृषक द्वारा पंजीयन कराने के बाद बीज प्रमाणीकरण संस्था के अधिकारी फसल का निरिक्षण करते है। अधिकारियों ने बताया कि बीजों की कटाई आदि के बाद उनकी सुखाकर उसकी ग्रेडिंग बीज प्रमाणीकरण संस्था द्वारा बीज प्रक्रिया केन्द्र पर 5 रूपए प्रति क्विंटल शुल्क देकर की जाती है। प्रत्येक किसान के बीज की प्रक्रिया के लिए प्रभारी द्वारा दिन निर्धारित किए जाते है तथा उसकी सूचना कृषकों को दी जाती है। बीज की प्रक्रिया के बाद बचे या अंडर साइज बीज को वापस ले जाया जा सकता है। प्रक्रिया उपरांत बीजों को बोरो में भरकर टैंगिंग कर दी जाती है तथा यहीं बीज कृषकों को पुन: बोने के लिए उपलब्ध कराया जाता है।
क्रमांक-4509/नागेश

