टापवर्किंग के जरिए देशी पौधों की किस्मों में सुधार
बेरोजगारों को नि:शुल्क प्रशिक्षण और टूलकिट
रायपुर, 02 मई 2011
छत्तीसगढ़ में आम, आवंला और बेर के देशी पौधों को टापवर्किंग के जरिए अच्छी पैदावार देने वाली किस्मों में परिवर्तित किया जा रहा है। राज्य सरकार के उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी विभाग द्वारा टापवर्किंग कार्य के लिए ग्रामीण क्षेत्र के बेरोजगार युवकों को नि:शुल्क प्रशिक्षण और आवश्यक टूलकिट भी दिए जा रहे है। 
उद्यानिकी और प्रक्षेत्र वानिकी विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि टापवर्किंग के जरिए जहां आम, आवंला और बेर आदि के देशी पौधे अच्छी पैदावार देने वाली किस्मों में परिवर्तित हो रहे है वहीं इस कार्य से ग्रामीण क्षेत्र के बेरोजगार युवकों को रोजगार भी मिल रहा है। उन्होंने बताया कि टापवर्किंग कार्य के लिए विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के बेराजगार युवकों को बीस दिनों का नि:शुल्क प्रशिक्षण के साथ एक सौ रूपए कीमत का टूलकिट भी दिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान युवकों को दो सौ रूपए की छात्रवृति भी विभाग द्वारा दी जाती है। अधिकारियों ने बताया कि इन प्रशिक्षित युवकों के द्वारा किए गए टापवर्किंग कार्य पर प्रत्येक सफल ग्राफ्टिंग के लिए उन्हें दस रूपए पारिश्रमिक भी दिया जाता है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2009-10 में 81 हजार 210 देशी पौधों को टापवर्किंग के द्वारा उन्नत किस्मों में परिवर्तित किया गया है। इसी तरह वित्तीय वर्ष 2010-11 में लगभग एक लाख देशी पौधों की सफल ग्राफ्टिंग कर ग्रामीण क्षेत्र के बेरोजगार युवकों को लाभान्वित किया गया है।

