आधुनिक तकनीकों और श्रम शक्ति के तालमेल से हो कृषि का विकास : विधानसभा अध्यक्ष श्री कौशिक
कृषि महाविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ
इंजीनियरिंग इन्टरवेंशन इन एग्रीकल्चर पुस्तक का विमोचन
रायपुर, 03 जनवरी 2011

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष श्री धरमलाल कौशिक ने कहा कि आर्थिक मंदी के दौर में कृषि अर्थव्यवस्था के कारण ही भारत इससे अप्रभावित रहा। उन्होंने कृषि के विकास में आधुनिक यंत्रों और उपकरणों के प्रयोग के साथ-साथ परम्परागत उपकरणों को प्रदेश कीे परिस्थितियों और किसानों की आवश्यकता के अनुरूप विकसित करने का कृषि वैज्ञानिकों से आव्हान किया, जिससे किसान इन तकनीकों को आसानी से अपना कर अपनी आय में वृद्वि कर सकें। श्री कौशिक ने भू-जल के गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए कृषि वैज्ञानिकों को भू-जल स्तर को बढ़ाने की दिशा में भी विशेष काम करने पर जोर दिया। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रदेश के कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू ने कहा कि कृषि सिर्फ एक विज्ञान नही है बल्कि यह लोगों की अजीविका से जुड़ा विषय है इसलिए कृषि के विकास में नयी-नयी तकनीकों का इस्तेमाल होना चाहिए, परन्तु इससे कृषि कार्य में लगी मानव शक्ति का स्थानांतरण नहीं होना चाहिए। श्री साहू ने ऊर्जा के विकल्पों पर जोर देते हुए परम्परागत हस्त चलित और बैल चलित कृषि उपकरणों को ही मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप विकसित करने की आवश्यकता बतायी। जिससे ऊर्जा के बिना और कम खर्च में इन कृषि उपकरणों का आसानी से उपयोग किया जा सके। श्री साहू ने बताया कि प्रदेश के कवर्धा जिले में किसानों द्वारा बारिश के पानी को बांध द्वारा रोककर की जा रही खेती और गरियाबंद में कमार जनजाति द्वारा बनाए गए बांस के चेक डेम वॉटर हार्वेस्टिंग के अच्छे उदाहरण साबित हो रहे हैं, उन्होंने वैज्ञानिकों से इस दिशा में भी काम करने का आव्हान किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर और शेर-ए-कश्मीर कृषि और प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय श्रीनगर के पूर्व कुलपति डॉ. अनवर आलम ने वर्तमान में विकसित आधुनिक कृषि तकनीकों की विस्तार से जानकारी देते हुए प्रदेश के किसानों को चावल की खेती के साथ-साथ अन्य दूसरी फसलें भी लेने के लिए प्रेरित करने को कहा। उन्होंने प्रदेश में कृषि अभियांत्रिकी को बढ़ावा देने पृथक से एक विभाग भी गठित करने का सुझाव दिया। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एम.पी. पाण्डेय ने संगोष्ठी के आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। इस संगोष्ठी का आयोजन इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर और उसके अंतर्गत संचालित भवानी साव रामलाल साव स्मृति कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय मुंगेली, दि इंस्टीटयूट ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) और छत्तीसगढ़ स्टेट सेंटर एन.आई.टी. कैम्पस रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया है। दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के कृषि अभियंता, शोधार्थी, कृषि वैज्ञानिक, उद्यमी, योजना और क्रियान्वयनकर्ता अधिकारी, गैर शासकीय संस्था, टे्रक्टर, फार्म और माइक्रो इक्विपमेंट निर्माताओं सहित कृषकगणों ने हिस्सा लिया है। संगोष्ठी में कृषि वैज्ञानिकों और शोधार्थी द्वारा चार विषयों-फार्म पावर एण्ड मशीनरी, प्रोसेसिंग, डेयरी एण्ड फूड इंजीनियरिंग, सायल एण्ड वाटर इंजीनियरिंग और एनर्जी इन एग्रीकल्चर विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत किये जाएंगे। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय भिलाई के कुलपति श्री बी.सी. मल, कृषि विभाग के संचालक श्री प्रताप राव कृदत्त, अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय रायपुर श्री आर.के. साहू व अधिष्ठाता कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय मुंगेली श्री विनय कुमार पाण्डेय भी मौजूद थे।क्रमांक-5485/पवन

