आइसोपाम योजना: उन्नत खेती के तरीके सिखाने किसानों को साढ़े बाइस हजार रूपए से अधिक की सहायता
खाद, बीज और दवा सहित अनाज कोठियों के लिए भी अनुदान
किसानों को पिछले वर्ष ग्यारह करोड़ रूपए की सहायता मिली
रायपुर, 30 अप्रैल 2010
छत्तीसगढ़ के किसानों को उनके खेतों में ही खेती के उन्नत तरीके सिखाने के लिए बाइस हजार 680 रूपए तक का अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। यह अनुदान राज्य में संचालित आइसोपाम योजनांतर्गत चयनित गांव के लिए कृषक खेत पाठशाला के माध्यम से एकीकृत कीटनाशी प्रबंधन के लिए दिया जा रहा है। योजना के तहत चयनित गांव के 40 हेक्टेयर रकबे में आई.पी.एम.का प्रदर्शन आयोजित करने पर किसानों को यह सहायता राशि दी जाती है। राज्य में आईसोपाम योजना अन्तर्गत दलहन, तिलहन तथा मक्का विकास कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के तहत राज्य में तेरह करोड़ 80 लाख रूपए की योजना स्वीकृत की गयी थी। वित्तीय वर्ष 2009-10 में फरवरी माह तक इस योजना के तहत ग्यारह करोड़ तीन लाख रूपए की सहायता किसानों को उपलब्घ कराई गयी है। इस अवधि में तिलहन विकास योजना में नौ करोड़ 14 लाख, दलहन विकास योजना में एक करोड़ 71 लाख तथा मक्का विकास कार्यक्रम में 18 लाख 46 हजार रूपयों से राज्य के किसानों के लिए कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि यह विकास कार्यक्रम राज्य के सभी जिलों में दलहन-तिलहन फसलों के रकबे में वृध्दि तथा उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ अधिक लाभ देने वाली फसल मक्का को राज्य में बोने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संचालित किए जा रहे है। इस योजना में सभी श्रेणी के किसानों को लाभांवित किया जाता है, परन्तु लघु सीमांत, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिला किसानों को इस योजना में प्राथमिकता दी जाती है। आईसोपाम योजना में दलहन, तिलहन और मक्का बीज के लिए किसानो को अधिकतम एक हजार 200 रूपए प्रति क्विंटल की छूट दी जा रही है, साथ ही दलहन, तिलहन के बीज उत्पादन कार्यक्रम के लिए प्रति क्विंटल एक हजार रूपए का अनुदान भी उपलब्ध कराया जा रहा है। आइसोपाम योजना में किसानों को खेती के नई-नई तकनीकें सीखाने के लिए उनके खेतों पर ही शासकीय अनुदान पर खण्ड प्रदर्शन भी आयोजित किए जा रहे हैं। किसानों को मूंगफली और मक्का के खण्ड प्रदर्शनों के लिए अधिकतम चार हजार रूपए, सोयाबीन के प्रदर्शन के लिए तीन हजार रूपए, सरसों और तिल के लिए दो हजार रूपए, सूरजमुखी के प्रदर्शन के लिए ढाई हजार रूपए, और अलसी तथा कुसुम प्रदर्शन के लिए डेढ़ हजार रूपए प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जा रही है। योजना के तहत किसानों को अपनी उपज को भण्डारित करने के लिए आधे दामों पर अनाज कोठियां भी उपलब्घ कराई जा रही है। योजना में खरपतवार नाशक तथा कीटनाशक रसायनों के लिए भी अलग-अलग अधिकतम 500 रूपए तक की छूट किसानों की दी जाती है। दवा छिड़कने के लिए स्प्रेयर-डस्टर खरीदने के लिए 800 रूपए और शक्ति चलित यंत्र खरीदने के लिए अधिकतम दो हजार रूपए तक का अनुदान भी योजना में दिया जा रहा है। प्रदेश के अनुसूचित जाति-जनजाति, लघु, सीमांत तथा महिला सहित सभी किसानों को इस योजना के माध्यम से सिंचाई के लिए आठ सौ मीटर तक लम्बाई की पाईप लाईन के लिए पाईप कीमत की 50 प्रतिशत या अधिकतम 15 हजार रूपए की छूट पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
आइसोपाम योजना से लाभ उठाने के लिए कृषकों का चयन गाम पंचायत की अनुशंसा के बाद कृषि विभाग के स्थानीय कार्यालय द्वारा किया जाता है। कृषकों के आवेदनों को क्षेत्र के गामीण कृषि विस्तार अधिकारी तथा वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के माध्यम से उप संचालक को भेजा जाता है।

