छत्तीसगढ़ में जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा
जैविक खेती पर एक दिवसीय संगोष्ठी आयोजित
रायपुर, 15 जनवरी 2011

दुनिया भर में रसायनों के उपयोग के बगैर उत्पादित फसलों के बढ़ते प्रचलन के कारण जैविक खेती का महत्व दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। छत्तीसगढ़ इस मामले में सौभग्यशाली है कि यहां खेती का बड़ा हिस्सा रसायनों, उर्वरकों एवं कीटनाशक के बहुत कम उपयोग की वजह से जैविक खेती के दायरे में आता है, अत: यहां जैविक खेती को बढ़ावा देना काफी आसान है। यहां जैविक खेती के लिए उपलब्ध माकूल परिस्थितियों का किसानों को फायदा उठाना चाहिए। छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद द्वारा यहां कृषि महाविद्यालय सभागार में जैविक खेती पर आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी में यह निष्कर्ष उभरकर सामने आए। संगोष्ठी का उद्धाटन लोकसभा सांसद श्री रमेश बैस ने किया और कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में बीज निगम के अध्यक्ष श्री श्याम बैस, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एम.पी.पांडे तथा कृषक कल्याण्ा परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. विशाल चन्द्राकर उपस्थित थे। संगोष्ठी में प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए।
संगोष्ठी का उद्धाटन करते हुए सांसद श्री रमेश बैस ने कहा कि पिछले वर्षो में आयी वैश्विक मंदी से भारत ज्यादा प्रभावित नही हुआ क्योकि यहां की अर्थ व्यवस्था कृषि पर आधारित है। कृषि और किसानों में विषम परिस्थितियों से जूझने की अद्भुत सहन शक्ति होती है और इसी सहन शक्ति ने हमारे देश को मंदी की मार से बचाये रखा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में जैविक खेती की पारंपरिक रीति को और अधिक बढ़ावा दिया जाना चाहिए। कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू ने कहा कि राज्य सरकार जैविक खेती को काफी बढ़ावा दे रही है और किसानों को जैविक खेती अपनाने को प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की अनेक योजनाओं में जैविक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए किसानों को विभिन्न प्रकार की सुविधाएं और अनुदान दिये जा रहे हैं। उन्होंनें कहा कि जैविक खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए कृषि विभाग के अमले को किसानों के खेतों तक पहुंचाकर उन्हें इस बारे में आवश्यक मार्गदर्शन और तकनीकी सलाह उपलब्ध कराना चाहिए।
संगोष्ठी में विषय विशेषज्ञों के रूप में मौजूद डॉ. परतुरे और डॉ. अजय सिंह राजपूत ने किसानों को जैविक खेती पर विस्तृत जानकारी दी और कहा कि जैविक खेती पर्यावरण हितैषी होने के साथ-साथ किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए भी महत्वपूर्ण है अत: किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए आगे आना चाहिए। इस अवसर पर किसानों को जैविक उत्पादों से परिचित कराने के लिए जैविक उत्पादों पर केन्द्रित प्रदर्शनी आयोजित की गयी।

