छत्तीसगढ़ में आलू की खेती को बढ़ावा
किसानों को उन्नत बीज, उर्वरक और कीटनाषक दवाओं के लिए आर्थिक मदद
दो वर्षो में 45 हजार किसानों को मिला फायदा
रायपुर, 5 अप्रैल 2011
छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल पहाड़ी क्षेत्रों में आलू की खेती को बढ़ावा देने राज्य सरकार द्वारा किसानों को हर संभव मदद दी जा रही है। प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को आलू की खेती के लिए उन्नत बीज, उर्वरक और कीटनाशक दवाओं के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। राज्य शासन के उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी विभाग द्वारा संचालित आलू विकास योजना के तहत राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में निवासरत
अनुसूचित जनजाति और जनुसूचित जाति वर्ग के किसानों को आलू के क्षेत्र विस्तार के लिए आठ सौ रूपए का अनुदान दिया जा रहा है। वहीं राज्य के अन्य किसानों को आलू बीज, उर्वरक और कीटनाशक दवाओं के लिए पांच सौ रूपए की अनुदान सहायता दी जा रही है। पिछले दो सालों में इस योजना के तहत राज्य के 45 हजार से अधिक किसानों को लाभान्वित किया गया है।
उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि प्रदेश में आलू के उत्पादन को बढ़ाने तथा किसानों को अतिरिक्त आमदनी प्राप्त करने उन्हें आलू की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा किसानों को खरीफ और रबी मौसम में आलू के क्षेत्र विस्तार के तहत 1/10 हेक्टेयर के लिए पांच सौ रूपए की अनुदान सहायता दी जा रही है। वहीं राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में निवासरत अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों को उनके प्रक्षेत्रों में आलू प्रदर्शन के लिए आठ सौ रूपए का अनुदान दिया जा रहा है। पठारी क्षेत्रों में ढाई हजार फीट से ऊचे पहाड़ों में किसानों के यहां दो सौ रूपए की लागत से खरीफ प्रदर्शन लगाए जा रहे है। जहां दूसरे साल इन किसानों को 1/5 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए प्रति प्रदर्शन आठ सौ रूपए की अनुदान सहायता दी जाती है। जिसमें आलू बीज के लिए 562 रूपए 50 पैसे, उर्वरक के लिए दो सौ रूपए और कीटनाषक दवाओं के लिए 37 रूपए 50 पैसे अनुदान सहायता शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि तीसरे साल में किसान बैंक से ऋण प्राप्त कर सकते है। उन्होंने बताया कि राज्य में वित्तीय वर्ष 2009-10 में किसानों के प्रक्षेत्रों में 17 हजार 808 आलू के प्रदर्शन डाले गए वहीं वर्ष 2010-11 में करीब 27 हजार किसानों को आलू की खेती के लिए अनुदान सहायता प्राप्त कर उन्हें लाभान्वित किया गया है।
अनुसूचित जनजाति और जनुसूचित जाति वर्ग के किसानों को आलू के क्षेत्र विस्तार के लिए आठ सौ रूपए का अनुदान दिया जा रहा है। वहीं राज्य के अन्य किसानों को आलू बीज, उर्वरक और कीटनाशक दवाओं के लिए पांच सौ रूपए की अनुदान सहायता दी जा रही है। पिछले दो सालों में इस योजना के तहत राज्य के 45 हजार से अधिक किसानों को लाभान्वित किया गया है।उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि प्रदेश में आलू के उत्पादन को बढ़ाने तथा किसानों को अतिरिक्त आमदनी प्राप्त करने उन्हें आलू की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा किसानों को खरीफ और रबी मौसम में आलू के क्षेत्र विस्तार के तहत 1/10 हेक्टेयर के लिए पांच सौ रूपए की अनुदान सहायता दी जा रही है। वहीं राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में निवासरत अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों को उनके प्रक्षेत्रों में आलू प्रदर्शन के लिए आठ सौ रूपए का अनुदान दिया जा रहा है। पठारी क्षेत्रों में ढाई हजार फीट से ऊचे पहाड़ों में किसानों के यहां दो सौ रूपए की लागत से खरीफ प्रदर्शन लगाए जा रहे है। जहां दूसरे साल इन किसानों को 1/5 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए प्रति प्रदर्शन आठ सौ रूपए की अनुदान सहायता दी जाती है। जिसमें आलू बीज के लिए 562 रूपए 50 पैसे, उर्वरक के लिए दो सौ रूपए और कीटनाषक दवाओं के लिए 37 रूपए 50 पैसे अनुदान सहायता शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि तीसरे साल में किसान बैंक से ऋण प्राप्त कर सकते है। उन्होंने बताया कि राज्य में वित्तीय वर्ष 2009-10 में किसानों के प्रक्षेत्रों में 17 हजार 808 आलू के प्रदर्शन डाले गए वहीं वर्ष 2010-11 में करीब 27 हजार किसानों को आलू की खेती के लिए अनुदान सहायता प्राप्त कर उन्हें लाभान्वित किया गया है।
क्रमांक 587/पवन

