नाव-जाल खरीदने मछुआरों को मिली डेढ़ करोड़ रूपए की सहायता
रायपुर, 07 मई 2011
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेश के अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति वर्ग के मछुआरों को तालाबों, जलाशयों और नदियों में मछली पकड़ने के लिए नाव-जाल खरीदने हेतु दस-दस हजार रूपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। राज्य शासन के मछलीपालन विभाग द्वारा मछुआरों को स्वरोजगार के साधन मुहैया के उद्देश्य से वर्ष 2007-08 से शुरू की गयी इस योजना के तहत विगत तीन वर्षो में राज्य के 15 सौ मछुआरों को नाव-जाल के लिए डेढ़ करोड़ रूपए की सहायता दी गयी है।
कृषि एवं मछली पालन मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू ने आज यहां बताया कि राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ में मछलीपालन को बढ़ावा देने और मछलीपालन व्यवसाय से जुड़े मछुआरों को आर्थिक रूप से संपन्न बनाने उन्हें हर संभव मदद दी जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति वर्ग के मछुआरों को स्वरोजगार स्थापित करने नाव-जाल सहित अन्य उपकरण खरीदने के लिए उन्हें दस-दस हजार रूपए की सहायता दी जा रही है। इसमें नाव (डोंगा) के लिए सात हजार रूपए और जाल के लिए तीन हजार रूपए की सहायता दी जाती है। इस योजना से लाभ लेने के लिए अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति वर्ग के वे हितग्राही ही पात्र होते है जिनके पास लंबी अवधि के लीज पर तालाब उपलब्ध है।
श्री साहू ने बताया कि हितग्राहियों का चयन जिला पंचायत की अध्यक्षता में गठित कृषि स्थायी समिति द्वारा किया जाता है। इस चयन समिति में दो नामांकित अशासकीय सदस्यों के अलावा मत्स्योद्योग विभाग के संयुक्त संचालक, उप संचालक या सहायक संचालक स्तर के अधिकारी शामिल होते हैं। इस योजना के तहत उन मछुआरों को यह सहायता दी जाती है, जिनकी जीविका मत्स्याखेट पर ही निर्भर है और किसी हितग्राही को यह सहायता एक बार ही मिलती है।
कृषि एवं मछली पालन मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू ने आज यहां बताया कि राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ में मछलीपालन को बढ़ावा देने और मछलीपालन व्यवसाय से जुड़े मछुआरों को आर्थिक रूप से संपन्न बनाने उन्हें हर संभव मदद दी जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति वर्ग के मछुआरों को स्वरोजगार स्थापित करने नाव-जाल सहित अन्य उपकरण खरीदने के लिए उन्हें दस-दस हजार रूपए की सहायता दी जा रही है। इसमें नाव (डोंगा) के लिए सात हजार रूपए और जाल के लिए तीन हजार रूपए की सहायता दी जाती है। इस योजना से लाभ लेने के लिए अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति वर्ग के वे हितग्राही ही पात्र होते है जिनके पास लंबी अवधि के लीज पर तालाब उपलब्ध है।
श्री साहू ने बताया कि हितग्राहियों का चयन जिला पंचायत की अध्यक्षता में गठित कृषि स्थायी समिति द्वारा किया जाता है। इस चयन समिति में दो नामांकित अशासकीय सदस्यों के अलावा मत्स्योद्योग विभाग के संयुक्त संचालक, उप संचालक या सहायक संचालक स्तर के अधिकारी शामिल होते हैं। इस योजना के तहत उन मछुआरों को यह सहायता दी जाती है, जिनकी जीविका मत्स्याखेट पर ही निर्भर है और किसी हितग्राही को यह सहायता एक बार ही मिलती है।
क्रमांक-627/पवन

