गन्ना किसानों को 46 लाख रूपए की सहायता
लगभग दो लाख टिश्यू कल्चर पौधों सहित खाद
और गन्ना बीज परिवहन के लिए भी अनुदान
रायपुर, 04 मई 2010
छत्तीसगढ़ के गन्ना उत्पादक किसानों को गन्ने की खेती के लिए वर्ष 2009-10 में अब तक 46 लाख रूपए की आर्थिक सहायता दी गई है। यह सहायता राज्य शासन द्वारा संचालित गन्ना विकास योजना और केन्द्र शासन की गन्ना आधारित फसल पध्दति विकास कार्यक्रम के तहत दी गई है। कृषक समग्र विकास योजना के तहत गन्ना विकास कार्यक्रम के लिए किसानों को बीज खरीदने, टिश्यू कल्चर से बने पौधे, पोषक तत्व युक्त खाद और कृषि यंत्रों के लिए साढ़े 31 लाख रूपए की सहायता उपलब्ध कराई गई है। केन्द्र प्रवर्तित योजना के तहत गन्ने की खेती करने वाले किसानों को अब तक साढ़े 14 लाख रूपए का अनुदान दिया गया है। राज्य शासन की योजना के तहत किसानों को राज्य के बाहर गन्ना बीज के परिवहन के लिए छह सौ रूपए प्रति टन और राज्य के अन्दर चार सौ रूपए प्रति टन की दर से सहायता दी गई है। योजना के तहत गन्ना उत्पादक किसानों को टिश्यू कल्चर से बने एक लाख 92 हजार पौधों के लिए भी आठ लाख 22 हजार रूपए की सहायता दी गई है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि छत्तीसगढ़ में संचालित किए जा रहे सहकारी शक्कर कारखानों को गन्ने की पर्याप्त आपूर्ति के लिए राज्य शासन द्वारा गन्ना विकास योजना चलाई जा रही है। गन्ने का उत्पादन और रकबा बढ़ाने के लिए इस योजना के तहत किसानों को विभिन्न चरणों में आर्थिक सहायता दी जा रही है। गन्ना बीज खरीदने के लिए किसानों को प्रति हेक्टेयर तीन हजार रूपए का अनुदान दिया जा रहा है। टिश्यू कल्चर से बने गन्ने के पौधों के लिए दो रूपए प्रति पौधे के हिसाब से किसानों को अनुदान दिया जा रहा हैं गन्ने के बीज बोने से पूर्व उन्हें दवाई से उपचारित करने के लिए 100 रूपए प्रति हेक्टेयर की दर से बीज उपचार दवा पर छूट दी जा रही है। गन्ने की फसल में उपयोगी सूक्ष्म पोषक तत्वों वाली खाद की खरीदी पर भी किसानों को 200 रूपए प्रति हेक्टेयर के हिसाब से अनुदान दिया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि गन्ना विकास योजना के तहत हाथ चलने वाले कृषि यंत्रों पर किसानों को एक हजार 600 रूपए, शक्ति चलित यंत्रों पर चार हजार रूपए का अनुदान दिया जा रहा है। योजना के तहत किसानों को गन्ना उत्पादन की उन्नत तकनीकों की जानकारी देने के लिए प्रशिक्षित भी किया जा रहा है। गन्ना उत्पादन की नई-नई तकनीकों से अवगत कराने के लिए 30-30 किसानों के समूह बनाकर उन्हें राज्य के भीतर अन्य स्थानों पर प्रशिक्षण दिलाने के लिए 30 हजार रूपए प्रति समूह व्यय किया जा रहा है। योजना के तहत राज्य के बाहर के प्रशिक्षण संस्थानों और उन्नत कृषकों के खेतों का अवलोकन कराने के लिए प्रति समूह 45 हजार रूपए व्यय करने का प्रावधान किया गया है। किसानों को राज्य के बाहर गन्ना बीज परिवहन के लिए प्रति टन 600 रूपए का अनुदान भी दिया जा रहा है। गन्ना बीजों का राज्य के अन्दर परिवहन करने पर किसानों को पहले 10 किलोमीटर की दूरी के लिए 10 रूपए प्रति किलोमीटर प्रति टन की दर से अधिकतम चार सौ रूपए प्रति टन आर्थिक सहायता दी जा रही है।
अधिकारियों ने बताया कि केन्द्र शासन द्वारा संचालित गन्ना आधारित फसल पध्दति विकास कार्यक्रम प्रदेश के 10 जिलों रायपुर, धमतरी, दुर्ग, राजनांदगांव, कबीरधाम, बिलासपुर, रायगढ़, सरगुजा, जशपुर और बस्तर में क्रियान्वित किया जा रहा है। केन्द्र प्रवर्तित योजना के तहत किसानों को गन्ना उत्पादन की उन्नत तकनीक सीखाने 31 प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं।

