छत्तीसगढ़ को उन्नत बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की पहल : मुख्यमंत्री की कार्य-योजना के उत्साहजनक नतीजे
बीज उत्पादन का रकबा 40 हजार हेक्टेयर तक बढ़ा
वितरण का आंकड़ा बढ़कर हुआ 5.19 लाख क्विंटल से अधिक
रायपुर, 02 मार्च 2011
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य के किसानों को फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए राज्य के भीतर उन्नत और प्रमाणित बीजों के उत्पादन और वितरण की जिस कार्य-योजना पर अमल शुरू किया है, विगत छह वर्षों में उसके उत्साहजनक नतीजे सामने आए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह चाहते हैं कि राज्य के किसान अपनी खेती की जरूरतों के लिए अच्छे किस्म के बीजों का उत्पादन भी स्वयं करें। बीज उत्पादन और वितरण की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने वर्ष 2005-06 में छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम का गठन किया था।
निगम अध्यक्ष श्री श्याम बैस के अनुसार अपनी स्थापना की इस छोटी सी अवधि में ही निगम ने अपनी उपयोगिता और सार्थकता प्रमाणित कर दी है। निगम द्वारा किसानों को उनके खेतों में उन्नत और प्रमाणित बीज पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके अलावा विभिन्न जिलों में स्थित निगम के स्वयं के 21 प्रक्रिया केन्द्रों के कृषि प्रक्षेत्राें में भी अच्छे किस्म के बीज पैदा किए जा रहे हैं। निगम अध्यक्ष श्री बैस ने आज बताया कि इन सब प्रयासों के बेहतर नतीजे अब देखे जा रहे हैं। इस अवधि में राज्य में खरीफ और रबी फसलों के बीज उत्पादन का कुल रकबा साढ़े छह हजार हेक्टेयर से बढ़कर लगभग चालीस हजार हेक्टेयर तक और उन्नत बीज वितरण का आंकड़ा 66 हजार 860 क्विंटल से बढ़कर पांच लाख 19 हजार 339 क्विंटल तक पहुंच गया है। वर्ष 2005-06 के पहले जहां राज्य में खरीफ के दौरान केवल चार हजार 103 हेक्टेयर में उन्नत और प्रमाणित बीज तैयार करने की क्षमता थी, वहीं वर्ष 2010-11 की स्थिति में यह बढ़कर 32 हजार हेक्टेयर से भी अधिक हो गयी है। इसी तरह वर्ष 2005-06 से पहले रबी फसलों के लिए निगम के गठन के पूर्व छत्तीसगढ़ में केवल एक हजार 419 हेक्टेयर में बीज उत्पादन कार्यक्रम लिया जाता था, जबकि निगम के गठन के बाद इसमें तेजी और अब वर्ष 2010-11 की स्थिति में निगम की योजनाओं के तहत सात हजार 759 हेक्टेयर में रबी फसलों के बीजों की पैदावार ली जा रही है। प्रमाणित और उन्नत बीज तैयार करने के लिए रकबा बढ़ने पर किसानों को देने के लिए निगम के पास अब इन बीजों की उपलब्धता भी बढ़ती जा रही है। वर्ष 2005 में पहले छत्तीसगढ़ में कृषि विभाग की ओर से खरीफ के दौरान किसानों को 54 हजार 890 क्विंटल प्रमाणित बीज दिए गए थे, जबकि निगम की स्थापना के बाद वर्ष 2006 में प्रमाणित बीजों का वितरण बढ़कर 71 हजार 852 क्विंटल तक पहुंच गया। वहीं इसके अगले साल 2007 में निगम द्वारा किसानों को एक लाख 02 हजार 198 क्विंटल, वर्ष 2008 में दो लाख 04 हजार 652 क्विंटल, वर्ष 2009 में तीन लाख 10 हजार 065 क्विंटल और वर्ष 2010 में चार लाख 28 हजार 887 क्विंटल उन्नत और प्रमाणित बीज किसानों को दिलाए गए। रबी फसलों के लिए भी निगम द्वारा उन्नत बीज बांटवाए जा रहे हैं। इसमें भी काफी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। निगम के गठन से पहले वर्ष 2004-05 में राज्य के किसानों को कृषि विभाग के माध्यम से जहां 11 हजार 970 क्विंटल बीज रबी कार्यक्रम के तहत दिए गए थे, वहीं निगम की स्थापना के बाद वर्ष 2005-06 में 12 हजार 090 क्विंटल, वर्ष 2006-07 में 09 हजार 376 क्विंटल बीजों का वितरण हुआ, जबकि वर्ष 2007-08 में वितरण का आंकड़ा बढ़कर 30 हजार 955 क्विंटल तक पहुंच गया। इसके अगले ही वर्ष 2008-09 में रबी कार्यक्रम के तहत निगम की ओर से किसानों को 54 हजार 080 क्विंटल, वर्ष 2009-10 में 69 हजार 467 क्विंटल और वर्ष 2010-11 में 80 हजार 452 क्विंटल बीज किसानों को दिए गए।
श्री बैस ने बताया कि निगम द्वारा प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए रायपुर जिले के अभनपुर में जैविक खाद संयंत्र की स्थापना की जा रही है, जिसका निर्माण पूर्णता की ओर है। इस संयंत्र की वार्षिक उत्पादन क्षमता 150 मीटरिक टन होगी। इसमें दलहनी और तिलहनी फसलों के लिए राइजोबियम, गेहूँ, मक्का और कुछ अन्य फसलाें के लिए एजोटोबेक्टर और सभी प्रकार की फसलों के लिए पी.एस.बी. जैविक खाद तैयार किया जाएगा। इसके अलावा रायपुर जिले के ही ग्राम पोखरा स्थित निगम के कृषि प्रक्षेत्र में किसानों को उन्नत बीजों के उत्पादन और उन्नत खेती का प्रशिक्षण देने के लिए भक्त माता राजिम कृषक गुरूकुल की स्थापना भी की जा रही है। इसके लिए प्रक्षेत्र में एक सौ एकड़ जमीन चिन्हांकित की गई है। इसके निर्माण में एक करोड़ 65 लाख रूपए की लागत संभावित है। इसमें से 70 लाख रूपए राज्य शासन द्वारा देने की सहमति दी गई है और इसमें से 35 लाख रूपए का आवंटन भी निगम को प्राप्त हो गया है। इस प्रोजेक्ट के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 25 लाख रूपए का आवंटन निगम को मिला है। शेष राशि की व्यवस्था निगम द्वारा स्वयं के संसाधनों से की जा रही है। निर्माण कार्य प्रगति पर है। इस कृषक गुरूकुल में किसानों को जैविक खाद उत्पादन का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
निगम अध्यक्ष श्री श्याम बैस के अनुसार अपनी स्थापना की इस छोटी सी अवधि में ही निगम ने अपनी उपयोगिता और सार्थकता प्रमाणित कर दी है। निगम द्वारा किसानों को उनके खेतों में उन्नत और प्रमाणित बीज पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके अलावा विभिन्न जिलों में स्थित निगम के स्वयं के 21 प्रक्रिया केन्द्रों के कृषि प्रक्षेत्राें में भी अच्छे किस्म के बीज पैदा किए जा रहे हैं। निगम अध्यक्ष श्री बैस ने आज बताया कि इन सब प्रयासों के बेहतर नतीजे अब देखे जा रहे हैं। इस अवधि में राज्य में खरीफ और रबी फसलों के बीज उत्पादन का कुल रकबा साढ़े छह हजार हेक्टेयर से बढ़कर लगभग चालीस हजार हेक्टेयर तक और उन्नत बीज वितरण का आंकड़ा 66 हजार 860 क्विंटल से बढ़कर पांच लाख 19 हजार 339 क्विंटल तक पहुंच गया है। वर्ष 2005-06 के पहले जहां राज्य में खरीफ के दौरान केवल चार हजार 103 हेक्टेयर में उन्नत और प्रमाणित बीज तैयार करने की क्षमता थी, वहीं वर्ष 2010-11 की स्थिति में यह बढ़कर 32 हजार हेक्टेयर से भी अधिक हो गयी है। इसी तरह वर्ष 2005-06 से पहले रबी फसलों के लिए निगम के गठन के पूर्व छत्तीसगढ़ में केवल एक हजार 419 हेक्टेयर में बीज उत्पादन कार्यक्रम लिया जाता था, जबकि निगम के गठन के बाद इसमें तेजी और अब वर्ष 2010-11 की स्थिति में निगम की योजनाओं के तहत सात हजार 759 हेक्टेयर में रबी फसलों के बीजों की पैदावार ली जा रही है। प्रमाणित और उन्नत बीज तैयार करने के लिए रकबा बढ़ने पर किसानों को देने के लिए निगम के पास अब इन बीजों की उपलब्धता भी बढ़ती जा रही है। वर्ष 2005 में पहले छत्तीसगढ़ में कृषि विभाग की ओर से खरीफ के दौरान किसानों को 54 हजार 890 क्विंटल प्रमाणित बीज दिए गए थे, जबकि निगम की स्थापना के बाद वर्ष 2006 में प्रमाणित बीजों का वितरण बढ़कर 71 हजार 852 क्विंटल तक पहुंच गया। वहीं इसके अगले साल 2007 में निगम द्वारा किसानों को एक लाख 02 हजार 198 क्विंटल, वर्ष 2008 में दो लाख 04 हजार 652 क्विंटल, वर्ष 2009 में तीन लाख 10 हजार 065 क्विंटल और वर्ष 2010 में चार लाख 28 हजार 887 क्विंटल उन्नत और प्रमाणित बीज किसानों को दिलाए गए। रबी फसलों के लिए भी निगम द्वारा उन्नत बीज बांटवाए जा रहे हैं। इसमें भी काफी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। निगम के गठन से पहले वर्ष 2004-05 में राज्य के किसानों को कृषि विभाग के माध्यम से जहां 11 हजार 970 क्विंटल बीज रबी कार्यक्रम के तहत दिए गए थे, वहीं निगम की स्थापना के बाद वर्ष 2005-06 में 12 हजार 090 क्विंटल, वर्ष 2006-07 में 09 हजार 376 क्विंटल बीजों का वितरण हुआ, जबकि वर्ष 2007-08 में वितरण का आंकड़ा बढ़कर 30 हजार 955 क्विंटल तक पहुंच गया। इसके अगले ही वर्ष 2008-09 में रबी कार्यक्रम के तहत निगम की ओर से किसानों को 54 हजार 080 क्विंटल, वर्ष 2009-10 में 69 हजार 467 क्विंटल और वर्ष 2010-11 में 80 हजार 452 क्विंटल बीज किसानों को दिए गए।
श्री बैस ने बताया कि निगम द्वारा प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए रायपुर जिले के अभनपुर में जैविक खाद संयंत्र की स्थापना की जा रही है, जिसका निर्माण पूर्णता की ओर है। इस संयंत्र की वार्षिक उत्पादन क्षमता 150 मीटरिक टन होगी। इसमें दलहनी और तिलहनी फसलों के लिए राइजोबियम, गेहूँ, मक्का और कुछ अन्य फसलाें के लिए एजोटोबेक्टर और सभी प्रकार की फसलों के लिए पी.एस.बी. जैविक खाद तैयार किया जाएगा। इसके अलावा रायपुर जिले के ही ग्राम पोखरा स्थित निगम के कृषि प्रक्षेत्र में किसानों को उन्नत बीजों के उत्पादन और उन्नत खेती का प्रशिक्षण देने के लिए भक्त माता राजिम कृषक गुरूकुल की स्थापना भी की जा रही है। इसके लिए प्रक्षेत्र में एक सौ एकड़ जमीन चिन्हांकित की गई है। इसके निर्माण में एक करोड़ 65 लाख रूपए की लागत संभावित है। इसमें से 70 लाख रूपए राज्य शासन द्वारा देने की सहमति दी गई है और इसमें से 35 लाख रूपए का आवंटन भी निगम को प्राप्त हो गया है। इस प्रोजेक्ट के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 25 लाख रूपए का आवंटन निगम को मिला है। शेष राशि की व्यवस्था निगम द्वारा स्वयं के संसाधनों से की जा रही है। निर्माण कार्य प्रगति पर है। इस कृषक गुरूकुल में किसानों को जैविक खाद उत्पादन का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
क्रमांक-6417/स्वराज्य

