मछुआरों के लिए आवास योजना : 139 आवास निर्मित
वर्ष 2011-12 के बजट में 200 आवासों के लिए 1.20 करोड़ रूपए का प्रावधान
छत्तीसगढ़ के मछुआरों को जलाशयों के नजदीक ही मकान सहित सभी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने राज्य में मछुआरा आवास योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस योजना के प्रथम चरण में प्रदेश के पांच जलाशयों के आस-पास 338 मकानों का निर्माण कराया जा रहा है। इनमें से 139 मकानों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। वित्तीय वर्ष 2011-12 के बजट में मछुआरों के लिए 200 मकानों के निर्माण् हेतु एक करोड़ 20 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है।
मछली पालन विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि मछुआरा आवास योजना के तहत प्रदेश में प्रथम चरण अंतर्गत पांच जलाशयों पर मछली पकड़ने और मछली पालन करने वाले मछुआरों को आवास और पेयजल आदि मूलभूत सुविधा मुहैया कराया जा रहा है। इस योजना के तहत प्रथम चरण में 338 आवासों का निर्माण किया जा रहा है। योजना के तहत कोरबा जिले के हसदेव बांगो, महासमुंद जिले के कोडार, धमतरी जिले के गंगरेल तथा बिलासपुर जिले के खुंटाघाट और खुड़िया जलाशयों के समीप मछुआरों के लिए मकानों का निर्माण किया जा रहा है। कोडार जलाशय के समीप 40 मकानों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसी तरह गंगरेल जलाशय के नजदीक 20 मकान तथा बांगो जलाशय के निकट 79 आवास निर्मित हो चुके है। जिनका आबंटन मछली पालन विभाग द्वारा मछुआरों को किया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि इन मकानों के निर्माण के लिए एक करोड़ रूपए की राशि केन्द्र और राज्य शासन द्वारा पचास-पचास प्रतिशत के अनुपात पर आंबटित की गयी है। राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2011-12 में मछुआरों के लिए 200 आवासों के निर्माण के लिए एक करोड़ 20 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत प्रत्येक आवास के लिए 40 हजार रूपए की राशि व्यय की जाती थी जिसे वित्तीय वर्ष 2009-10 में बढ़ाकर 50 हजार रूपए प्रति आवास कर दिया गया है। साथ ही प्रत्येक दस मछुआरों के आवास पर पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए तीस हजार रूपए की लागत से एक नलकूप तथा 75 मछुआरों के आवास पर एक लाख 25 हजार रूपए की लागत से एक सामुदायिक भवन का निर्माण भी प्रस्तावित किया गया है।

