धान से है छत्तीसगढ़ की अलग पहचान : श्री चंद्रशेखर साहू
कृषि महाविद्यालय में 'श्री' विधि से धान उत्पादन पर कार्यशाला
रायपुर, 26 मई 2011
कृषि मंत्री श्री चंद्रशेखर साहू ने कहा है कि देश और दुनिया में धान की खेती के लिए छत्तीसगढ़ की अपनी एक अलग गौरवशाली पहचान है। यही वजह है कि राज्य को 'धान के कटोरे' के नाम से भी जाना और पहचाना जाता है। उन्होंने कहा कि खेती के क्षेत्र में राज्य की इस विशेष पहचान को कायम रखने के लिए छत्तीसगढ़ में धान की पैदावार को और अधिक बढ़ाने की जरूरत है। कृषि मंत्री श्री साहू आज यहां शासकीय कृषि महाविद्यालय के सभागार में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य में 'श्री' विधि द्वारा धान उत्पादन से संबंधित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में राज्य सरकार छत्तीसगढ़ में किसानों की खुशहाली के लिए धान की खेती को बढ़ावा देने के लिए गंभीरता से हर संभव उपाय कर रही है। इस दिशा में कृषि अनुसंधान कार्यों को भी भरपूर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। श्री साहू ने कहा कि धान की उन्नत पध्दतियों का प्रचार प्रसार भी किया जा रहा है। पौधों में निश्चित अंतराल रखकर रोपा पध्दति को लोकप्रिय बनाने में लगी है।
कार्यशाला में प्रतिभागी कृषि वैज्ञानिकों और किसानों को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री श्री चंद्रशेखर साहू ने आगे कहा कि धान उत्पादन में कृषि मजदूरों तथा सिंचाई की समस्या को देखते हुए उसके निराकरण के लिए विकल्प को अपनाने गहन विचार-विमर्श होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि धान की खेती और गरीबी के साथ-साथ चलने के मिथक को तोड़ना होगा। छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को उन्नत कृषि संसाधन मुहैया कराने के लिए मात्र तीन प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर ऋण उपलब्ध करा रही है। इस कार्यशाला के सार्थक परिणाम के लिए 'श्री' पध्दति से धान उत्पादन के विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श कर इसे और बेहतर ढंग से समझाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस पध्दति में प्रति हेक्टेयर कम बीज लगता है। धान की फसलों पर जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदा, कीट प्रकोप आदि का अपेक्षाकृत कम असर होता है। जिससे फसल का उत्पादन अधिक होता है। उन्होंने पंजाब, हरियाणा सहित उन्नत तकनीक अपनाकर अधिक उत्पादन लेने वाले राज्यों का अनुसारण करने पर बल दिया।
जेवियर इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट भुवनेश्वर (ओड़िसा) के कृषि वैज्ञानिक डॉ. शंभूप्रसाद ने ओड़िसा राज्य में 'श्री' पध्दति के विस्तार के लिए संचालित गतिविधियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि धान रोपण्ा की इस पध्दति को राष्ट्रीय स्तर पर अनेक पुरस्कार मिल चुके हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य में इस पध्दति को किसानों तक पहुचाने की समझाईश दी। पूर्व में वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिकों ने 'श्री' पध्दति को उपयोगी बताते हुए इसके अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करने को कहा। भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के उच्चाधिकारी श्री ओंकार सिंह, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. एम.पी. पाण्डेय, निदेशक कृषि विस्तार सेवाएं डॉ. उरकुरकर, संचालक कृषि श्री प्रतापराव कृदन्त, सहित कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक और विभिन्न जिलों से आए प्रगतिशील कृषक उपस्थित थे।
महिला किसानों में रायगढ़ जिले की श्रीमती जमुना एवं उत्तर बस्तर (कांकेर) जिले की शशिकला ने अपना अनुभव सुनाते हुए बताया कि वे 'श्री' पध्दति अपनाकर पहले की तुलना में लगभग आठ गुना अधिक उपज प्राप्त किये हैं। उन्होंने इस विधि में अपनायी जाने वाले तरीकों के संबंध में अपने व्यवहारिक विचार रखे। इस अवसर पर कृषि मंत्री ने 'श्री' पध्दति सहित उन्नत कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इसके बाद कृषि विश्वविद्यालय के धान प्रक्षेत्र और संकर धान बीज उत्पादन प्रक्षेत्रों को भी कृषि मंत्री ने देखा। इस दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने कृषि विश्वविद्यालय में किए जा रहे अनुसंधान के संबंध में कृषि मंत्री को अवगत कराया। कृषि मंत्री श्री साहू ने कृषि वैज्ञानिकों को विभिन्न फसलों से अधिक पैदावार लेने के लिए उपयोगी शोध करने के सुझाव दिए।

