किसानों को ग्रीष्मकालीन सब्जियों व फसलों की सिंचाई पर विशेष ध्यान देने की सलाह
छत्तीसगढ़ के मैदानी इलाकों में आगामी 3-4 दिन मौसम रहेगा शुष्क
रबी फसलों की कटाई के उपरांत किसान उनका शीघ्र करें भण्डारण
रायपुर, 06 अप्रैल 2011
छत्तीसगढ़ के मैदानी इलाकों में आगामी तीन-चार दिनों के दौरान मौसम के शुष्क रहने की संभावना है। आगामी 24 घण्टे के दौरान रायपुर जिले में तथा 9 अप्रैल को कोरबा जिले में कहीं-कहीं गरज के साथ बौछारें भी पड़ सकती है। इस दौरान अधिकांश जिलों में तापमान में वृद्वि होने तथा रायगढ़, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, रायपुर, महासमुंद और कांकेर जिलों में तापमान में उतार-चढ़ाव का अनुमान है।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के कृषि मौसम वैज्ञानिकों ने प्रदेश में पिछले तीन-चार दिनों से मौसम में हो रहे बदलाव और आगामी तीन-चार दिनों के दौरान तापमान में होने वाले उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसानों को सलाह दी है कि वे ग्रीष्मकालीन सब्जियों के साथ ही धान, मूंग, मूंगफली और सूर्यमुखी की फसलों में सिंचाई का विशेष ध्यान दे और आवष्यकतानुसार सिंचाई करें। वर्तमान मौसम को देखते हुए उन्होंने किसानों से रबी फसलों की कटाई के पष्चात उन्हें अधिक समय तक खेतों में न रखने तथा जल्द से जल्द मिंजाई कर और अच्छी तरह सुखाकर उनका सुरक्षित भण्डारण करने का कहा है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से इस दौरान ग्रीष्मकालीन मक्का, मूंग तथा तिल की बुआई करने की सलाह दी है। उन्होंने पेड़ी गन्ना के उत्पादन के लिए किसानों को गन्ने की कटाई के बाद खेतों से खरपतवार और सूखे पत्तों को साफ कर निंदाई-गुड़ाई करने तथा निर्धारित मात्रा में उर्वरक डाल कर सिंचाई करने को कहा है।
कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि वर्तमान में धान फसल में कहीं-कहीं तना छेदक कीट का प्रकोप देखा जा रहा है। उन्होंने किसानों को इसकी सतत निगरानी करने तथा प्रकोप अधिक होने की स्थिति में काटर्ेप अथवा फिप्रोनिल 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव की सलाह दी है। छिड़काव के दौरान खेतों में 5 सेमी तक पानी भरा होने तथा छिड़काव के बाद 24 घण्टे तक पानी खेत से बाहर नही जाने देने की सलाह दी है। कृषि वैज्ञानिकों ने पिछले 24 घंटे के दौरान जिन क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा हुयी है वहॉ किसानों को खेतों की गहरी जुताई करने की सलाह भी दी है।

