चावल उत्पादन का राष्ट्रीय पुरस्कार वास्तविक आंकड़ों पर आधारित : श्री चन्द्रशेखर साहू
मेगा फुड पार्क के लिए राज्य ने केन्द्र को भेजा प्रस्ताव
छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू ने कहा है कि राज्य को सर्वाधिक चावल उत्पादन के लिए केन्द्र सरकार द्वारा पिछले महीने दिया गया 'कृषि कर्मण' राष्ट्रीय पुरस्कार शत-प्रतिशत वास्तविक आंकड़ों और तथ्यों पर आधारित है। इस पुरस्कार के लिए छत्तीसगढ़ का चयन विधि सम्मत प्रक्रिया के अनुसार किया गया है। श्री साहू ने आज यहां कहा कि केन्द्रीय कृषि और खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री श्री चरणदास महंत का यह कहना सही नहीं है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने गलत आकड़े देकर यह पुरस्कार प्राप्त किया है। श्री साहू ने इस संबंध में श्री महंत की तमाम शंकाओं को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि पिछले महीने की 16 तारीख को नई दिल्ली में जब प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान कर रहे थे, तब पुरस्कार वितरण समारोह में केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री महंत खुद भी मौजूद थे। उस वक्त उन्होंने छत्तीसगढ़ को मिले इस पुरस्कार पर कोई सवाल नहीं उठाया था।
श्री साहू ने कहा कि श्री महंत का यह बयान भी सही नहीं है कि छत्तीसगढ़ में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग स्थापित करने के लिए राज्य सरकार ने केन्द्र को अब तक कोई प्रस्ताव नहीं भेजा है, जबकि वास्तविकता यह है कि छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम द्वारा मेगा फुड पार्क स्थापना का प्रस्ताव इस वर्ष 21 मार्च को केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय को भेजा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की बेहतरी और खेती के विकास के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में कृषि आधारित उद्योगों की स्थापना के लिए भी हर संभव प्रयास और पहल कर रही है।
प्रदेश को मिले कृषि कर्मण पुरस्कार पर श्री महंत द्वारा व्यक्त की जा रही शंकाओं का उल्लेख करते हुए श्री चन्द्रशेखर साहू ने कहा कि श्री चरणदास महंत स्वयं कृषक पृष्ठ भूमि के हैं और कृषि प्रधान छत्तीसगढ़ के ही निवासी है और इस नाते उन्हें यह भी मालूम होना चाहिए कि प्रारंभ से ही छत्तीसगढ़ की गिनती देश के सर्वाधिक धान उत्पादक राज्यों में होती आयी है। इतना ही नहीं बल्कि सैकड़ों वर्षों से छत्तीसगढ़ की पहचान 'धान के कटोरे' के रूप में देश-विदेश में बनी हुई है। इस नाते सर्वाधिक चावल उत्पादन के लिए राज्य को अगर केन्द्र सरकार द्वारा पुरस्कृत किया गया है, तो केन्द्रीय मंत्री मंडल में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर रहे श्री चरण्ादास महंत को किसी भी प्रकार की शंका व्यक्त करने के बजाय प्रसन्न और गौरवान्वित होना चाहिए।
श्री चन्द्रशेखर साहू ने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा कृषि कर्मण पुरस्कार के लिए अपनाई गयी चयन प्रक्रिया और चयन के आधार का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2010-11 के लिए भारत सरकार ने कुल सात पुरस्कार घोषित किए थे। इसमें खाद्यान्न उत्पादन के लिए विभिन्न श्रेणियों में तीन पुरस्कार और धान, गेहूं, दलहन और मोटे अनाज के लिए एक-एक पुरस्कार निर्धारित किए गए थे। निर्धारित मापदण्ड के आधार पर विभिन्न राज्यों का मूल्यांकन करने के बाद सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले राज्याें को पुरस्कृत किया गया। पुरस्कार के लिए चयन प्रक्रिया के तहत केन्द्र सरकार द्वारा देश के सभी राज्यों को तीन समूहों में विभक्त किया गया था। प्रथम समूह में अधिकतम 100 लाख टन से ज्यादा उत्पादन वाले राज्य, दूसरे समूह में दस लाख टन से 100 लाख टन अधिकतम उत्पादन वाले राज्य और तीसरे समूह में दस लाख टन से कम उत्पादन वाले राज्यों को शामिल किया गया था। इसी आधार पर धान, गेहूं, दलहन और मोटे अनाज के उत्पादक राज्यों को भी विभक्त किया गया था। पुरस्कार योजना में एक राज्य को केवल एक श्रेणी में ही पुरस्कृत करने का प्रावधान किया गया था। पुरस्कार के लिए राज्य का चयन करने के लिए उस राज्य के पूर्व वर्षों में जिस वर्ष अधिकतम उत्पादन प्राप्त हुआ है, उससे वर्ष 2010-11 के उत्पादन की तुलना कर पैदावार में हुई वृध्दि के आधार पर अंक दिए गए। इसके लिए विभिन्न योजनाओं में भारत सरकार द्वारा आवंटित राशि के उपयोग और राज्य शासन द्वारा उस फसल विशेष के उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों पर भी अंक निर्धारित कर चयन के लिए केन्द्र द्वारा मूल्यांकन किया गया। निर्धारित मापदण्ड के अनुसार समग्र मूल्यांकन में विभिन्न श्रेणियों में अधिकतम अंक प्राप्त करने वाले राज्यों का चयन पुरस्कार के लिए किया गया।
कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू ने आगे बताया कि कृषि कर्मण पुरस्कार के लिए केन्द्र सरकार की चयन प्रक्रिया के अनुसार छत्तीसगढ़ का समावेश द्वितीय समूह के अन्तर्गत किया गया, जिसमें दस लाख मीटरिक टन से 100 लाख मीटरिक टन तक उत्पादन वाले राज्य शामिल थे। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2010-11 में कुल 61 लाख 59 हजार मीटरिक टन चावल का उत्पादन हुआ, जो धान के रूप में लगभग 92 लाख मीटरिक टन है। यह अभी तक का सर्वाधिक उत्पादन है। श्री साहू ने बताया कि छत्तीसगढ़ में वर्ष 2009-10 में अवर्षा की स्थिति के कारण 50 तहसीलों का सूखा ग्रस्त घोषित किया गया था। इन तहसीलों में सूखे की स्थिति के कारण इस दौरान राज्य में चावल का उत्पादन केवल 41 लाख 10 हजार मीटरिक टन रहा, जिसकी तुलना में वर्ष 2010-11 का उत्पादन 50 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2003-04 में छत्तीसगढ़ में 55 लाख 68 हजार मीटरिक टन चावल अर्थात लगभग 84 लाख मीटरिक टन धान का उत्पादन हुआ था। इस प्रकार वर्ष 2003-04 की तुलना में राज्य में वर्ष 2010-11 में धान की पैदावार में 11 प्रतिशत की वृध्दि हुई। वर्ष 2010-11 में छत्तीसगढ़ में 37 लाख 02 हजार हेक्टेयर के रकबे में धान की खेती की गयी। श्री चन्द्रशेखर साहू ने बताया कि छत्तीसगढ़ में धान के क्षेत्र और उत्पादन का आंकलन राजस्व और भू-अभिलेख विभाग द्वारा किया जाता है। उत्पादन के आंकलन के लिए रेण्डम विधि से फसल कटाई प्रयोग आयोजित किए जाते हैं। वर्ष 2010-11 में कुल तीन हजार 941 फसल कटाई प्रयोगों के आधार पर उत्पादन की गणना की गयी है।

