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छत्तीसगढ़ में विकासखण्ड होगा औद्योगिक विकास का मापदण्ड

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When Mar 24, 2011
from 07:05 PM to 07:05 PM
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भू-अर्जन से प्रभावित किसानों की मुआवजा राशि में दस से बारह गुना वृध्दि

राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ व्यापार केन्द्र की होगी स्थापना

    भिलाई में खुलेगा फैशन टेक्नालॉजी संस्थान

वाणिज्य एवं उद्योग विभाग की 103.83 करोड़ रुपए की अनुदान मांगे पारित

    रायपुर, 24 मार्च 2011

    छत्तीसगढ़ के भिलाई में फैशन टैक्नालॉजी संस्थान, जगदलपुर में रेडीमेड गारमेन्ट ट्रेनिंग सेन्टर की स्थापना और अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेले की तर्ज पर राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ व्यापार केन्द्र की स्थापना की जाएगी। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री दयालदास बघेल ने आज यहां विधानसभा में विभागीय अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान यह घोषणा की। विधानसभा द्वारा वित्तीय वर्ष 2011-12 हेतु वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के लिए 103 करोड़ 83 लाख रुपए से अधिक राशि की अनुदान मांगे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री दयालदास बघेल ने विभागीय अनुदान मांगों पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए बताया कि राज्य के औद्योगिक परिदृश्य को नई दिशा देने के उद्देश्य से नई औद्योगिक नीति 2009-14 लागू की गई है। इस नीति में पहली बार औद्योगिक विकास का मापदण्ड जिले के स्थान पर विकासखण्ड को बनाया गया है। जिससे औद्योगिक दृष्टि से विकसित जिलों में यदि कोई विकासखण्ड पिछड़ा हुआ है तो उन्हें पिछड़े हुए जिलों की भांति अनुदान, छूट एवं रियायतें दी जाएगी। श्री बघेल ने सदन को बताया कि वर्ष 2010 में छत्तीसगढ़ राज्य में 2,85,583 करोड़ रुपए की पूंजी निवेश हेतु 256 निवेशकों ने रूचि दिखाई है, जो पूंजी निवेश आकर्षित करने में देश में छत्तीसगढ़ का दूसरे स्थान है। श्री बघेल ने सदस्यों को बताया कि पिछले पांच वर्षो में राज्य में चार हजार 451 लघु उद्योगों की स्थापना हुई है। जिसमें 736 करोड़ रूपए का पूंजी निवेश हुआ और इन उद्योगों की स्थापना से 40 हजार 884 व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त हुआ। इसी प्रकार 94 मध्यम-वृहद उद्योगों की स्थापना हुई, इससे 11 हजार 143 करोड़ रूपए का पूंजी निवेश हुआ। इससे 16 हजार 121 व्यक्तियों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त हुआ है। श्री बघेल ने सदन में कहा कि प्रदेश में औद्योगिक वातावरण बनाने में राज्य सरकार द्वारा हरसंभव कोशिश की जा रही है। राज्य की शांतिप्रिय और मेहनतकश जनता के मन में आकांक्षा लम्बे समय से रही है कि उनका राज्य देश के आर्थिक रूप से विकसित राज्यों की श्रेणी में अपना एक प्रमुख स्थान बनाए। इसी कड़ी में स्थापित होने वाले उद्योगों में 90 प्रतिशत अकुशल, 50 प्रतिशत कुशल एवं प्रबंधन में न्यूनतम 33 प्रतिशत देने की शर्त रखी गई है, जो उद्योग इन शर्तों का पालन नहीं करेंगे उन्हें शासन द्वारा घोषत सुविधाएं नहीं दी जाएगी और नियम एवं शर्तों के तहत उन पर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए बजट में 56 करोड़ 36 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। श्री बघेल ने सदन में बताया कि औद्योगिक विकास के साथ-साथ भू-अर्जन से प्रभावित होने वाले लोगों का भी ध्यान रखा गया है। भू-अर्जन के मुआवजे को 10 से 12 गुना बढ़ाया गया है। पड़त भूमि का मूल्य 50 हजार से बढ़ाकर छह लाख रुपए, असिंचित एक फसली भूमि का मूल्य 75 हजार से आठ लाख, सिंचित भूमि का मूल्य एक लाख रुपए से बढ़ाकर दस लाख रुपए कर दी गई है। उन्होंने बताया कि भू-अर्जन से प्रभावित लोगों को बदले में नई जमीन खरीदने पर उन्हें स्टाम्प शुल्क में छूट दी गई है और भू-अर्जन से प्रभावित परिवारों के कम से कम एक सदस्य को उस क्षेत्र में स्थापित होने वाले उद्योग में स्थायी रोजगार दी जाएगी।
    श्री बघेल ने सदन को बताया कि कबीरधाम, महासमुंद, अम्बिकापुर में लघु औद्योगिक क्षेत्र बनाए जा चुके हैं और दन्तेवाड़ा, राजनांदगांव और जांजगीर-चाम्पा जिले में लघु औद्योगिक क्षेत्र बनाए जा रहे हैं। आने वाले वर्षों में राज्य के सभी जिलों में ऐसे लघु औद्योगिक क्षेत्र बनाए जाएंगे।  इसके लिए बजट में 20 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इस योजना के अंतर्गत दुर्ग जिले के नवागढ़ में एक लघु औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना के लिए भूमि का चयन कर लिया गया है। श्री बघेल ने बताया कि बस्तर जिले के नगरनार में राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एन.एम.डी.सी.) द्वारा स्टील प्लाण्ट की स्थापना, सरगुजा जिले में भारत सरकार के उपक्रम इफको के सहयोग से एक हजार मेगावाट क्षमता की पावर प्लाण्ट की स्थापना की जा रही है।
    श्री बघेल ने सदस्यों को बताया कि वर्तमान में देश के अन्य राज्यों की तुलना में राज्य से बहुत कम निर्यात व्यापार होता है जबकि राज्य से निर्यात होने की अपार संभावनाएं हैं। इसके लिए राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ एस.ई.जेड (सेज) नीति 2010 बनाई है। इसकी आधारशिला राजनांदगांव जिले में रखी जा चुकी है और इसक निर्माण का कार्य भी प्रारंभ हो गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में इसके अलावा जेम्स, ज्वेलरी, आई.टी और बहुउत्पाद के निर्यात के लिए भी सेज के प्रस्ताव किए गए हैं। श्री बघेल ने यह भी बताया कि नया रायपुर क्षेत्र में अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेले की तर्ज पर छत्तीसगढ़ व्यापार केन्द्र की स्थापना की जाएगी, जहां पर राज्य के सभी क्षेत्र के उद्यामियों को अपने उत्पादों का प्रदर्शन एवं बिक्री की सुविधा मिलेगी। इसके लिए वर्ष 2011-12 के बजट में दस लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। इस प्रकार भिलाई में फैशन टेक्नालॉजी इंस्टीटयूट खोलने के लिए एक करोड़ रुपए और जगदलपुर में रेडीमेड गारमेन्ट प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना के लिए भी एक करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। श्री बघेल ने बताया कि औद्योगिक विकास की योजनाओं का लाभ समाज के कमजोर वर्ग के लोगों को प्राप्त हो, इस हेतु महिलाओं, सेवानिवृत्त सैनिकों, नक्सल पीड़ित व्यक्ति और नि:शक्तजनों को  लाभ देने के उद्देश्य से निवेशकों की श्रेणी में इन्हें शामिल किया गया है। इन वर्गों को दस प्रतिशत अधिक अनुदान प्रदान कर औद्योगिक विकास की मुख्य धारा में लाने का प्रयास किया गया है। श्री बघेल ने बताया कि अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के लोगों को औद्योगिक क्षेत्रों में नि:शुल्क भूमि आबंटन, आर्थिक दृष्टि से विकासशील क्षेत्रों में स्थापित होने वाले औद्योगिक क्षेत्रों में 25 प्रतिशत एवं पिछड़े क्षेत्रों में 50 प्रतिशत तक भू-खण्ड इन वर्गों के  उद्यमियों हेतु आरक्षित रखे जाने का प्रावधान रखा गया है। उन्होंने बताया कि इन वर्गों के लोगों को बैंक द्वारा बिना गारण्टी के ऋण प्रदान नहीं किया जाता। इसे देखते हुए आठ सौ करोड़ रुपए की क्रेडिट गारण्टी फण्ड का बजट में प्रावधान किया गया है। इस फण्ड से बैंकों द्वारा मांगी जाने वाली गारण्टी की व्यवस्था विभाग द्वारा की जाएगी। अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग हेतु 25 प्रतिशत मार्जिन मनी अनुदान की योजना लागू की गई है। जिसमें 35 लाख रुपए तक का मार्जिन मनी अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। श्री बघेल ने बताया कि पर्यावरण संतुलन को सुनिश्चित करने हेतु औद्योगिक दृष्टि से उपयुक्त रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़ जिलों में लगभग चार हजार हेक्टेयर भूमि में तीन वृहद औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जाने की योजना को मूर्त रुप दिया जाएगा। राज्य में उद्योग धन्धे भी पनपें, साथ ही पर्यावरण संरक्षित भी हो और प्रदूषण का प्रभाव राज्य की कृषि योग्य भूमि पर नहीं पड़े। इस हेतु भू-अर्जन मुआवजा के लिए दस करोड़ का प्रावधान रखा गया है। श्री बघेल ने बताया कि भारत सरकार की एसाईड योजना के अंतर्गत राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों - भनपुरी, सिरगिट्टी, भिलाई आदि में अधोसंरचना विकास कार्यों का क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम द्वारा किया जा रहा है। श्री बघेल ने बताया कि नए औद्योगिक क्षेत्र के साथ-साथ पुराने औद्योगिक क्षेत्र उरला, भनपुरी, भिलाई, कोरबा, चाम्पा, जगदलपुर, कोण्डागांव और नारायणपुर में अधोसरंचना विकास हेतु 12 करोड़ 15 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। श्री बघेल ने बताया कि राज्य में उद्योगों की महत्ता को पुरस्कृत करने हेतु राज्य सरकार द्वारा एक छत्तीसगढ़ औद्योगिक पुरस्कार योजना लागू की गई है। इस योजना के अंतर्गत प्रतिस्पर्धात्मक बाजार में बेहतर कार्य, निर्यात बढ़ावा और पर्यावरण संरक्षण, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग में उद्यमिता विकास, महिला उद्यमिता तथा औद्योगिक सुरक्षा के क्षेत्रों में श्रेष्ठ कार्य करने वालों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार के रूप में क्रमश: एक लाख, 51 हजार एवं 31 हजार रुपए दिए जाएंगे। इस हेतु बजट में दस लाख रुपए का प्रावधान रखा गया है।

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