कमल विहार : छत्तीसगढ़ की पहली नगर विकास योजना
अनेक विशेषताओं से परिपूर्ण है यह आवासीय परियोजना
रायपुर,13 जून 2011
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगे हुए ग्राम डुण्डा में राज्य शासन और रायपुर विकास प्राधिकरण के संयुक्त उपक्रम के रूप में एक हजार 600 एकड़ में विकसित की जाने वाली 815 करोड़ 38 लाख रूपए की 'कमल विहार' परियोजना अपनी अनेक विशेषताओं के कारण देश की एक प्रमुख शहरी आवासीय परियोजना होगी। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज शाम मानसून पूर्व के खुशनुमा माहौल में भूमि पूजन कर जनता को इस परियोजना की सौगात दी। जन-भागीदारी से राजधानी रायपुर के विकास और विस्तार, मास्टर प्लान के प्रावधानों के अनुरूप इसका विकास होगा। यह छत्तीसगढ़ की पहली नगर विकास योजना होगी। इसमें शहर के सुनियोजित विकास, नगरीय विकास के लिए भूमि के पुनर्गठन की प्रक्रिया भू-स्वामियों की अविकसित भूमि के बदले उन्हें 35 से 58 प्रतिशत विकसित भू-खण्ड उनकी मूल-भूमि पर या उसके आस-पास ही दिया जा रहा है। इस आवासीय परियोजना का 28.23 प्रतिशत इलाका हरित क्षेत्र के रूप में होगा।
परियोजना में भू-स्वामियों द्वारा विकसित भू-खण्ड नहीं लेने पर उन्हें कलेक्टर गाइड-लाईन के आधार पर मुआवजा लेने का भी विकल्प दिया गया है। यह परियोजना ''पहले विकास, फिर बसाहट' के सिध्दांत के अनुरूप होगी। राज्य शासन द्वारा 'कमल विहार' परियोजना मे भूमि के बदले विकसित भू-खण्ड आवंटन पर पंजीयन शुल्क से छूट दी गयी है। भू-स्वामियों को आवंटित होने वाले भू-खण्ड पर कोई भू-भाटक या अन्य कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। विकसित भू-खण्ड पूर्ण रूप से फ्री होल्ड होंगे। भू-स्वामियों को भूमि विक्रय के लिए किसी प्रकार की अनुमति की जरूरत नहीं होगी। ऐसे छोटे भू-स्वामी, जिन्हें 565 से 1042 वर्गफुट आकार के भू-खण्ड आवंटित है, उन्हेंं निर्धारित पात्रता से एक स्लैब ऊपर के भू-खण्ड आवंटन का विकल्प दिया जा रहा है। परियोजना क्षेत्र में विकसित भू-खण्डों का 15 प्रतिशत यानी 79.41 एकड़ आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्गो के लिए सुरक्षित रखा गया है। परियोजना क्षेत्र में ग्राम डुण्डा, बोरिया खुर्द, डुमरतराई, देवपुरी और टिकरापारा के भाग शामिल है। योजना पूर्ण करने की अवधि तीन वर्ष निर्धारित की गयी है।
सम्पूर्ण कमल विहार परियोजना को 15 सेक्टरों में बांटा गया है। इस परियोजना में पांच हजार 095 भू-स्वामी शामिल है। विधि मान्य भू-खण्ड होने से भवन का नक्शा पास होने में कोई परेशानी नहीं होगी। इससे आवास निर्माण के लिए बैंक ऋण भी आसानी से मिल जाएगा। परियोजना क्षेत्र में मास्टर प्लान के अनुरूप 19.81 एकड़ में राजधानी रायपुर का पहला केन्द्रीय व्यावसायिक क्षेत्र विकसित होगा। आमोद-प्रमोद के लिए 256.83 एकड़ निर्धारित किया गया है। परियोजना में सार्वजनिक-अर्धसार्वजनिक, सामाजिक-सांस्कृतिक, प्रशासनिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए लगभग 37 एकड़ भूमि निर्धारित की गई है। इस परियोजना क्षेत्र में सुगम यातायात के लिए यहां रिंगरोड एवं बायपास मार्ग की चौड़ाई 75 मीटर होगी और उसमें मुख्य मार्ग छह लेन का तथा सर्विस रोड दो लेन का होगा, वहीं 45 मीटर के चार लेन, 30 मीटर की चार लेन, 24 मीटर की चार लेन और 18 मीटर की दो लेन वाली सड़कें बनेंगी। परियोजना में सुगम यातायात के लिए जरूरत के अनुसार फ्लाई ओव्हरों का निर्माण किया जाएगा। स्ट्रीट लाईटिंग, सर्विस कारिडोर, भूमिगत नालियों, हरित गलियारों, फुटपाथ और सायकल टे्रक से सुसज्जित होगी यह परियोजना। अधोसंरचना विकास परियोजना के अंतर्गत चौबीसों घण्टे लगातार पेयजल और बिजली आपूर्ति की व्यवस्था रहेगी। प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन 135 लीटर स्वच्छ पेयजल मिले, ऐसी व्यवस्था वहां की जाएगी। विद्युत संचार प्रणाली भूमिगत होगी।
क्रमांक-1218/स्वराज्य

