जन-जीवन से जुड़े सभी विभागों के लिए होंगे कॉल सेन्टर : डॉ. रमन सिंह
मुख्यमंत्री ने किया राज्य के प्रथम बी.पी.ओ कॉल सेन्टर का शुभारंभ
नये रायपुर में अलग से होगा सूचना प्रौद्योगिकी जोन
रायपुर 15 जून 2010

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली और पेयजल आपूर्ति से संबंधित सेवाओं के लिए शुरू किए गए कॉल सेन्टरों की तरह निकट भविष्य में छत्तीसगढ़ में आम जनता से जीवन से जुड़े सभी विभागों में सूचना प्रौद्योगिकी पर आधारित कॉल सेन्टर शुरू किए जाएंगे, ताकि कोई भी नागरिक उन विभागों द्वारा संचालित सेवाओं का समुचित लाभ उठाने के लिए कॉल सेन्टरों में फोन पर पूरी जानकारी प्राप्त कर सकें और इन सेवाओं के बारे में यदि कोई समस्या अथवा शिकायत हो तो उन्हें भी वहां फोन के जरिए ही दर्ज करा सके। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार के निर्माणाधीन नवीन प्रशासनिक मुख्यालय 'नया रायपुर' में आई.टी कम्पनियों के लिए सूचना प्रौद्योगिकी जोन विकसित किया जाएगा। डॉ. सिंह ने कहा कि आज के समय में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में रोजगार की सबसे ज्यादा संभावनाएं है। यह एक ऐसा उद्योग है, जो पर्यावरण हितैषी भी है।
मुख्यमंत्री ने आज सवेरे यहां कटोरा तालाब क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के प्रथम बहुराष्ट्रीय बिजनेस प्रोसेस आउट सोर्सिंग (बी.पी.ओ) कॉल सेन्टर का शुभारंभ करते हुए इस आशय के विचार व्यक्त किए। उल्लेखनीय है कि रायपुर में यह कॉल सेन्टर बहुराष्ट्रीय कम्पनी एच.पी. द्वारा बी.पी.ओ. कॉल सेन्टरों के लिए संचालित एम्फेसिस (MPHASIS) द्वारा शुरू किया गया है। इसमें प्रथम चरण में निजी क्षेत्र की दूरसंचार कम्पनी आईडिया के ग्राहक सेवा केन्द्र से संबंधित सेवाएं दी जा रही हैं। मुख्यमंत्री की विशेष पहल पर स्थापित इस कॉल सेन्टर में प्रथम चरण में 200 सीटों पर छत्तीसगढ़ के 500 युवाओं को रोजगार मिलेगा। शुभारंभ समारोह की अध्यक्षता लोकसभा सांसद श्री रमेश बैस ने की। प्रदेश सरकार के ऊर्जा और सूचना प्रौद्योगिकी सचिव श्री अमन कुमार सिंह भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने शुभारंभ समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने अपनी सूचना प्रौद्योगिकी नीति में यह स्पष्ट कर दिया है कि हम इस प्रौद्योगिकी सेवाओं के जरिए प्रदेश में युवाओं के लिए रोजगार के अधिक से अधिक अवसर विकसित करना चाहते हैं। हमने अपनी नई औद्योगिक नीति में भी इसे प्राथमिकता वाला क्षेत्र घोषित किया है, जिसमे इन उद्योगों को ब्याज, विद्युत शुल्क और स्थायी पूंजी निवेश पर अनुदान जैसी कई सहुलियतें दी गयी हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा हम अपने युवाओं के लिए छत्तीसगढ़ में रोजगार की उन तमाम संभावनाओं को साकार करना चाहते हैं, जो देश और दुनिया में उपलब्ध हैं। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि सरकारी सेवाओं में नौकरी अथवा रोजगार के अवसर सीमित होने के बावजूद राज्य सरकार ने विगत छह वर्ष में डेढ़ लाख से ज्यादा युवाओं को शिक्षाकर्मी, पुलिस और अन्य प्रकार की नौकरियों मे नियोजित किया है। इसके अलावा कौशल विकास कार्यक्रम के जरिए राज्य में अगले बारह वर्ष में अर्थात वर्ष 2022 तक हर साल दस लाख लोगों को सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के सहयोग से विभिन्न व्यवसायों का प्रशिक्षण दिलाने और लगभग एक करोड़ 25 लाख लोगों को स्व-रोजगार से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी एक ऐसा क्षेत्र है, जहां बड़े उद्योगों की तुलना में न्यूनतम पूंजी निवेश के जरिए अधिक से अधिक लोगों को रोजगार दिया जा सकता है। डॉ. सिंह ने उदाहरण देते हुए कहा कि एक हजार मेगावाट के किसी बिजली संयंत्र के निर्माण में लगभग एक हजार करोड़ रूपए का निवेश होता है और एक हजार एकड़ जमीन लगती है और छह सौ से सात सौ लोगों को रोजगार मिलता है, जबकि आज यहां स्थापित बी.पी.ओ कॉल सेन्टर में सिर्फ पांच करोड़ रूपए खर्च कर एक छोटे भवन में पांच सौ लोगों को रोजगार देने की व्यवस्था की गयी है। डॉ. सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ में विकास की गति बहुत बेहतर है। हमारी विकास दर कृषि क्षेत्र में 4.9 प्रतिशत, औद्योगिक क्षेत्र में 15.09 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र में 13.48 प्रतिशत तक पहुंच गयी है। राज्य का सकल घरेलू उत्पाद 11.49 तक पहुंच गया है। ये सभी सूचकांक राज्य के विकास की दिशा और गति को दर्शाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बिजली, सीमेंट और स्टील के क्षेत्र में उद्योगों का पर्याप्त विकास हो गया है, लेकिन सूचना प्रौद्योगिकी एक ऐसा क्षेत्र है, जहां अधिकतम लोगों को रोजगार देने की क्षमता और संभावनाएं है। इसमें स्थानीय अर्ध्दकुशल युवाओं को भी बेहतर रोजगार दिया जा सकता है। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित उद्योगों के लिए छत्तीसगढ़ में बिजली की निरंतर आपूर्ति एक बड़ी उपलब्धि है। राज्य में पावर कट या लोड शेडिंग नहीं हो रही है। इसलिए सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित उद्योग बगैर किसी व्यवधान के सप्ताह के सातों दिन और चौबीसों घंटे काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के इंजीनियरिंग कॉलेजों से हर साल लगभग 15 हजार युवा इंजीनियर निकल रहे हैं, इनमें से 50 प्रतिशत इंजीनियर सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए होते हैं। इनके अलावा दूसरी तरह के स्नातक और स्नातकोत्तर युवा भी है। ये सभी छत्तीसगढ़ के सबसे बेहतर मानव संसाधन है। बी.पी.ओ. कॉल सेन्टरों के लिए भी इनकी सेवाएं ली जा सकती हैं। मुख्यमंत्री ने राज्य में हाल ही में विकसित स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (स्वान) परियोजना का उल्लेख किया और कहा कि यह एशिया का सबसे बड़ी वॉय-मेक्स आधारित सूचना प्रणाली है। इसके जरिए प्रदेश के सभी विकासखंडों के साथ राज्य सरकार की कनेक्टिविटी बेहतर हुई है। इतना ही नहीं बल्कि राज्य में दूरसंचार की कनेक्टिविटी भी काफी बेहतर हो गयी है। लोकसभा सांसद श्री रमेश बैस ने अपने उद्बोधन में कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय और सराहनीय कार्य किया है। छत्तीसगढ़ के बच्चों में काफी प्रतिभा है और वे सूचना प्रौद्योगिकी सहित इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भी देश-विदेश में अपनी पहचान बना रहे हैं। श्री बैस ने भी इस बी.पी.ओ. कॉल सेन्टर की स्थापना पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए अपनी शुभकामनाएं दी। प्रारंभ में एम्फेसिस बी.पी.ओ के अध्यक्ष श्री राज पाटिल ने स्वागत भाषण दिया।

