मुख्यमंत्री ने की सहकारी शक्कर कारखानों की समीक्षा
रायपुर, 07 अप्रैल 2011

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज शाम यहां अपने आवासीय कार्यालय में राज्य के सहकारी क्षेत्र के तीनों शक्कर कारखानों की समीक्षा की। उन्होंने इस मौके पर सरगुजा जिले के ग्राम केरता में संचालित मां महामाया सहकारी शक्कर कारखाने के लिए गन्ने की खेती को बढ़ावा देने के वास्ते निकटवर्ती महान-नदी में एनीकट निर्माण का कार्य जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस इलाके में कोयले के प्राकृतिक भण्डारण को देखते हुए कम से कम एक सौ मेगावाट का एक विद्युत संयंत्र भी लगाया जाना चाहिए। बैठक में तीनों शक्कर कारखानों के कार्य क्षेत्र के विकासखण्डों में गन्ना उत्पादन और आगामी पेराई सीजन में उसकी खरीदी के लिए प्रस्तावित कार्य योजना पर भी विस्तृत चर्चा की गयी।
मुख्यमंत्री ने कबीरधाम (कवर्धा) जिले के भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना और दुर्ग जिले के ग्राम करकाभाठ (विकासखण्ड बालोद) में संचालित दंतेश्वरी मैय्या सहकारी शक्कर कारखाने की भी समीक्षा की। सहकारिता मंत्री श्री ननकीराम कंवर, कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू, संसदीय सचिव श्री विजय बघेल, भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने के अध्यक्ष श्री रघुराज सिंह, सचिव सहकारिता श्री दिनेश श्रीवास्तव, सचिव ऊर्जा श्री अमन कुमार सिंह और छत्तीसगढ़ विद्युत वितरण कम्पनी के प्रबंध संचालक श्री सुबोध कुमार सिंह सहित सभी संबंधित वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।
समीक्षा में मुख्यमंत्री को अधिकारियों ने बताया कि भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने के कार्य क्षेत्र में चार जिलों - कबीरधाम, राजनांदगांव, दुर्ग और बिलासपुर के कुल 13 विकासखण्ड शामिल हैं। कारखाने में व्यक्तिगत रूप से 16 हजार 149 किसान सदस्य हैं, जिनकी अंश पूंजी तीन करोड़ 39 लाख रूपए है। संस्थागत सदस्य 40 हैं, जिनकी अंश पूंजी दस करोड़ रूपए है राज्य शासन भी 14 करोड़ 70 लाख रूपए की अंश पूंजी के साथ इसमें एक सदस्य है। पेराई वर्ष 2010-11 में मुख्य रूप से कबीरधाम जिले के चार विकासखण्डों - कवर्धा, सहसपुर-लोहारा, बोड़ला और पण्डरिया में छह हजार 021 हेक्टेयर में किसान गन्ने की खेती कर रहे हैं।
चालू वर्ष 2011-12 में कबीरधाम जिले में लगभग आठ हजार 770 हेक्टेयर में पांच लाख 26 हजार 190 मीटरिक टन गन्ने की पैदावार मिलने की संभावना है। इसमें करीब दो लाख मीटरिक टन गन्ने का उत्पादन अतिरिक्त रूप से संभावित है। इसे ध्यान में रखकर कारखाने की गन्ना पेराई की वर्तमान ढाई हजार मीटरिक टन दैनिक क्षमता को बढ़ाकर साढ़े तीन हजार मीटरिक टन करने की संभावनाओं पर भी बैठक में विचार किया गया ताकि पेराई सीजन में अधिक से अधिक गन्ना किसानों से खरीदकर कारखाने में उसकी खपत की जा सके। लगभग दो लाख मीटरिक टन अतिरिक्त गन्ने की पैदावार की संभावना को देखते हुए इसमें से एक लाख मीटरिक टन गन्ना 56 गुड़ उत्पादकों को और शेष करीब एक लाख टन गन्ना करकाभाठ (बालोद) के सहकारी शक्कर कारखाने को देने के प्रस्ताव के बारे में भी बैठक में चर्चा की गयी। भोरमदेव शक्कर कारखाने में पेराई सीजन 2011-12 (एक अक्टूबर 2011 से 30 सितम्बर 2012 तक) अनुमानित चार लाख मीटरिक टन गन्ना खरीदने के लिए शासन से कार्यशील पूंजी और बैंक ऋण प्राप्त करने के बारे में भी बैठक में विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने बताया कि भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने में गन्ने के छिलके पर आधारित छह मेगावाट के बिजली संयंत्र का संचालन छत्तीसगढ़ विद्युत कम्पनी द्वारा किया जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि कारखाना प्रबंधन की मंशा है कि अब इसे वे स्वयं संचालित करें। मुख्यमंत्री ने इस बारे में कारखाना प्रबंधन को छत्तीसगढ़ विद्युत उत्पादन कम्पनी के अधिकारियों के साथ बैठकर सभी तकनीकी पहलुओं के बारे में विचार-विमर्श करने के निर्देश दिए। दंतेश्वरी मैय्या सहकारी शक्कर कारखाना करकाभाठ बालोद की समीक्षा में बताया गया कि इसमें 15 हजार 534 किसान करीब तीन करोड़ 42 लाख रूपए की अंश पूंजी के साथ सदस्य के रूप में शामिल हैं। संस्थागत 116 सदस्यों की अंश पूंजी 31 लाख 21 हजार रूपए है। राज्य शासन भी 21 करोड़ 82 लाख रूपए की अंश पूंजी के साथ इसमें सदस्य हैं। कारखाने में वर्ष 2010-11 में दस हजार 370 मीटरिक टन गन्ने की पेराई कर 562 मीटरिक टन शक्कर का उत्पादन लिया गया। यह भी बताया गया कि करकाभाठ (बालोद) के इस कारखाने के लिए गन्ने का रकबा बढ़ाने की पांच वर्षो की कार्य योजना तैयार की गयी है। इसके अन्तर्गत चालू वर्ष 2011-12 में दो हजार हेक्टेयर, वर्ष 2012-13 में तीन हजार हेक्टेयर और वर्ष 2013-14 में चार हेक्टेयर का अनुमानित लक्ष्य है। सरगुजा जिले के ग्राम केरता स्थित मां महामाया सहकारी शक्कर कारखाने की समीक्षा में बताया गया कि वर्ष 2010-11 में वहां 19 हजार 443 मीटरिक टन गन्ने की पेराई हुई और एक हजार 526 मीटरिक टन शक्कर का उत्पादन लिया गया। उन्होंने जिले के प्रतापपुर और बतौली में विद्युत उपकेन्द्रों के निर्माण से संबंधित प्रस्तावों के बारे में भी अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

