बस्तर-सरगुजा प्राधिकरणों में राज्य के अन्य जिले भी शामिल
रायपुर 27 जून 2010
जनभावनाओं के अनुरूप छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों के समग्र और तेज विकास के लिए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में गठित सरगुजा और उत्तर क्षेत्र तथा बस्तर एवं दक्षिण क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरणों में बस्तर और सरगुजा संभागों के जिलों के अलावा राज्य के अन्य जिलों के आदिवासी बहुल विकासखण्डों और गांवों को भी शामिल किया गया है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 20 मई 2004 को इन दोनों प्राधिकरणों का गठन किया गया था। प्रारंभ में इनका नाम सरगुजा विकास प्राधिकरण और बस्तर विकास प्राधिकरण रखा गया, लेकिन इनके महत्व को ध्यान में रखकर जनप्रतिनिधियों के आग्रह पर दोनों प्राधिकरणों के कार्य क्षेत्र का विस्तार करते हुए इनमें राज्य के अन्य जिलों के आदिवासी बहुल इलाकों को भी जोड़ कर इनका नाम क्रमश: सरगुजा एवं उत्तर क्षेत्र तथा बस्तर एवं दक्षिण क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण्ा रखा गया। सरगुजा प्राधिकरण में राजस्व संभाग सरगुजा के तीनों जिलों क्रमश: जशपुर, सरगुजा और कोरिया के अलावा सम्पूर्ण कोरबा जिला तथा रायगढ़ जिले के विकासखंड धरमजयगढ़, पत्थलगांव, घरघोड़ा, तमनार, लैलूंगा और खरसिया को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा बिलासपुर जिले के मरवाही, गौरेला-एक, पेण्ड्ररोड (सम्पूर्ण), तखतपुर, लोरमी और कोटा (अंशत:) और कबीरधाम जिले के विकासखण्ड पण्डरिया को भी इसमें शामिल किया गया है। बस्तर विकास प्राधिकरण के कार्य क्षेत्र का विस्तार करते हुए इसमें बस्तर राजस्व संभाग के सभी पांच जिलों - बस्तर (जगदलपुर), उत्तर बस्तर (कांकेर), दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा), बीजापुर और नारायणपुर के साथ-साथ रायपुर जिले के विकासखण्ड गरियाबंद, छुरा, मैनपुर, जिला धमतरी के सिहावा और मगरलोड विकासखण्ड के 49 गांव, दुर्ग जिले के सम्पूर्ण डौण्डी विकासखण्ड और विकासखण्ड गुरूर तथा डौण्डी लोहारा के कुछ हिस्से भी शामिल किए गए हैं। बस्तर प्राधिकरण्ा में राजनांदगांव जिले के विकासखण्ड चौकी, मानपुर, मोहला (सम्पूर्ण), छुरिया, डोंगरगांव और डोंगरगढ़ तथा छुईखदान विकासखण्ड के कुछ इलाकों भी जोड़ा गया है, वहीं विकासखण्ड खैरागढ़ के एक गांव सहित कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखण्ड के 247 गांवों को भी बस्तर एवं दक्षिण क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण में शामिल किया गया है।

