मुख्यमंत्री को बस्तर के ऐतिहासिक गोंचा पर्व का न्यौता
रायपुर, 29 जून 2011

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर में विगत लगभग छह सौ वर्षों से मनाये जा रहे ऐतिहासिक गोंचा पर्व में शामिल होने का आमंत्रण दिया गया है। डॉ. सिंह से आज दोपहर यहां मंत्रालय में आदिम जाति और अनुसूचित जाति विकास मंत्री श्री केदार कश्यप के नेतृत्व में बस्तर वासी 360 घर अरण्यक ब्राम्हण समाज के प्रतिनिधि मंडल ने सौजन्य मुलाकात कर उन्हें जगदलपुर में जुलाई माह की 03 से 11 तारीख तक आयोजित किए जा रहे इस महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक त्यौहार में शामिल होने का न्यौता दिया। मुख्यमंत्री ने आमंत्रण के लिए प्रतिनिधि मंडल को धन्यवाद देते हुए आयोजन की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं दी।
प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि ईस्वीं सन् 1408 से भगवान श्री जगन्नाथ महाप्रभु की रथ यात्रा के उपलक्ष्य में प्रारंभ यह लोक पर्व बस्तर के 84 गांवों में रहने वाले आरण्यक ब्राम्हण समाज के लोगों द्वारा पिछले छह सौ वर्षों से लगातार आयोजित किया जा रहा है। इस पर्व में बस्तर का आदिवासी समाज भी पूरे उत्साह के साथ शामिल होता है। पर्व के दौरान निकाली जाने वाली रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ को हजारों लोगों द्वारा तुपकी से गार्ड ऑफ आनर दिया जाता है। तुपकी बांस की खपच्चियों से तैयार की जाती है और रंग-बिरंगी पत्तियों से सुंदर ढंग से सजायी जाती है। इस में मालकांगनी वनौषधि के फलों का उपयोग किया जाता है, जिसे स्थानीय बोली में पेंगु कहा जाता है। तोप के आकार से मिलते-जुलते पिचकारी जैसे तुपकी यंत्र में जब मालकांगिनी के फल रख कर दबाया जाता है तो पटाखे जैसी आवाज होती है और फल 15 से 20 फीट दूर जाकर गिरता है। प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री को तुपकी भेट की। डॉ. सिंह ने तुपकी चलाकर इसका अभ्यास किया।
प्रतिनिधि मंडल में 360 घर आरण्यक ब्राम्हण समाज बस्तर के अध्यक्ष श्री अर्जुन प्रसाद पांडेय, सचिव महेन्द्र नाथ जोशी, सह-सचिव श्री दिलीप पाणिग्राही तथा बस्तर गोंचा महापर्व के अध्यक्ष श्री रजनीश पाणिग्राही, सचिव श्री सुदर्शन पाणिग्राही, कोषाध्यक्ष श्री राकेश पाण्डेय, और युवा समिति के अध्यक्ष श्री जयप्रकाश पाढ़ी सहित सर्वश्री विवेक पाण्डेय एवं दिनेश पाणिग्राही उपस्थित थे।

