धोबी जाति को अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग
मुख्यमंत्री ने ज्ञापन पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया
रायपुर, एक जुलाई 2010
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने धोबी जाति को अनुसूचित जाति में शामिल करने के लिए छत्तीसगढ़ प्रदेश रजक धोबी समाज द्वारा सौंपे गए ज्ञापन पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री को आज यहां उनके निवास पर साप्ताहिक कार्यक्रम 'जनदर्शन' में समाज के प्रदेश अध्यक्ष श्री सूरज निर्मलकर के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल ने इस संबंध में ज्ञापन दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि उड़ीसा, झारखंड और बिहार सहित अन्य कई राज्यों में भी धोबी जाति को अनुसूचित जाति की श्रेणी में रखा गया है, जबकि तत्कालीन अविभाजित मध्यप्रदेश के समय से यहां इसे पिछड़े वर्ग में शामिल किया गया है। मध्यप्रदेश राज्य गठन से पहले भी सी.पी. एण्ड बरार प्रांत में धोबी जाति को अनुसूचित जाति की श्रेणी में मान्यता मिली हुई थी। प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि प्राचीन समय में धोबी को रजक के अलावा बरेठ और बरेठा भी कहा जाता था। वर्तमान में इस पैतृक व्यवसाय में लगे परिवारों को बिहार, कर्नाटक, आन्ध्रप्रदेश और तमिलनाडु में रियायती दर पर कोयला और बिजली भी वहां की सरकारों की ओर से दी जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से छत्तीसगढ़ में भी यह प्रावधान करने का अनुरोध किया। डॉ. रमन सिंह ने प्रतिनिधि मंडल को विश्वास दिलाया कि उनके ज्ञापन पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। डॉ. सिंह ने अधिकारियों को प्रतिनिधि मंडल का ज्ञापन सामान्य प्रशासन विभाग, आदिम जाति और अनुसूचित जाति विकास विभाग तथा राज्य अनुसूचित जाति आयोग को आवश्यक परीक्षण के लिए भेजने के निर्देश दिए। प्रतिनिधि मंडल में समाज के प्रदेश संगठन मंत्री श्री चन्द्रहास निर्मलकर और जिला शाखा के अध्यक्ष श्री जनाराम निर्मलकर सहित सर्वश्री टी.आर.शांडिल्य, तिलकराम रजक, श्यामलाल रजक, दिलीप छाटा, मेहतरू निर्मलकर और बिरजू निर्मलकर भी शामिल थे।

