स्वर्गीय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी थे राष्ट्रीय एकता के प्रतीक : श्री आडवाणी
याद रहेगा कश्मीर के लिए डॉ. मुखर्जी का बलिदान : डॉ. रमन सिंह
रायपुर 11 जुलाई 2011

पूर्व उप प्रधानमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कोलकाता विश्वविद्यालय के सभागृह में कल आयोजित समारोह में स्वर्गीय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन पर केन्द्रित पुस्तक का विमोचन किया। श्री आडवाणी और डॉ. रमन सिंह सहित अनेक वरिष्ठ नेताओं ने कोलकाता में स्वर्गीय डॉ. मुखर्जी के पैतृक निवास पर उन्हें विनम्र श्रध्दांजलि अर्पित की। कोलकाता विश्वविद्यालय सभागार में आयोजित पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में श्री लालकृष्ण आडवाणी ने डॉ. मुखर्जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया। श्री आडवाणी ने कश्मीर से भारतीय संविधान की धारा 370 को समाप्त करने की जरूरत पर बल दिया और कहा कि एक देश में दो निशान का होना राष्ट्रीय एकता के लिए घातक है।
श्री आडवाणी ने कहा कि स्वर्गीय डॉ. मुखर्जी एक महान समाज सेवी, चिन्तक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और कश्मीर एकीकरण अभियान के महान प्रवर्तक थे। स्वर्गीय डॉ. मुखर्जी ने कश्मीर में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराकर देश और दुनिया को यह संदेश भी दिया कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा। स्वर्गीय डॉ. मुखर्जी को अपने इस देश भक्तिपूर्ण कदम के लिए राष्ट्र विरोधी तत्वों की हिंसा का भी शिकार होना पड़ा। श्री आडवाणी ने देश में हिंसा और आंतकवाद की बढ़ती समस्या पर चिन्ता व्यक्त की और कहा कि इस चुनौती का मुकाबला करने के लिए डॉ. मुखर्जी के सिध्दांतों के अनुरूप हमें राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत बनाना होगा। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने इस अवसर पर अपने उदबोधन में स्वर्गीय डॉ. मुखर्जी को राष्ट्रीय एकता का महान योध्दा बताया। उन्होंने कहा कि कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने के लिए स्वर्गीय डॉ. मुखर्जी के अमर बलिदान को हमेशा याद रखा जाएगा। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय डॉ. मुखर्जी के आदर्शो पर चलकर ही हम सब मिलकर एक शक्तिशाली और संगठित भारत का निर्माण कर सकते हैं। डॉ. रमन सिंह ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि जिस कोलकाता विश्वविद्यालय में स्वर्गीय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने सिर्फ 33 वर्ष की युवा अवस्था में कुलपति के गरिमामय पद को सुशोभित किया था, आज उसी विश्वविद्यालय में उनकी 110 वीं जयंती के कार्यक्रमों का शुभारंभ हो रहा है।
डॉ. रमन सिंह ने कहा कि स्वतंत्र भारत के प्रथम उद्योग मंत्री के रूप में डॉ. मुखर्जी ने देश के औद्योगिक और आर्थिक विकास के लिए भी अपनी अहम भूमिका निभाई। वे इतने सिध्दांतवादी थे कि राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखकर उन्होंने अपने सिध्दांतों के लिए केन्द्रीय मंत्री पद से भी त्याग पत्र दे दिया। डॉ. सिंह ने कहा कि स्वर्गीय डॉ. मुखर्जी एक सच्चे देशभक्त थे, जिन्होंने कश्मीर के मामले में हमेशा यह विचार रखा कि एक ही देश में दो निशान, दो प्रधान और दो विधान की व्यवस्था कभी नहीं चल सकती। स्वर्गीय डॉ. मुखर्जी अखण्ड भारत के पक्षधर थे। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि आज जबकि देश में लगभग हर तरफ अलगाववादी, हिंसक और अराजक तत्व सिर उठाने की कोशिश कर रहे हैं, छत्तीसगढ़ सहित देश के अनेक राज्यों में नक्सल हिंसा का खतरा एक बड़ी चुनौती बन गया है, तब ऐसे नाजुक समय में हमें डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे महान देश भक्त अनायास याद आने लगते हैं। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि माओवाद अथवा नक्सलवाद की हिंसक विचार धारा को आज उसकी जन्मभूमि चीन और नक्सलबाड़ी में भी जनता खारिज कर चुकी है, लेकिन राष्ट्रीय एकता और लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतें नक्सलवाद के जरिए हिंसा और आतंक फैलाने में लगी हैं।
डॉ. रमन सिंह ने नक्सल हिंसा और आतंक से निबटने के लिए केन्द्र सरकार और प्रभावित राज्यों की समन्वित कार्ययोजना के और भी ज्यादा बेहतर क्रियान्वयन की जरूरत पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ को नक्सल हिंसा की यह समस्या विरासत में मिली है। नक्सलियों की हिंसक और आतंकवादी गतिविधियों के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। नक्सलियों द्वारा निरीह और निहत्थे आदिवासियों की निर्ममता से हत्याएं की जा रही हैं। छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र के शांतिपूर्ण विकास के लिए बस्तर को नक्सल हिंसा से मुक्त करने के लिए वचनबध्द है। हमारे सुरक्षा बलों का मनोबल भी बहुत ऊंचा है।
श्री आडवाणी ने कहा कि स्वर्गीय डॉ. मुखर्जी एक महान समाज सेवी, चिन्तक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और कश्मीर एकीकरण अभियान के महान प्रवर्तक थे। स्वर्गीय डॉ. मुखर्जी ने कश्मीर में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराकर देश और दुनिया को यह संदेश भी दिया कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा। स्वर्गीय डॉ. मुखर्जी को अपने इस देश भक्तिपूर्ण कदम के लिए राष्ट्र विरोधी तत्वों की हिंसा का भी शिकार होना पड़ा। श्री आडवाणी ने देश में हिंसा और आंतकवाद की बढ़ती समस्या पर चिन्ता व्यक्त की और कहा कि इस चुनौती का मुकाबला करने के लिए डॉ. मुखर्जी के सिध्दांतों के अनुरूप हमें राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत बनाना होगा। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने इस अवसर पर अपने उदबोधन में स्वर्गीय डॉ. मुखर्जी को राष्ट्रीय एकता का महान योध्दा बताया। उन्होंने कहा कि कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने के लिए स्वर्गीय डॉ. मुखर्जी के अमर बलिदान को हमेशा याद रखा जाएगा। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय डॉ. मुखर्जी के आदर्शो पर चलकर ही हम सब मिलकर एक शक्तिशाली और संगठित भारत का निर्माण कर सकते हैं। डॉ. रमन सिंह ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि जिस कोलकाता विश्वविद्यालय में स्वर्गीय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने सिर्फ 33 वर्ष की युवा अवस्था में कुलपति के गरिमामय पद को सुशोभित किया था, आज उसी विश्वविद्यालय में उनकी 110 वीं जयंती के कार्यक्रमों का शुभारंभ हो रहा है।
डॉ. रमन सिंह ने कहा कि स्वतंत्र भारत के प्रथम उद्योग मंत्री के रूप में डॉ. मुखर्जी ने देश के औद्योगिक और आर्थिक विकास के लिए भी अपनी अहम भूमिका निभाई। वे इतने सिध्दांतवादी थे कि राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखकर उन्होंने अपने सिध्दांतों के लिए केन्द्रीय मंत्री पद से भी त्याग पत्र दे दिया। डॉ. सिंह ने कहा कि स्वर्गीय डॉ. मुखर्जी एक सच्चे देशभक्त थे, जिन्होंने कश्मीर के मामले में हमेशा यह विचार रखा कि एक ही देश में दो निशान, दो प्रधान और दो विधान की व्यवस्था कभी नहीं चल सकती। स्वर्गीय डॉ. मुखर्जी अखण्ड भारत के पक्षधर थे। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि आज जबकि देश में लगभग हर तरफ अलगाववादी, हिंसक और अराजक तत्व सिर उठाने की कोशिश कर रहे हैं, छत्तीसगढ़ सहित देश के अनेक राज्यों में नक्सल हिंसा का खतरा एक बड़ी चुनौती बन गया है, तब ऐसे नाजुक समय में हमें डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे महान देश भक्त अनायास याद आने लगते हैं। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि माओवाद अथवा नक्सलवाद की हिंसक विचार धारा को आज उसकी जन्मभूमि चीन और नक्सलबाड़ी में भी जनता खारिज कर चुकी है, लेकिन राष्ट्रीय एकता और लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतें नक्सलवाद के जरिए हिंसा और आतंक फैलाने में लगी हैं।
डॉ. रमन सिंह ने नक्सल हिंसा और आतंक से निबटने के लिए केन्द्र सरकार और प्रभावित राज्यों की समन्वित कार्ययोजना के और भी ज्यादा बेहतर क्रियान्वयन की जरूरत पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ को नक्सल हिंसा की यह समस्या विरासत में मिली है। नक्सलियों की हिंसक और आतंकवादी गतिविधियों के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। नक्सलियों द्वारा निरीह और निहत्थे आदिवासियों की निर्ममता से हत्याएं की जा रही हैं। छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र के शांतिपूर्ण विकास के लिए बस्तर को नक्सल हिंसा से मुक्त करने के लिए वचनबध्द है। हमारे सुरक्षा बलों का मनोबल भी बहुत ऊंचा है।
क्रमांक-1649/स्वराज्य

