नक्सल पीड़ितों के लिए राहत राशि में दोगुनी वृध्दि
नक्सल हिंसा में प्रत्येक मृतक के आश्रित परिवार को अब मिलेगी दो लाख रूपए की सहायता
रायपुर, 21 जुलाई 2011
नक्सल हिंसा से पीड़ित व्यक्तियों और परिवारों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने राहत राशि बढ़ाकर दोगुनी कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के निर्देश पर गृह विभाग द्वारा इस आशय का संशोधन आदेश लगभग पांच महीने पहले इस वर्ष तीन मार्च को यहां मंत्रालय से जारी किया जा चुका है। इस आदेश के तहत अब नक्सल हिंसा में मारे गए नागरिकों के आश्रित परिवार को एक लाख रूपए के स्थान पर दो लाख रूपए की सहायता देने का प्रावधान किया गया है।
विभागीय अधिकारियों ने आज यहां बताया कि संशोधन आदेश के अनुसार नक्सल हिंसा में घायल होने पर स्थायी रूप से असमर्थता के प्रकरण में राहत राशि 50 हजार रूपए से बढ़ाकर एक लाख रूपए और गंभीर घायल के लिए दस हजार रूपए से बढ़ाकर 20 हजार रूपए कर दी गई है। नक्सल हिंसा में मकान, दुकान आदि स्थायी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचने पर कच्चे मकान को हुई क्षति पर सहायता राशि दस हजार रूपए से बढ़ाकर 20 हजार रूपए और पक्के मकान के लिए 20 हजार रूपए से बढ़ाकर 40 हजार रूपए कर दी गई है। इसी तरह अनाज, कपड़े और घरेलू सामान जैसी चल सम्पत्ति के नुकसान पर पांच हजार रूपए की सहायता का प्रावधान था, जिसे बढ़ाकर दस हजार रूपए कर दिया गया है। जीविकोपार्जन के साधन जैसे बैलगाड़ी, नाव आदि के नुकसान पर सहायता राशि दस हजार से बढ़ाकर 20 हजार रूपए और ट्रैक्टर, जीप आदि के नुकसान पर 25 हजार रूपए से बढ़ाकर 50 हजार रूपए की गई है।
अधिकारियों ने बताया कि यह संशोधन एक नवम्बर 2010 के बाद की घटनाओं में लागू होगा। गृह विभाग ने प्रदेश में नक्सल पीड़ित व्यक्तियों और परिवारों की मदद करने तथा आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए 20 अक्टूबर 2004 को जारी आदेश में एक विस्तृत कार्य-योजना का ऐलान किया था। इसी तारतम्य में इस आदेश में संशोधन करते हुए गृह विभाग ने अपने तीन मार्च 2011 के आदेश में नक्सल पीड़ितों के लिए राहत राशि बढ़ाने का प्रावधान किया है। संशोधन आदेश में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में निवासरत नक्सल पीड़ित परिवार के लिए मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के तहत न्यूनतम दर पर अनाज प्राप्त करने की भी पात्रता होगी। ऐसे परिवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत इलाज के लिए निर्धारित सुविधाएं भी मिलेंगी। इसके अलावा ऐसे नक्सल पीड़ित परिवार के अधिकतम दो बच्चों को स्नातक स्तर तक नि:शुल्क शिक्षा, नि:शुल्क छात्रावास आदि की व्यवस्था आदिम जाति और अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा अपनी योजना के तहत की जाएगी। राज्य में निवासरत नक्सल पीड़ित परिवारों को प्रदेश के भीतर संचालित बसों में यात्री किराए में 50 प्रतिशत छूट की भी पात्रता होगी। संशोधन आदेश में स्पष्ट किया गया है कि परिवार के अंतर्गत परिवार के मुखिया, मुखिया की पत्नी, उसके पुत्र, अविवाहित पुत्री, आश्रित माता-पिता और आश्रित भाई-बहन शामिल माने जाएंगे। संशोधन आदेश की प्रतिलिपि पुलिस महानिदेशक सहित प्रदेश सरकार के सभी संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों, जिला दंडाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को भी भेजी गयी है।
विभागीय अधिकारियों ने आज यहां बताया कि संशोधन आदेश के अनुसार नक्सल हिंसा में घायल होने पर स्थायी रूप से असमर्थता के प्रकरण में राहत राशि 50 हजार रूपए से बढ़ाकर एक लाख रूपए और गंभीर घायल के लिए दस हजार रूपए से बढ़ाकर 20 हजार रूपए कर दी गई है। नक्सल हिंसा में मकान, दुकान आदि स्थायी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचने पर कच्चे मकान को हुई क्षति पर सहायता राशि दस हजार रूपए से बढ़ाकर 20 हजार रूपए और पक्के मकान के लिए 20 हजार रूपए से बढ़ाकर 40 हजार रूपए कर दी गई है। इसी तरह अनाज, कपड़े और घरेलू सामान जैसी चल सम्पत्ति के नुकसान पर पांच हजार रूपए की सहायता का प्रावधान था, जिसे बढ़ाकर दस हजार रूपए कर दिया गया है। जीविकोपार्जन के साधन जैसे बैलगाड़ी, नाव आदि के नुकसान पर सहायता राशि दस हजार से बढ़ाकर 20 हजार रूपए और ट्रैक्टर, जीप आदि के नुकसान पर 25 हजार रूपए से बढ़ाकर 50 हजार रूपए की गई है।
अधिकारियों ने बताया कि यह संशोधन एक नवम्बर 2010 के बाद की घटनाओं में लागू होगा। गृह विभाग ने प्रदेश में नक्सल पीड़ित व्यक्तियों और परिवारों की मदद करने तथा आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए 20 अक्टूबर 2004 को जारी आदेश में एक विस्तृत कार्य-योजना का ऐलान किया था। इसी तारतम्य में इस आदेश में संशोधन करते हुए गृह विभाग ने अपने तीन मार्च 2011 के आदेश में नक्सल पीड़ितों के लिए राहत राशि बढ़ाने का प्रावधान किया है। संशोधन आदेश में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में निवासरत नक्सल पीड़ित परिवार के लिए मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के तहत न्यूनतम दर पर अनाज प्राप्त करने की भी पात्रता होगी। ऐसे परिवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत इलाज के लिए निर्धारित सुविधाएं भी मिलेंगी। इसके अलावा ऐसे नक्सल पीड़ित परिवार के अधिकतम दो बच्चों को स्नातक स्तर तक नि:शुल्क शिक्षा, नि:शुल्क छात्रावास आदि की व्यवस्था आदिम जाति और अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा अपनी योजना के तहत की जाएगी। राज्य में निवासरत नक्सल पीड़ित परिवारों को प्रदेश के भीतर संचालित बसों में यात्री किराए में 50 प्रतिशत छूट की भी पात्रता होगी। संशोधन आदेश में स्पष्ट किया गया है कि परिवार के अंतर्गत परिवार के मुखिया, मुखिया की पत्नी, उसके पुत्र, अविवाहित पुत्री, आश्रित माता-पिता और आश्रित भाई-बहन शामिल माने जाएंगे। संशोधन आदेश की प्रतिलिपि पुलिस महानिदेशक सहित प्रदेश सरकार के सभी संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों, जिला दंडाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को भी भेजी गयी है।
क्रमांक/1847/स्वराज्य

