विविधताओं से परिपूर्ण है छत्तीसगढ़ का हस्तशिल्प : डॉ. रमन सिंह
मुख्यमंत्री ने किया राजधानी के चौथे शबरी एम्पोरियम का शुभारंभ
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के हस्तशिल्प की कलाकृतियों में इतनी ज्यादा विविधता है, जितनी देश और दुनिया में कहीं भी नजर नहीं आती। डॉ. सिंह ने कहा कि बस्तर से सरगुजा तक यहां के परम्परागत हस्तशिल्पियों ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपनी मेहनत और समर्पण भावना से काष्ठ शिल्प, मिट्टी शिल्प, बेल मेटल आदि विभिन्न विधाओं में छत्तीसगढ़ के हस्तशिल्प को जीवित रखा है और विविधताओं से परिपूर्ण अपनी इस कला के जरिए देश के इस नए राज्य की पूरी दुनिया में पहचान बनायी है।
मुख्यमंत्री आज रात यहां आमापारा में छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड के शबरी एम्पोरियम का शुभारंभ करने के बाद नागरिकों को सम्बोधित कर रहे थे। राजधानी रायपुर में पण्डरी स्थित छत्तीसगढ़ हाट, माना विमानतल और पुरखौती मुक्तांगन में खोले गए शबरी एम्पोरियमों की श्रृंखला में आमापारा में बोर्ड द्वारा स्थापित यह चौथा एम्पोरियम है। लगभग 1200 वर्गफीट में निर्मित भवन में हस्तशिल्प विकास बोर्ड द्वारा खोले गए इस एम्पोरियम में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के कारीगरों के ढोकरा शिल्प, लौह शिल्प, टेराकोटा, बांस और काष्ठ शिल्प, सीसल, गोदना, कौड़ी तथा आरी शिल्प की कलाकृतियां आम नागरिकों को उचित मूल्य पर उपलब्ध होगी। कोसे के कलात्मक कपड़े भी इस एम्पोरियम में उपलब्ध रहेंगे। यहां पर खरीदे जाने वाले सामानों की कीमतों में ग्राहकों को बीस प्रतिशत की विशेष रियायत भी दी जाएगी।
मुख्य अतिथि की आसंदी से समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के हस्तशिल्पियों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए गंभीरता से हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। कच्चे माल की आपूर्ति और कलाकृतियों के निर्माण से लेकर कारोबार के लिए बाजार व्यवस्था और उनकी कला को निखारने के लिए प्रशिक्षण सुविधा पर भी पूरी संजीदगी से ध्यान दिया जा रहा है। राज्य शासन की मंशा है कि छत्तीसगढ़ के शिल्पकारों की पारंपरिक कला को आधुनिकता से भी जोड़ा जाए। इसके लिए हस्तशिल्प विकास बोर्ड के माध्यम से सुदूर बस्तर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर जैसे आदिवासी बहुल जिलों से गरीब और मेहनतकश शिल्पकारों के परिवारों के प्रतिभावान बच्चों को राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं में प्रशिक्षण के लिए भेजा जा रहा है। अभी हाल ही में भारतीय शिल्प संस्थान, जयपुर (राजस्थान) के लिए छत्तीसगढ़ के बस्तर (जगदलपुर) और बिलासपुर जिलों से चयनित पांच छात्रों को छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड के सहयोग से चार वर्षीय डिप्लोमा पाठयक्रम में प्रवेश दिलाया गया है, जहां वे हस्तशिल्प की नई तकनीकों और नई डिजाइनों का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। ऐसे प्रत्येक बच्चे के प्रशिक्षण पर छत्तीसगढ़ सरकार चार वर्ष में आठ लाख रूपए तक खर्च करेगी।
शुभारंभ समारोह की अध्यक्षता ग्रामोद्योग तथा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री पुन्नूलाल मोहले ने की। पर्यटन और संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल और संसदीय सचिव डॉ. सियाराम साहू विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। हस्तशिल्प विकास बोर्ड के अध्यक्ष मेजर अनिल सिंह और प्रबंध संचालक श्री पी. रमेष कुमार ने मुख्यमंत्री सहित सभी अतिथियों का स्वागत किया। स्वागत भाषण मेजर अनिल सिंह ने दिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शबरी एम्पोरियम का अवलोकन किया और वहां पर उन्होंने तथा पर्यटन मंत्री श्री अग्रवाल ने शिल्पकारों की कुछ कलाकृतियां भी खरीदी।
डॉ. रमन सिंह ने समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि राज्य में बस्तर से सरगुजा तक विशाल भू-भाग में फैले हस्तशिल्पियों के पन्द्रह हजार से ज्यादा परिवार अपनी कारीगरी की विभिन्न विधाओं के जरिए जहां जीवन-यापन कर रहे हैं, वहीं अपने हाथों के इस अनोखे हुनर के जरिए राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रदेश को पहचान दिला रहे हैं। उन्हें उनकी इस कला के जरिए बेहतर जीवन-यापन का अवसर देना और इसके लिए सभी जरूरी संसाधन मुहैया कराना प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी है, जिसे हम हस्तशिल्प विकास बोर्ड के सहयोग से बखूबी निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने हस्तशिल्प विकास बोर्ड द्वारा आमापारा में खोले गए शबरी एम्पोरियम के शुभारंभ पर बोर्ड के अध्यक्ष मेजर अनिल सिंह सहित सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और राज्य के विभिन्न जिलों के हस्तशिल्पियों को बधाई और शुभकामनाएं दी।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए ग्रामोद्योग मंत्री श्री पुन्नूलाल मोहले ने कहा कि प्रदेश के हस्तशिल्पियों की आर्थिक सुरक्षा पर भी राज्य सरकार ने गंभीरता से ध्यान दिया है। शिल्पकारों के परिवारों का मात्र 75 रूपए में बीमा करते हुए उन्हें आठ हजार रूपए से लेकर एक लाख रूपए तक बीमा सुरक्षा दी जा रही है। श्री मोहले ने बताया कि राज्य हस्तशिल्प विकास बोर्ड के माध्यम से प्रदेश के हस्तशिल्पियों की कलाकृतियों के कारोबार को तीन करोड़ रूपए तक पहुंचाने का लक्ष्य है। हम उन्हें बाजार की सुविधा भी दिला रहे हैं। उनके बच्चों की पढ़ाई के लिए भी छात्रवृत्ति सहित अन्य सभी जरूरी सुविधाएं दी जा रही हैं। पर्यटन और संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने विशेष अतिथि की आसंदी से समारोह में कहा कि पर्यटन विभाग द्वारा राज्य के प्रमुख पर्यटन क्षेत्रों में बनवाए गए मोटलों में छत्तीसगढ़ के हस्तशिल्प का भी स्टाल लगाया जाएगा, ताकि वहां आने वाले पर्यटक उनकी कलाकृतियाें में से मन पसंद कृति खरीद सकें और हमारे शिल्पकारों को अच्छी आमदनी हो। ऐसे प्रत्येक मोटल में एक-एक स्टाल होगा, जहां हमारे शिल्पकारों के रूकने की भी व्यवस्था होगी और वहां पर वे अपनी कारीगरी का बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे। श्री अग्रवाल ने कहा कि शबरी एम्पोरियम के खुलने पर अब रायपुर आने वाले मेहमानों को एक ही स्थान पर छत्तीसगढ़ के हस्तशिल्प की सभी विधाओं के सामान आसानी से मिल सकेंगे। स्वागत भाषण्ा में हस्तशिल्प विकास बोर्ड के अध्यक्ष मेजर अनिल सिंह ने बोर्ड की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के परम्परागत कारीगरों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाना बोर्ड की सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसके लिए सरगुजा से बीजापुर तक बोर्ड अपनी योजनाओं को पहुंचाकर शिल्पकारों की मदद के लिए प्रयासरत है। मेजर अनिल सिंह ने कहा कि आमापारा के शबरी एम्पोरियम में प्रदेश के विविधतापूर्ण हस्तशिल्प का सम्मिश्रण देखा जा सकेगा। इस मौके पर राज्य हज कमेटी के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज, रायपुर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अशोक अग्रवाल तथा हस्तशिल्प विकास बोर्ड के मुख्य महाप्रबंधक श्री सुनील अवस्थी सहित अनेक अधिकारी और नागरिक उपस्थित थे।

