मुख्यमंत्री ने किया यूनीसेफ की पुस्तिका का विमोचन
छत्तीसगढ़ में 50 लाख की आबादी किशोरों की
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज शाम यहां अपने निवास पर संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था 'यूनीसेफ' द्वारा दुनिया के बच्चों की स्थिति पर वर्ष 2011 के लिए प्रकाशित पुस्तिका का विमोचन किया। 'यूनीसेफ की द स्टेट ऑफ द वर्ल्डस चिल्ड्रन 2011' शीर्षक यह पुस्तिका विशेष रूप से किशोरावस्था
पर केन्द्रित है। इसमें किशोरी बालिकाओं की स्थिति और समाज में उनकी बेहतरी के विभिन्न उपायों पर खास तौर पर प्रकाश डाला गया है। इस मौके पर यूनीसेफ की छत्तीसगढ़ राज्य प्रतिनिधि सुश्री शाहीन निलोफर ने मुख्यमंत्री को बताया कि दुनिया की कुल आबादी का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा दस वर्ष से 19 वर्ष तक आयु समूह के किशोरों का है, वहीं भारत में 20 प्रतिशत आबादी किशोरों की है, जबकि छत्तीसगढ़ में इस आयु समूह के किशोरों की आबादी लगभग 50 लाख है, जो कि राज्य की राज्य की कुल जनसंख्या का करीब 21 प्रतिशत है।
उन्होंने बताया कि यूनीसेफ द्वारा प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों के सहयोग से बच्चों और किशोरों के लिए संचालित कल्याण परियोजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ-साथ आदिम जाति और अनुसूचित जाति विकास विभाग तथा स्कूल शिक्षा विभाग से संबंधित राजीव गांधी शिक्षा मिशन और सर्वशिक्षा अभियान के कार्यक्रमों को भी इसमें जोड़ा गया है। कुपोषण मुक्ति के लिए आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से संचालित परियोजनाओं में भी यूनीसेफ सहयोगी है। किशोरी बालिकाओं में कम वजन और रक्ताल्पता की समस्या को देखते हुए 11 से 14 वर्ष तक आयु समूह की स्कूली बालिकाओं और 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग की समस्त बालिकाओं को एकीकृत बाल विकास परियोजनाओ के अंतर्गत पूरक पोषण आहार देने और उनके स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था की गई है। इसके लिए राज्य सरकार और केन्द्र के सहयोग से महिला और बाल विकास विभाग द्वारा 'सबला योजना' संचालित की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने राज्य के स्कूलों और आश्रम छात्रावासों में सभी बालक-बालिकाओं के बीच दैनिक जीवन में स्वच्छता के महत्व को लेकर उन्हें विशेष समझाइश देने की जरूरत बतायी। डॉ. सिंह ने कहा कि बच्चों में भोजन से पहले और भोजन के बाद हाथ अच्छी तरह से धोने की आदत डालनी होगी। इसी तरह दिनचर्या में स्वच्छता को शामिल कर छोटी-छोटी आदतों में सुधार लाते हुए बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है।

