अधिकतम साठ दिनों में जारी करें जाति प्रमाण पत्र : मुख्यमंत्री के निर्देश
असाध्य सिंचाई पम्पों को बिजली देने में मिली उत्साहजनक सफलता
अनुसूचित जाति प्राधिकरण की बैठक में विकास कार्यों की समीक्षा
मिनी माता स्वावलम्बन योजना की सफलता की कहानियों का विमोचन

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने स्कूल-कॉलेजों में अध्ययनरत अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को जाति प्रमाण पत्र बनवाने में आ रही दिक्कतों को गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री ने आज यहां मंत्रालय में आयोजित अनुसूचिज जाति विकास प्राधिकरण की बैठक में जिला कलेक्टरों और संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि सभी जरूरी प्रक्रियाओं को पूर्ण कर जाति प्रमाण पत्र साठ दिनों (दो माह) की अधिकतम समय-सीमा में जारी कर दिए जाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम से संबंधित मामलों में पीड़ित आवेदकों को भी दो माह के भीतर जाति प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से प्रदान कर दिया जाए। डॉ. रमन सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए प्राप्त आवेदनों को अनिश्चित काल तक नहीं टाला जा सकता। आवेदकों को विभिन्न प्रयोजनों से इसकी जरूरत होती है। उन्होंने मिनी माता स्वावलंबन योजना के तहत बेरोजगारों को व्यवसाय के लिए दुकान उपलब्ध कराने से संबंधित प्रकरणों में प्रति हितग्राही वर्तमान में दी जा रही एक लाख रूपए की ऋण राशि को बढ़ाकर डेढ़ लाख करने की सैध्दांतिक स्वीकृति भी प्रदान कर दी। हितग्राही अगर यह राशि तीन वर्ष के भीतर लौटा देगा तो उसे 50 प्रतिशत की विशेष छूट मिलेगी। यह योजना राज्य अन्त्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम की है। इसके लिए राशि अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण द्वारा दी जा रही है। डॉ. रमन सिंह ने बैठक में इस योजना से संबंधित सफलता की कहानियों की एक पुस्तक का विमोचन भी किया। अधिकारियों ने बैठक में बताया कि इस योजना के तहत वर्ष 2004-05, 2006-07, वर्ष 2009-10 और वर्ष 2011-12 में छह सौ हितग्राहियों को छह करोड़ रूपए की धनराशि देने का लक्ष्य है। इस लक्ष्य के विरूध्द अब तक लगभग चार करोड़ 40 लाख रूपए मंजूर करते हुए 431 हितग्राहियों को सहायता दी जा चुकी है।
उल्लेखनीय है कि डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में प्राधिकरण की यह बारहवी बैठक थी। उन्होंने बैठक में अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण द्वारा वर्ष 2005-06 से इस वर्ष जून माह तक मंजूर किए गए विकास कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने प्राधिकरण क्षेत्र के दस जिलों में वृष्टि छाया वाले इलाकों में वित्तीय वर्ष 2006-07 से वर्ष 2010-11 तक अनुसूचित जाति के किसानों के असाध्य सिंचाई पम्पों के विद्युतीकरण में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए इसकी प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अवधि में एक हजार 912 किसानों को सिंचाई पम्प कनेक्शन स्वीकृत किए गए और इसके लिए प्राधिकरण द्वारा ग्यारह करोड़ 16 लाख रूपए की धनराशि मंजूर की गई, इसके साथ ही स्वीकृत प्रकरणों में से एक हजार 729 किसानों को विद्युत कनेक्शन दिए जा चुके है, जिन पर प्राधिकरण से नौ करोड़ 80 लाख रूपए खर्च किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने इसे प्राधिकरण की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए इसके लिए सभी सदस्यों, प्राधिकरण क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों सहित सभी संबंधित जिला कलेक्टरों को भी बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शेष 183 पम्पों का विद्युतीकरण दिसम्बर 2011 तक पूर्ण कर लिया जाए। उन्होंने विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि पम्प कनेक्शन स्वीकृत होते ही संबंधित किसान को पत्र द्वारा इसकी सूचना तत्काल भेजी जाए। साथ ही सभी स्वीकृत प्रकरणों में किसानों की सूची जिला कलेक्टरों को दी जाए और उनके माध्यम से यह सूची जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को भेज कर वहां सूचना पटल पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित की जाए। मुख्यमंत्री ने यह सूची विद्युत वितरण केन्द्रों में भी प्रदर्शित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के अंतर्गत प्रदेश के कोरबा जिले में संचालित विशेष पुलिस प्रकोष्ठ का उन्नयन पुलिस थाने के रूप में करने की स्वीकृति भी आज की बैठक में प्रदान कर दी। डॉ. रमन सिंह ने बैठक में अनुसूचित जाति और जनजाति के बच्चों के लिए संचालित आश्रम शालाओं और छात्रावासों की व्यवस्था में सुधार के लिए भी कई दिशा-निर्देश दिए। डॉ. सिंह ने कहा कि प्राधिकरण् के सदस्यों सहित सभी जनप्रतिनिधियों और कलेक्टरों तथा विभागीय अधिकारियों को आश्रम छात्रावासों का भी दौरा करना चाहिए। उन्हें वहां बच्चों के साथ बैठ कर भोजन भी करना चाहिए, ताकि भोजन की गुणवत्ता का पता चल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि आश्रम छात्रावासों में छात्र-छात्राओं की सुविधा के लिए स्वच्छ पेयजल, स्वच्छ भोजन के साथ-साथ कमरों और बाथरूम की साफ-सफाई का विशेष रूप से ध्यान रखा जाना चाहिए।
बैठक में आदिम जाति और अनुसूचित जाति विकास मंत्री श्री केदार कश्यप, खाद्य, नागरिक आपूर्ति और ग्रामोद्योग मंत्री श्री पुन्नूलाल मोहले, वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री दयालदास बघेल, प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं विधायक श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा, विधायकगण डॉ. शिव डहरिया, डॉ. हरिदास भारद्वाज, श्री रामजी भारती, श्री रूद्र कुमार गुरू, श्री दूजराम बौध्द और श्रीमती पदमा मनहर सहित सर्वश्री महावीर चौहान, निर्मला बंजारे एवं अनेक सदस्य उपस्थित थे। प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव श्री पी. जॉय उम्मेन और पुलिस महानिदेशक श्री अनिल नवानी सहित सभी संबंधित विभागों के प्रमुख सचिव और सचिव तथा प्राधिकरण क्षेत्र के जिलों के कलेक्टर भी बैठक में मौजूद थे।

