मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आधार परियोजना की मंत्रिमण्डलीय उप-समिति की बैठक
नागरिकों को विशिष्ट पहचान संख्या देने की कार्य योजना पर विचार-विमर्श
परियोजना के लिए तेरहवें वित्त आयोग से 91 करोड़ का अनुदान स्वीकृत
रायपुर 13 अप्रैल 2011

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण की 'आधार परियोजना' के लिए मंत्री-मण्डलीय उप समिति की बैठक आयोजित की गयी। उल्लेखनीय है कि इस परियोजना में देश के सभी निवासियों को बारह अंकों की जैव सांख्यिकीय (बायो-मेट्रिक्स) आधारित एक विशेष पहचान संख्या देने का कार्य शुरू किया गया है। छत्तीसगढ़ में इस परियोजना के प्रथम चरण में सात जिलों - रायपुर, धमतरी, महासमुन्द, बिलासपुर, कोरिया, जांजगीर-चांपा और बस्तर जिलों को शामिल किया गया हैं। इन जिलों में कुल एक करोड़ 15 लाख की आबादी को विशेष पहचान संख्या देने का लक्ष्य है। परियोजना के लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग को नोडल विभाग और इस विभाग के प्रमुख सचिव को पंजीयक का दायित्व सौंपा गया है। योजना में शामिल जिलों के कलेक्टर इस परियोजना के तहत अपर पंजीयक बनाए गए हैं।
मंत्रिमण्डलीय उप-समिति की आज की बैठक में परियोजना के तहत चल रही प्रक्रिया और उसके सभी पहलुओं पर विचार करते हुए आगे की कार्य योजना पर भी चर्चा की गयी। निविदा प्रक्रियाओं के संबंध में भी विचार-विमर्श हुआ। खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री पुन्नूलाल मोहले, राजस्व मंत्री श्री अमर अग्रवाल, पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम, कृषि मंत्री श्री चंद्रशेखर साहू, स्कूल शिक्षा और लोक निर्माण मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल और नगरीय प्रशासन मंत्री श्री राजेश मूणत भी उपस्थित थे। मुख्य सचिव श्री पी. जॉय उम्मेन, प्रमुख सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति श्री विवेक ढांड, सचिव ऊर्जा श्री अमन कुमार सिंह, छत्तीसगढ़ की निदेशक जनगणना श्रीमती रेणुजी पिल्ले और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय से आए उप-महानिदेशक श्री व्ही.एस. भास्कर तथा अतिरिक्त महानिदेशक श्री एस. श्रीनिवास भी बैठक में मौजूद थे।
अधिकरियों ने बैठक में बताया कि संबंधित जिलों में इसकी तैयारियां तेजी से चल रही है। यह भी बताया गया कि राज्य सरकार द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राजधानी रायपुर में प्रायोगिक तौर पर कोर पी.डी.एस. परियोजना शुरू की जा रही है, जिसमें कोई भी राशनकार्ड धारक अपने स्मार्ट कार्ड के आधार पर किसी भी राशन दुकान से महीने का राशन ले सकेगा। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में यह देश में अपने किस्म की पहली परियोजना होगी। कोर पी.डी.एस. को भी आज की बैठक में आधार परियोजना से जोड़ने का निर्णय लिया गया। बैठक में यह भी बताया गया कि आधार परियोजना के तहत पंजीयन के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार रसोई गैस कनेक्शन, राशनकार्ड, वाहन पंजीयन और ड्रायव्हिंग लायसेंस आदि बनवाने की प्रक्रिया में आवेदक की भारतीय विशिष्ट पहचान संख्या (आधार नम्बर) का उपयोग अनिवार्य करने के बारे में भी गंभीरता से विचार करेगी। तेरहवें वित्त आयोग से छत्तीसगढ़ को आधार परियोजना में गरीबी रेखा श्रेणी के लोगों के नामांकन के लिए 91 करोड़ रूपए का अनुदान स्वीकृत किया गया है, जो दस किश्तों में हर छह महीने में प्राप्त होगा। यह राशि प्रति व्यक्ति एक सौ रूपए के मान से खर्च की जाएगी। आज की बैठक में इस राशि में से 75 रूपए नामांकन के लिए आने वाले व्यक्ति को और 25 रूपए उसके नामांकन की प्रक्रिया में होने वाले स्टेशनरी खर्च आदि पर व्यय करने के बारे में भी विचार किया गया। गरीबी रेखा श्रेणी के प्रत्येक व्यक्ति को 75 रूपए सीधे इसलिए देने के बारे में सोचा जा रहा है कि उसे नामांकन के लिए आने पर उसके दिन भर की कमाई अथवा मजदूरी की कुछ प्रतिपूर्ति की जा सके। यह राशि विशेष रूप से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना आदि रोजगार मूलक कार्यो में लगे श्रमिकों के लिए होगी।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने विगत 23 अक्टूबर 2010 को रायपुर जिले के गरियाबंद में आयोजित कार्यक्रम में ग्राम जोबा और उरतुली के लोगों को विशिष्ट पहचान संख्या (यू.आई.डी.) देकर छत्तीसगढ़ में 'आधार' परियोजना का शुभारंभ किया था। उन्होंने वहां स्वयं अपना आधार कार्ड बनवाने के लिए उंगलियों के निशान देकर आंखों की पुतलियों की भी स्केनिंग करवायी थी। भारतीय विशिष्ट पहचान संख्या (यू.आई.डी.) बारह अंकों की एक अनोखी पहचान संख्या होगी, जिसमें प्रत्येक निवासी के बारे में जनसंख्या आधारित विवरण सहित जैव-सांख्यिकीय (बायो-मेट्रिक) जानकारी कम्प्यूटर में दर्ज की जाएगी। इस विशिष्ट पहचान नम्बर का उपयोग बैंकों में खाता खोलने, ड्रायविंग लायसेंस और पासपोर्ट बनवाने सहित विभिन्न सरकारी सेवाओं का लाभ उठाने के लिए किया जा सकेगा। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने इसका चयनित नाम 'आधार' रखा है। भारत सरकार के योजना आयोग के अन्तर्गत भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण अगस्त 2009 में प्रारंभ हुआ है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस परियोजना के विभिन्न कार्यो के समन्वय के लिए वित्त और योजना विभाग को नोडल विभाग के अधिकृत किया है, वहीं प्रथम चरण में खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव को इसके लिए रजिस्ट्रार और सभी जिला कलेक्टरों को अतिरिक्त रजिस्ट्रार के रूप में दायित्व सौंपा गया है। इस राष्ट्रीय परियोजना में देश के सभी निवासियों को विशिष्ट पहचान संख्या (आधार) जारी करने का लक्ष्य है। देश में आज भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग, खास तौर पर गरीब तबके के लोग हैं, जो स्पष्ट परिचय प्रमाण नहीं होने के कारण विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों का लाभ नहीं उठा पाते या फिर इसके अभाव में उन्हें कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इस परियोजना में उन्हें 'आधार' नम्बर आवंटित किया जाएगा, उनकी पहचान को भी प्रमाणित करेगा। इससे शासन की विभिन्न लोक हितैषी योजनाओं का समुचित फायदा वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंचाने में भी आसानी होगी। इससे सभी शासकीय योजनाओं का और भी अधिक प्रभावी और कुशल क्रियान्वयन होगा। इसके अलावा इन योजनाओं तथा सरकारी काम-काज में ज्यादा से ज्यादा पारदर्शिता आएगी। पूरी दुनिया में भारत पहला देश है, जो अपने निवासियों को राष्ट्रीय स्तर पर जैव-सांख्यिकीय (बायो-मेट्रिक) आधार पर विशिष्ट पहचान संख्या आवंटित कर रहा है। इसके अन्तर्गत निवासियों का पंजीयन करते समय उनके सभी प्रकार के जनसंख्या आधारित विवरण और बायो-मेट्रिक्स फोटो सहित दोनों हाथों की सभी दस उंगलियों के निशान लिए जाएंगे। परियोजना के तहत पांच वर्ष के कम उम्र के बच्चों के फोटो उनके माता-पिता या अभिभावकों के साथ और अधिक उम्र के बच्चों को फोटो अलग-अलग लिए जाएंगे। नागरिकों को पहचान संख्या जारी करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति के नाम, जन्म दिनांक, लिंग, भवन, ग्राम, नगर, जिला, राज्य, पिन कोड और देश के नाम का भी उल्लेख किया जाएगा। इसके अलावा व्यक्तिगत रहवासी का अतिरिक्त पता उसके परिवार के सदस्यों के नामों का विवरण और आधार क्रमांक भी इसमें दर्ज किया जाएगा।
राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ में इस परियोजना के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय क्रियान्वयन समिति का गठन किया है। इसमें सदस्य के रूप में अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास, प्रमुख सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, सचिव महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग, सचिव श्रम विभाग, सचिव स्कूल शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी तथा राजस्व विभाग, निदेशक राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र, मुख्य कार्यपालन अधिकारी छत्तीसगढ़ इंफोटेक एवं बायोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स), निदेशक जनगणना छत्तीसगढ़ और क्षेत्रीय उप-महानिदेशक भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण हैदराबाद शामिल हैं।

