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आजादी के त्यौहार में जनता को नये जिलों की सौगात

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When Aug 15, 2011
from 04:35 PM to 04:35 PM
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मुख्यमंत्री ने की नौ नये जिलों की घोषणा
सुकमा, कोंडागांव, गरियाबंद, बलौदाबाजार, बालोद, बेमेतरा, मुंगेली, सूरजपुर और बलरामपुर को जिले का दर्जा
शांति और विकास एक रथ के दो पहिए : डॉ. रमन सिंह
शुरू होगी मुख्यमंत्री शहरी विद्युतीकरण योजना
राज्य में इस साल 75 हजार हेक्टेयर में अतिरिक्त सिंचाई क्षमता का लक्ष्य
प्रदेश में बनेंगे दो हजार नए शाला भवन और खुलेंगे 934 नए स्कूल
कम्प्यूटर शिक्षा योजना में शामिल होंगे 1600 नए स्कूल

रायपुर, 15 अगस्त 2011
2279-150811

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रदेशवासियों को आज स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नौ नये जिलों की  एक ऐतिहासिक सौगात दी। उन्होंने राजधानी रायपुर के पुलिस परेड मैदान में सवेरे आयोजित स्वतंत्रता दिवस के राज्य स्तरीय मुख्य समारोह में सुकमा, कोंडागांव, गरियाबंद, बलौदाबाजार, बालोद, बेमेतरा, मुंगेली, सूरजपुर और बलरामपुर को नया जिला बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि ये जिले जनवरी 2012 से काम शुरू कर देंगे।
  मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता और शासन-प्रशासन को जनता के नजदीक पहुंचाने के लिए यह ऐतिहासिक फैसला उनकी सरकार ने लिया है, जो राज्य के प्रशासनिक इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा। इस नई सौगात के जरिए राज्य के भूगोल के साथ-साथ प्रदेश सरकार छत्तीसगढ़ की तकदीर और तस्वीर बदलने की दिशा में भी एक नया इतिहास रचेगी। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री द्वारा आज घोषित नौ नये जिलों को मिलाकर छत्तीसगढ़ में राजस्व जिलों की संख्या 27 तक पहुंच जाएगी। डॉ. रमन सिंह ने इसके पहले वर्ष 2007 में नारायणपुर और बीजापुर को जिले का दर्जा दिया था। उनके नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा विगत चार वर्ष में गठित किए गए जिलों की संख्या अब ग्यारह तक पहुंच जाएगी। मुख्यमंत्री ने जनता के नाम आज यहां पुलिस परेड मैदान में स्वतंत्रता दिवस के अपने संदेश में कहा कि शांति और विकास एक रथ के दो पहिए हैं। हम इन दोनों पहिए को एक साथ चलाकर छत्तीसगढ़ को देश का सबसे समृध्द और खुशहाल राज्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जनकल्याण की राज्य सरकार की सोच और इसके लिए लगातार किए जा रहे प्रयासों को सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ का समर्थन मिल रहा है। डॉ. रमन सिंह ने देशभक्तिपूर्ण वातावरण में आयोजित समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और सीमा सुरक्षा बल, केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, छत्तीसगढ़ पुलिस (पुरूष एवं महिला), छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, जेल और होमगार्ड के जवानो तथा राष्ट्रीय कैडेट कोर (एन.सी.सी.), राष्ट्रीय सेवा योजना और भारत स्काउट्स एवं गाइड्स संगठन के विद्यार्थियों की संयुक्त परेड की सलामी ली। परेड में जंगलवार फेयर कॉलेज कांकेर के अश्वारोही दल और श्वान दल भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने समारोह में शांति के प्रतीक सफेद कबूतर आकाश में उड़ाए और रंग-बिरंगे गुब्बारे भी छोड़े। इस मौके पर छात्र-छात्राओं ने राष्ट्रीय एकता की भावना पर आधारित रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। डॉ. रमन सिंह ने समारोह में राजधानी रायपुर के अनेक वरिष्ठ स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने एक खुले वाहन में परेड का निरीक्षण करते हुए समारोह में बड़ी संख्या में मौजूद नागरिकों का अभिवादन भी किया। 2279-1-150811
जनता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि सरस्वती सायकल प्रदाय योजना के तहत अब शहरी क्षेत्रों की स्कूली बालिकाओं को भी नि:शुल्क सायकल दी जाएगी। इसके अलावा सरगुजा बस्तर के आदिवासी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में आई.टी.आई. छात्राओं को भी नि:शुल्क सायकल देने की योजना शुरू की जाएगी। कम्प्यूटर शिक्षा योजना में 1600 नए स्कूलों को शामिल किया जाएगा, जिससे अब यह योजना 1900 स्कूलों में संचालित होने लगेगी। उन्होंने समारोह में बताया कि राज्य में इस वर्ष 75 हजार हेक्टेयर में अतिरिक्त सिंचाई क्षमता निर्मित करने के लक्ष्य है। मुख्यमंत्री ने समारोह के मंच से जनता को संबोधित करते हुए अपने संदेश में कहा कि यह अवसर उमंग और उल्लास के बीच यह चिंतन करने का भी है कि हमारे पुरखों ने जिन सपनों, जिन उम्मीदों, जिन आदर्शों और जिन लक्ष्यों के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर किया, उसे पूरा करने में हम कितना सफल हुए हैं। संभावनाओं और उपलब्धियों के बीच जो अपेक्षाओं के मोती छुपे होते हैं, उन्हें तराश कर ही राष्ट्र-जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि 'स्वतंत्रता तभी तक फल-फूल सकती है, जब-तक वह राष्ट्रीय संस्कृति को पोषण देने के लिए आहार जुटाती है।' हमारे प्रेरणास्त्रोत एकात्म-मानववाद और अंत्योदय के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय जी का यह विचार हमें अपने परिवेश में सही ढंग से सोचने की शक्ति देता है। इस चेतना के कारण देश की आंतरिक सुरक्षा पर मंडराते एक बड़े खतरे के सामने शुतुरमुर्ग की तरह सिर छिपाने के बदले हमने हिंसक तत्वों, माओवादियों-नक्सलवादियों के षडयंत्रों को उजागर करना बेहतर समझा। हमने नक्सलवादियों की मानवता-विरोधी और राष्ट्र-द्रोही करतूतों के खिलाफ एक निर्णायक अभियान चलाया है, जिसके कारण नक्सलवाद को सिर्फ एक प्रदेश की नहीं बल्कि अनेक प्रदेशों की और राष्ट्रीय समस्या के रूप में स्वीकार किया गया है। डॉ. रमन सिंह ने प्रदेश की विकास यात्रा की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सिर्फ एक दशक पहले जन्मे छत्तीसगढ़ को हमने कई मायनों में देश का अग्रणी राज्य बना दिया है। अच्छी अर्थव्यवस्था और प्रबंध कुशलता के लिए छत्तीसगढ़ की अब देश में खास पहचान है। हमारा स्वयं का राजस्व 14 हजार 141 करोड़ रूपया है जो कि केन्द्रीय अनुदान 11 हजार 660 करोड़ रूपए से अधिक है। हम जनकल्याणकारी योजनाएं बनाने और उसके सफल क्रियान्वयन में भी आगे हैं। एक रूपए किलो और दो रूपए किलो में राज्य के सभी गरीब परिवारों को हर माह 35 किलो चावल देकर हमने राज्य को भूख की चिंता से मुक्त कर दिया है। अब हमारा लक्ष्य पौष्टिकता सुरक्षा है। इस दिशा में सभी गरीब परिवारों को नि:शुल्क नमक, बस्तर में पांच रूपए किलो में चना वितरण जैसी योजनाएं कारगर साबित हो रही हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन के उठाव और वितरण की पारदर्शी व्यवस्था के कारण छत्तीसगढ़ देश का आदर्श राज्य बन गया है। हमारी पहल का लाभ अब देश के विभिन्न राज्यों की जनता को भी मिलेगा।
    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण विकास के लिए खर्च की जा रही राशि राष्ट्रीय औसत के डेढ़-गुने से अधिक है, वहीं कृषि के क्षेत्र में हम जो निवेश कर रहे हैं, वह भी राष्ट्रीय औसत के दो-गुने से अधिक है। लाखों लोगों को रोजगार देने, कर्मचारियों को छठवां वेतनमान देने, बड़े पैमाने पर अनुकम्पा नियुक्ति, पदोन्नति व अन्य सुविधाएं देने के बावजूद राज्य का स्थापना व्यय 35 प्रतिशत तक सीमित रखा गया है। सर्वाधिक विकास दर के साथ ही राज्य में प्रति व्यक्ति वार्षिक आय 10 हजार रूपए से बढ़कर 44 हजार रूपए हो गई है। प्रति व्यक्ति बिजली खपत 300 यूनिट से बढ़कर 1400 यूनिट हो गई है। सूचना प्रौद्योगिकी की कारगर अधोसंरचना का विकास किया गया है। ई-प्रशासन, ई-प्रोक्योरमेंट, चॉइस, धान खरीदी तथा पीडीएस का कम्प्यूटरीकरण आदि परियोजनाओं  के माध्यम से विकासपरक तथा जनहितकारी योजनाओं को प्रभावकारी व पारदर्शी बनाया गया है। अधिकारियों, कर्मचारियों का उत्तारदायित्व निर्धारित करने के लिए हम कानूनी प्रावधान कर रहे हैं। विकास और विश्वास की नई संस्कृति गढ़ने में हमारी इन उपलब्धियों का अहम योगदान है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने किसानों की मेहनत को सम्मान देते हुए उन्हें अनेक सुविधाएं दी हैं। जिसके कारण धान का उत्पादन 50 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 91 लाख मीट्रिक टन हो गया है। हर साल समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का आंकड़ा नए शिखर को छू रहा है। इस साल 51 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी के एवज में किसानों के घरों में पांच हजार करोड़ रूपए की राशि पहुंची है। हमने देश में सबसे पहले न्यूनतम तीन प्रतिशत ब्याज दर पर कृषि ऋण देने की शुरूआत की थी। विगत वर्ष कृषि ऋण प्रदाय का लक्ष्य 1500 करोड़ रूपए था, जिसे बढ़ा कर 1800 करोड़ रूपए कर दिया है। कृषि यंत्रों पर देय 'वेट' समाप्त किया गया है। 6,000 यूनिट तक नि:शुल्क बिजली दी जा रही है। वन पट्टाधारी किसानों को नि:शुल्क खाद व बीज देने के लिए 'हरित क्रांति विस्तार योजना'  लागू की गई है। किसानों की समस्याएं गांव-घर, खेत-खलिहान में ही निपटाने के लिए 'किसान रथ, किसान सम्मेलन, किसान मेले' का आयोजन किया जा रहा है। इन प्रयासों 2279-2-150811का परिणाम अब दिखने लगा है। हाल ही में देश में सर्वाधिक धान उत्पादित करने के लिए केन्द्र शासन द्वारा छत्तीसगढ़ को 'कृषि कर्मण' पुरस्कार दिया गया है। यह सम्मान मैं अन्नदाताओं, किसान भाइयों-बहनों को समर्पित करता हूं जो  पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस धरती को अपने पसीने से सींच रहे हैं। धान के साथ ही अनाज, दलहन, तिलहन तथा उद्यानिकी फसलों के उत्पादन में भी कई गुना वृध्दि हुई है।
    डॉ. रमन सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार के प्रयासों से राज्य में निर्मित सिंचाई क्षमता 23 प्रतिशत से बढ़कर 32 प्रतिशत हो गई है। इस वर्ष 75 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षमता निर्मित करने का लक्ष्य रखा गया है। रायगढ़ जिले में करीब 600 करोड़ रूपए की लागत से बनाई जा रही केलो परियोजना को शीघ्र पूरा किया जाएगा, इससे 22 हजार 810 हेक्टेयर रकबे में सिंचाई हो सकेगी। रविशंकर सागर जलाशय के अतिशय पानी को दुर्ग जिले के तांदुला जलाशय तक पहुंचाने के लिए 60 किलोमीटर लम्बी नहर बनाने का काम हाथ में लिया गया है। इसी तरह बिलासपुर जिले में अरपा-भैंसाझार वृहद सिंचाई परियोजना का सर्वे कार्य पूरा हो गया है। बस्तर की पुरानी समस्या इंद्रावती नदी-जौरानाला विवाद सुलझाने में एक बड़ी सफलता मिली है। इन दोनों जलाशयों में दो पक्की संरचनाएं बनाने की शुरूआत भी हो गई है। उन्होंने बताया कि शुध्द पेयजल के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रति 250 लोगों के बीच एक हैण्ड पम्प लगाने का मापदण्ड है, जिसके विरूध्द छत्तीसगढ़ में 82 लोगों के बीच एक हैण्ड पम्प लगा दिया गया है। इस साल 12 नई नगरीय योजनाओं, 19 नवगठित नगर पंचायतों की योजनाओं का काम शुरू किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में 470 नई नल-जल प्रदाय योजनाएं व 331 स्थल जल प्रदाय योजनाएं शुरू की गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में शिक्षा के विकास के लिए विगत पांच वर्षों में प्रायमरी से हायर सेकेण्डरी तक 4 हजार 249 नई शालाएं खोली गई हैं। इस वर्ष 934 शालाएं खोलने तथा दो हजार नए शाला भवन बनाने की मंजूरी दी गई है। कक्षा पहली से आठवीं तक की सभी छात्राओं को तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं बीपीएल परिवारों के छात्रों को दो-दो सेट गणवेश देने की नई योजना शुरू की गई है। कम्प्यूटर आधारित शिक्षण योजना को 300 से बढ़ाकर 1900 शालाओं में लागू किया जाएगा। पिछड़े विकासखंडों में शिक्षा के स्तर में सुधार हेतु विगत वर्ष 15 मॉडल स्कूल तथा 56 कन्या छात्रावास शुरू किए गए थे, वहीं इस वर्ष 72 मॉडल स्कूल तथा 74 कन्या छात्रावास शुरू करने की तैयारी है। इस वर्ष 7 नए शासकीय महाविद्यालय शुरू किए गए हैं, जिससे राज्य में महाविद्यालयों की संख्या 398 हो गई है। सभी जिलों में शासकीय महिला महाविद्यालय स्थापित हो गए हैं। इस वर्ष हम 17 नए भवन बना रहे हैं, जिससे सभी शासकीय महाविद्यालय स्वयं के भवनों में लगने लगेंगे। इस साल सात नए आईटीआई खोले जा रहे हैं तथा 29 नए संस्था भवन और 26 छात्रावास बनाए जा रहे हैं।
    डॉ. रमन सिंह ने कहा कि राज्य शासन द्वारा नारी शक्ति की गतिशीलता बढ़ाने के लिए नि:शुल्क सायकल प्रदाय का दायरा बढ़ाया जा रहा है। यह सुविधा सिर्फ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की हाईस्कूल छात्राओं से शुरू की गई थी। फिर इसमें सभी वर्गों की बीपीएल छात्राओं को जोड़ा गया और अब ग्रामीण की तरह शहरी अंचलों की बालिकाओं को भी इस योजना का लाभ दिया जाएगा। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, पंजीकृत निर्माणी महिला श्रमिकों, आदिवासी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में आईटीआई छात्राओं को भी नि:शुल्क सायकलें दी जाएंगी। गर्भवती महिलाओं के लिए 'मातृत्व सहयोग योजना', अध्ययनरत तथा शाला त्यागी किशोरियों के लिए 'सबला योजना', विधवा, तलाकशुदा एवं अविवाहित महिलाओं के लिए 'सक्षम योजना' शुरू की गई है। 'मुख्यमंत्री कन्यादान योजना' में सहायता राशि बढ़ाकर दोगुनी अर्थात 10 हजार रूपए कर दी गई है। बिजली के क्षेत्र में प्रदेश की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में ऊर्जा क्रांति का विस्तार किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 1500 मेगावाट क्षमता की कोरबा पश्चिम विस्तार तथा मड़वा, तेन्दूभाठा ताप विद्युत परियोजनाएं आगामी वित्ताीय वर्ष में पूर्ण कर ली जाएंगी। बेहतर कार्यकुशलता के कारण हमारे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप बिजलीघर ने 90 प्रतिशत पीएलएफ का कीर्तिमान बनाकर राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किया है। विद्युत वितरण प्रणाली में सुधार करके वितरण हानि को लगभग चार प्रतिशत कम करने में सफलता मिली है। किसानों को विगत वर्ष 20 हजार नए सिंचाई पम्प कनेक्शन दिए गए  थे, इस साल भी 20 हजार नए कनेक्शन देने का लक्ष्य है। सुदूर बसे 1500 गांवों को सौर ऊर्जा से रौशन किया गया है।
    उन्होंने जनता को बताया कि राज्य में पहली बार 400 के.वी. क्षमता की पारेषण प्रणाली स्थापित की जा रही है। जगदलपुर में 400 के.वी. का उपकेन्द्र स्थापित किया जा रहा है, जिससे बस्तर अंचल में निर्बाध बिजली पहुंचाई जा सकेगी। शहरी मोहल्लों व बस्तियों में विद्युतीकरण, लाइन विस्तार, बी.पी.एल. परिवारों को बिजली की सौगात जैसी सुविधाएं देने के लिए 'मुख्यमंत्री शहरी विद्युतीकरण योजना' शुरू की जाएगी। बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार और उत्ताम उपभोक्ता सेवा के कई उपाय किए जा रहे हैं। स्पॉट बिलिंग योजना शुरू की जाएगी तथा बिल की जानकारी एसएमएस से भी दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा प्रयास है कि 'नया रायपुर' में राज्य का नया मंत्रालय शीघ्र कार्य प्रारम्भ कर दे। इसके लिए कार्यों को तेजी से पूरा किया जा रहा है। नया रायपुर परियोजना में शामिल विभिन्न गांवों में नगरीय सुविधाएं विकसित कर समन्वित विकास किया जाएगा।  रायपुर में 1600 एकड़ में कमल विहार योजना का कार्य प्रारम्भ किया गया है। अवैध बसाहटों की रोकथाम, नियोजित विकास, पुराने शहरों के जीर्णोध्दार तथा गुणवत्ताापूर्ण नगरीय सेवाओं के विकास में यह योजना मील का पत्थर साबित होगी। पर्यटन स्थलों के विकास में निजी पूंजी निवेश बढ़ाने और उससे स्थानीय विकास को गति देने के लिए बहुस्तरीय प्रयास किए जा रहे हैं।
    उन्होंने अपने संदेश में बताया कि आवास क्रांति को नई ऊंचाई देने के लिए 'अटल विहार' योजना जिला-ब्लाक मुख्यालय तथा औद्योगिक क्षेत्र में प्रारम्भ की जा रही है, जिसके तहत एक लाख सुविधाजनक मकान बनाए जा रहे हैं। इसका लाभ कमजोर तबकों के लोगों और दूर-दराज के कर्मचारियों को भी मिलेगा। विरासत में मिले कमजोर अधोसंरचना वाले नगरों में सुधार का एक बड़ा अभियान हम चला रहे हैं। शहरों में अब खूबसूरत तालाब, पुष्पवाटिकाएं, खेल मैदान, प्रतीक्षा बस स्टैण्ड, गौरवपथ, प्रवेश द्वार, सामुदायिक भवन, अच्छी सड़कें, नालियां, सार्वजनिक प्रसाधन, व्यवस्थित हाट-बाजार जैसी सुविधाएं दिखाई देने लगी हैं। तंग बस्तियों में 'भागीरथी नल-जल योजना' लागू की गई है। डॉ. रमन सिंह ने जनता को बताया कि दो हजार वर्गफीट तक के आवासीय भूखंडों पर भवन अनुज्ञा जारी करने का अधिकार आर्किटेक्ट को देने का बड़ा कदम भी उठाया गया है। इससे छोटे भूखंडों पर घर बनाने वाले नगरवासियों को बड़ी राहत मिलेगी। 'ग्राम सुराज' के अनुभवों का लाभ नगरीय निकायों में भी दिलाने के लिए 'नगर सुराज' अभियान चलाया जाएगा। इससे विकास योजनाओं की स्थल पर समीक्षा, आवश्यकताओं का आकलन, स्थल पर निराकरण करने हेतु शासन-प्रशासन व समाज के सभी अंगों को संवेदनशील और जवाबदेह बनाया जाएगा। राज्य में अधोसंरचना विकास का अभियान जारी है। इस वर्ष दो हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण पूरा हो चुका है। 54 वृहद पुल बन चुके हैं, 177 का काम चालू 2279-33-150811है। छत्तीसगढ़ राज्य सड़क विकास परियोजना के अंतर्गत 984 किलोमीटर सड़कें बनाई जा चुकी हैं तथा 265 किलोमीटर सड़कों का कार्य जारी है। दो रेल्वे ओव्हर ब्रिज, तीन बायपास सड़कें पूरी हो चुकी हैं। छह ओव्हर ब्रिज तथा तीन बायपास सड़कें निर्माणाधीन हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में 18 हजार 906 किलोमीटर लम्बी सड़कें, 21 हजार 355 पुल-पुलिया बनाई जा चुकी हैं। इस योजना में शामिल नहीं हो पाने वाले अंचलों को भी अच्छी सड़कों से जोड़ने के लिए 'मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना' शुरू की गई है, जिसके तहत चार हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण लगभग दो हजार करोड़ रूपए की लागत से किया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य के प्रमुख आस्था केन्द्र गुरू बाबा घासीदास की कर्मभूमि गिरौदपुरी में भव्य जैतखाम का निर्माण कार्य इस वर्ष पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अनुसूचित जनजाति तथा अनुसूचित जाति के लोगों का जीवन स्तर उठाने में शिक्षण-प्रशिक्षण और प्रोत्साहनों की बड़ी भूमिका तय की गई है। छात्रावासी तथा आश्रमवासी छात्र-छात्राओं की शिष्यवृत्ति इस वर्ष 450 रूपए से बढ़ाकर 650 रूपए कर दी गई है। प्रतिभावान बच्चों को उत्कृष्ट आवासीय विद्यालयों में भर्ती कराया जा रहा है। राज्य तथा केन्द्रीय बोर्ड की परीक्षाओं में विशेष योग्यता हासिल करने वाले बच्चों को 10 हजार रूपए पुरस्कार स्वरूप देने की योजना से करीब एक हजार बच्चे लाभान्वित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते वर्ष हमने कक्षा बारहवीं में 80 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वाले बच्चों का चयन कर उन्हें राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के लिए ख्यातिनाम संस्थाओं में नि:शुल्क प्रशिक्षण दिलाने की योजना शुरू की थी। मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि हमारे बच्चों ने यह साबित किया है कि थोड़ा सहयोग मिलने पर वे अपनी प्रतिभा साबित करके दिखा सकते हैं। पहले ही साल 34 में से 14 बच्चों ने एनआईटी में प्रवेश लिया है। इसी तरह 'उत्कर्ष' योजना में दो बच्चे आईआईटी के लिए, 16 बच्चे एनआईटी के लिए और 54 बच्चे अन्य इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए चुने गए। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि नक्सली हिंसा के कारण जिन बच्चों का भविष्य अंधेरे से घिरने लगा था, उनकी राह रौशन करने का जिम्मा भी राज्य सरकार ने उठाया है। ऐसे बच्चों को आवासीय शिक्षा की सुविधा देने के लिए दंतेवाड़ा में 'आस्था' तथा राजनांदगांव में 'निष्ठा' योजना शुरू की गई है। दसवीं उत्तीर्ण  बच्चों को बड़ी कक्षाओं में पढ़ाने और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने हेतु रायपुर में 'प्रयास' योजना संचालित की जा रही है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने ऐसे व्यावहारिक उपायों पर जोर दिया है, जिससे वनों का संरक्षण भी हो और वनवासियों का जीवन-स्तर भी ऊंचा उठे।  तेन्दूपत्ता संग्रहण का पारिश्रमिक इस वर्ष 700 रूपए से बढ़ाकर  800 रूपए प्रति मानक बोरा कर दिया गया है, जिसके कारण संग्राहकों को 108 करोड़ रूपए का पारिश्रमिक दिया गया। विगत वर्ष तेन्दूपत्ता के व्यापार से मिले 138 करोड़ रूपए को भी बोनस के रूप में बांटा गया। वनोपज समितियों के क्षेत्रों में कार्यरत वनवासियों के प्रतिभावान बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए आकर्षक योजनाएं लागू की गई हैं।उन्होंने बताया कि कैम्पा के अंतर्गत 153 हेक्टेयर क्षेत्र में बॉटेनिकल गार्डन, 182 हेक्टयर क्षेत्र में जंगल सफारी, शहरों और बड़े कस्बों में ऑक्सीजोन बनाए जाएंगे। नदी-तटों पर वृक्षारोपण, शहरी वन योजना, सड़कों के किनारे एक हजार किलोमीटर से अधिक पथ वृक्षारोपण जैसे कार्य किए जाएंगे। प्रदेश के 425 वन ग्रामों में समग्र विकास के लिए 110 करोड़ रूपए की लागत से 9 हजार 360 कार्य कराए जा रहे हैं। पड़त भूमि, मेड़-बाड़ी पर बांस रोपण को प्रोत्साहित करने सात जिलों में बांस परिवहन अनुज्ञा-पत्र जारी करने का अधिकार ग्राम पंचायतों को दिया गया है।
    डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जरूरतमंद लोगों को महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का लाभ दिलाने हेतु व्यापक प्रबंध किए गए हैं। इसके कारण बीते वर्ष मचान्दुर तथा खैरवाही ग्राम पंचायतों को
प्रधानमंत्री के हाथों उत्कृष्ट ग्राम पंचायत का पुरस्कार मिला है। इस वर्ष दो हजार करोड़ रूपए का लेबर बजट रखा गया है। मजदूरी का भुगतान पारदर्शी ढंग से करने के लिए 58 लाख खाते बैंकों तथा डाक घरों में खोले गए हैं। 18 जिलों के 31 विकासखंडों में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन शुरू किया जा रहा है। राज्य कौशल विकास मिशन का गठन कर बड़े पैमाने पर रोजगारपरक प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। शासकीय वस्त्र प्रदाय योजना के तहत बीते एक वर्ष में 30 हजार बुनकरों से करीब 90 करोड़ रूपए की खरीदी की गई है। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को बेहतर आमदनी, स्वास्थ्य, शिक्षा, जीवनस्तर उन्नयन व सामाजिक सुरक्षा की विभिन्न सुविधाएं देने के लिए एक दर्जन योजनाएं शुरू की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि जनस्वास्थ्य के संस्थागत प्रयासों को बड़ी सफलता मिली है। जिला अस्पताल, पीएचसी, सीएचसी जैसी संस्थाएं अब राष्ट्रीय मानक के बराबर हो गई हैं। इनकी बेहतर कार्यप्रणाली से शिशु मृत्यु दर 79 प्रति हजार से घटकर 58, मातृ मृत्यु दर 47 प्रति हजार से घटकर 32, संस्थागत प्रसव दर 18 प्रतिशत से बढ़कर 53 प्रतिशत हो गई है। 'मुख्यमंत्री बाल हृदय संरक्षण', 'मुख्यमंत्री बाल श्रवण' जैसी अभिनव योजनाओं से करीब दो हजार बच्चों को नया जीवन और आत्मबल मिला है। '108 संजीवनी एक्सप्रेस एम्बुलेंस सेवा' दो जिलों में शुरू की गई थी, यह सुविधा इस साल  के अंत तक हर जिले में पहुंचा दी जाएगी।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में सक्रिय देशद्रोही ताकतों से लड़ने का हौसला हमें वहां की वनवासी जनता के सहयोग से मिला है। नक्सली हिंसा के कारण बहुत से लोगों ने अपने परिवार के मुखिया और परिजनों को खोया है। इस पृष्ठभूमि में नई पीढ़ी को संरक्षण देने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति का होना जरूरी है। उनकी रोजी-रोटी के अधिकार और वीरता को प्रोत्साहित करने के लिए हमने 'छत्तीसगढ़ सहायक सशस्त्र पुलिस बल' का गठन किया है। अनुसूचित जनजाति के युवाओं की पुलिस बल में भर्ती हेतु शारीरिक तथा शैक्षणिक मापदण्डों को शिथिल किया गया है। पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में सरकारी विभागों में स्थानीय लोगों की भर्ती सुनिश्चित करने के उपाय किए गए हैं ताकि संबंधित जिलों के स्थानीय युवाओं को भर्ती में पर्याप्त अवसर मिल सके। वनांचलों के समग्र विकास की योजनाओं को अमलीजामा पहनाने के लिए भी इन माटी पुत्रों की भागीदारी आवश्यक है। मुझे संतोष है कि हमारी ऐसी सोच और प्रयासों को सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ का समर्थन मिल रहा है। डॉ. रमन सिंह ने प्रदेशवासियों से राज्य के विकास में सहयोग का भी आव्हान किया।

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