सामाजिक समरसता देश की सबसे बड़ी ताकत : श्री लालकृष्ण आडवाणी
सिन्धु स्वाभिमान-2011 का शुभारंभ

देश के पूर्व उप-प्रधानमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि अनेकता में एकता पर आधारित हमारी भारतीय संस्कृति में अलग-अलग भाषाओं के बावजूद सामाजिक समरसता की भावना बहुत मजबूत है और यही हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत है। श्री आडवाणी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में सिन्धी समाज और सिन्धी भाषा का भी बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। सिन्धु घाटी सभ्यता भारत की एक अत्यंत प्राचीन सभ्यता के रूप में इतिहास में प्रसिध्द है। श्री आडवाणी आज यहां भारतीय सिन्धु सभा द्वारा आयोजित सिन्धु स्वाभिमान-2011 के अन्तर्गत दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए इस आशय के विचार व्यक्त किए। शुभारंभ समारोह की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने की। इस अवसर पर वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री राम जेठमलानी सहित छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष श्री धरमलाल कौशिक, लोक निर्माण मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल, लोकसभा सांसद श्री रमेश बैस, राज्य आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री लीलाराम भोजवानी, शदाणी दरबार रायपुर के संत श्री युधिष्ठिरलाल, हरिद्वार से आए संत श्री गंगादास साहेब, छत्तीसगढ़ सिन्धी पंचायत के प्रदेश अध्यक्ष श्री श्रीचंद सुन्दरानी और पूर्व विधायक श्री रमेश वर्ल्यानी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
मुख्य अतिथि की आसंदी से अपने उदबोधन में श्री लालकृष्ण आडवाणी ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दिनों को याद करते हुए कहा कि आजादी के बाद देश के विभाजन से सिन्ध प्रान्त पाकिस्तान में चला गया, लेकिन आज भी वह भावनात्मक रूप से हमारे साथ जुड़ा हुआ है। श्री आडवाणी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत में पीढ़ियों से निवास कर रहे सिन्धी समाज के लोगों ने अपनी भाषा और अपनी संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखने और उसके विकास के लिए अखिल भारतीय सिन्धु सभा का गठन किया है। यह उनकी सामाजिक एकता का परिचायक है। श्री आडवाणी ने कहा कि भारतीय संविधान में देश की विभिन्न भाषाओं की सूची में सिन्धी भाषा भी शामिल है। उन्होंने की राजधानी रायपुर स्थित शदाणी दरबार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह न सिर्फ छत्तीसगढ़ और न केवल भारत के बल्कि देश-विदेश के सिन्धी समाज के लोगों के लिए आस्था और श्रध्दा का बहुत बड़ा केन्द्र है। श्री आडवाणी ने दो दिवसीय सम्मेलन के आयोजन के लिए अखिल भारतीय सिन्धु सभा को बधाई दी और आयोजन की सफलता की कामना की। उन्होंने उम्मीद जतायी कि भारतीय सिन्धु सभा द्वारा आयोजित दो दिवसीय इस सम्मेलन के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों में निवासरत लोगों को एकसूत्र में जोड़ने का काम करेगा। श्री आडवाणी ने भारतीय सिन्धु सभा के संस्थापक स्वर्गीय श्री झम्मट मल वाधवानी को भी याद किया। जिनके प्रयासों से वर्ष 1989 में इस सस्था का गठन किया गया।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अध्यक्षीय आसंदी से समारोह को सम्बोधित करते हुए छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से श्री लालकृष्ण आडवाणी और श्री राम जेठमलानी का स्वागत किया। डॉ. सिंह ने कहा कि आज के इस राष्ट्रीय आयोजन में देश की दो महान हस्तियां हमारे बीच मौजूद हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और अपनी तपस्या के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। डॉ. सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के दौरान श्री आडवाणी जी देश के पूर्व उप-प्रधानमंत्री थे, जो राज्य निर्माण के साक्षी रहे हैं और राज्य निर्माण की प्रक्रिया में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के सहयोगी के रूप में उसमें उनका भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिन्धु समाज सामाजिक समरसता के साथ छत्तीसगढ़ वासियों के साथ घुल-मिलकर प्रदेश के विकास में सहभागी बना है। यह समाज छत्तीसगढ़ की संस्कृति में रच-बसकर पूरी तरह छत्तीसगढ़िया हो गया है। आयोजन की सफलता के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के दस वर्ष पूरे हो चुके हैं। विगत एक दशक में राज्य की जनता ने विकास के हर मोर्चे पर भारी सफलता हासिल की है। इस एक दशक की विकास यात्रा में लगभग तीन वर्ष पहले ही छत्तीसगढ़ ने देश के प्रथम और इकलौते विद्युत कटौती मुक्त राज्य के रूप में अपनी एक खास पहचान बनायी है। सकल घरेलू उत्पाद के मामले में वर्ष 2009-10 में 11.49 प्रतिशत विकास दर के साथ छत्तीसगढ़ पूरे देश में पहले नम्बर पर रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है और हमारे यहां कृषि विकास की दर 4.92 प्रतिशत तक पहुंच गयी है, जो गुजरात के बाद दूसरे नम्बर पर है। डॉ. रमन सिंह ने राज्य में हो रहे विकास का श्रेय प्रदेश की मेहनतकश जनता को दिया और कहा कि इसमें सिन्धु समाज का भी महत्वपूर्ण योगदान है।
इस अवसर पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री रामजेठमलानी ने समाज के लोगों से आव्हान किया कि वे देश के किसी भी कोने में रहें, अपनी भाषा, बोली एवं संस्कृति को न भूलें और सभी धर्मो का आदर करते हुए देश के विकास में मददगार बनें। इस अवसर पर आयोजन समिति के अध्यक्ष श्री डी.आर. बाधवानी सहित भारतीय सिन्धु सभा की छत्तीसगढ़ इकाई के अध्यक्ष श्री मुरलीधर माखीजा, शदाणी दरबार के संत श्री युधिष्ठिरलाल और हरिद्वार से संत गंगादास महाराज ने भी अपने विचार व्यक्त किए। समारोह में श्री आडवाणी ने सिन्धु स्वाभिमान-2011 की स्मारिका का विमोचन किया। इसके अलावा उन्होंने आयोजकों की ओर से अन्तर्राष्ट्रीय नृत्यांगना सुश्री अनिला सुन्दर चित्रकार, श्री हरि हींगोरानी एवं रायपुर की समाज सेवी संस्था बढ़ते कदम को सम्मानित किया।

