योजना बनाते समय राज्य की जरूरतों का ध्यान रखना जरूरी : मुख्यमंत्री
विकेन्द्रीकृत जिला योजना पर एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न
रायपुर, 31 अक्टूबर 2011

शासकीय योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे इस बात को ध्यान में रखकर योजनाएं बनाई जानी चाहिए। किसी भी क्षेत्र या राज्य की योजना वहां की जरूरतों पर आधारित होनी चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने उक्त आशय के उद्गार आज यहां विकेन्द्रीकृत जिला योजना पर आधारित कार्यशाला को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। कार्यशाला राज्य योजना मंडल, भारत शासन और यू.एन.डी.पी के सहयोग से आयोजित की गई।
मुख्यमंत्री डॉ सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ अद्भुत विविधताओं का प्रदेश है। यहां अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग संस्कृतियां हैं और प्रत्येक क्षेत्र की आवश्यकताएं भी पृथक-पृथक हैं।इन आवश्यकताओं के आधार पर ही योजना बनाई जानी चाहिए। उन्होने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक संसाधनों जंगल ,खनिज की प्रचुरता है जिस पर हमें गर्व भी है। किंतु विडंबना है कि देश को इतना अधिक कोयला, लौह अयस्क देने वाले इस प्रदेश में रेल और सड़क संपर्क का अनुपात राष्ट्रीय औसत से कम है। इन सब कारणों से प्रदेश के विकास में बाधा आती है। डॉ सिंह ने कहा कि इन सबके बावजूद छत्तीसगढ़ कई मामलों में आगे है। यहां के सार्वजनिक वितरण प्रणाली की प्रशंसा पूरे देश में हो रही है। हमारा लक्ष्य केरल और अन्य विकसित राज्यों की बराबरी करना है। इस दिशा में शुरूआत हो चुकी है। उन्होने कहा कि राज्य के क्षेत्रफल के आधार पर विकास के लिए सहायता दी जानी चाहिए न कि जनसंख्या के आधार पर। उन्होंने कहा कि योजनाओं को तैयार करते समय और क्रियान्वयन के समय सभी विभागों का समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों के लिए दीर्घ अवधि की योजना बनायी जानी चाहिए, जिससे सहस्त्राब्दी विकास के लक्ष्यों को हासिल किया जा सके।
यू.एन.डी.पी. की कन्ट्री डायरेक्टर सुश्री केटलिन विंजन ने प्रदेश के विकास की प्रशंसा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में मानव विकास सूचकांक मामले में प्रथम दस राज्यों में है। यहां अनेक अभिनव कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिसमें ग्रामीण इन्डेक्स कार्ड और शहरी इन्डेक्स कार्ड बनाने का कार्य शामिल है। इस कार्यक्रम के तहत महासमुंद जिले में सभी गांवों में कार्ड बनाए गए हैं। एक विशेष साफ्टवेयर के जरिए एक बटन दबाकर उस गांव के संसाधनों के बारे में पूरी जानकारी मिल जाती है। उन्होंने कहा कि यू.एन.डी.पी. के सहयोग से यहां क्षमता विकास कार्यक्रम चार जिलों में संचालित किए जा रहे हैं, जहां 88 से अधिक मास्टर ट्रेनरों को प्रशिक्षित किया गया है। उन्होंने योजना के निर्माण में महिलाओं की भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने कोरबा जिले में जेण्डर सब प्लान तैयार किए जाने की प्रशंसा की। कार्यशाला को राज्य योजना मंडल के उपाध्यक्ष श्री शिवराज सिंह, प्रमुख सचिव वित्त श्री अजय सिंह ने भी सम्बोधित किया।
कार्यक्रम में श्री एस.एस. मीनाक्षी सुंदरम पूर्व सचिव भारत शासन ने योजना और विकेन्द्रीकरण की आवश्यकता पर, श्री एस.एम. विजयानंद अतिरिक्त मुख्य सचिव केरल शासन ने 'केरल में विकेन्द्रीकरण' के अपने अनुभवों पर व्याख्यान दिया। कार्यशाला में मुख्य सचिव श्री पी.जॉय उम्मेन, राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी सहित सभी जिलों के कलेक्टर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत उपस्थित थे।

