राजधानी रायपुर में 'श्रीराम वन गमन पथ' पर होगी राष्ट्रीय संगोष्ठी: मुख्यमंत्री को संगोष्ठी के शुभारंभ का न्यौता
रायपुर, 04 नवम्बर 2010
मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम के वन गमन पथ को लेकर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बहुत जल्द एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को यहां उनके निवास पर छत्तीसगढ़ अस्मिता प्रतिष्ठान से संबंधित श्रीराम वन गमन पथ शोध दल के सदस्यों ने डॉ. मन्नूलाल यदु, श्री श्याम बैस और श्री राधाकृष्ण गुप्ता के नेतृत्व में मुलाकात कर इस संगोष्ठी की योजना की जानकारी दी और उन्हें इसमें मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने तथा कार्यक्रम के शुभारंभ के लिए आमंत्रित किया। सदस्यों ने मुख्यमंत्री को बताया कि श्रीराम वन गमन शोध-दल ने पिछले महीने की 17 तारीख को राजधानी रायपुर से रवाना होकर दक्षिण्ा भारत में सुदूर रामेश्वरम तक यात्रा की। शोध दल के सदस्य वहां जलाभिषेक कर रामेश्वरम से प्राचीन सेतु का पवित्र पत्थर लेकर 29 तारीख को रायपुर लौट आए। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि छत्तीसगढ़ के उत्तर में सुदूर कोरिया और सरगुजा जिले से लेकर दक्षिण में बस्तर अंचल और उससे आगे दक्षिण के राज्यों से होकर भगवान श्रीराम के वन गमन पथ का संकेत मिलता है। शोध दल ने रामेश्वरम से 16 किलोमीटर दूर धनुषकोटि का भी दौरा किया। इस मार्ग पर उन्हाेंने मण्डपम नामक स्थान पर भी कुछ देर के लिए अपना पड़ाव डाला, जहां भगवान श्रीराम की सेना समुद्र पार करने के लिए कुछ समय तक रूकी थी। धनुषकोटि में उनकी वानर सेना ने सेतु का निर्माण किया था। शोध दल ने उन सभी स्थलों का अवलोकन किया, जहां वर्ष 2004 के दिसम्बर में सुनामी का प्रकोप हुआ था। सुनामी की वजह से समुद्र लगभग 25 किलोमीटर आगे बढ़ गया है। इस कारण वहां के संबंधित कुछ अवशेष विलुप्त भी हो गए हैं। मुख्यमंत्री ने शोध दल के सदस्यों द्वारा श्रीराम वन गमन पथ के अनुसंधान के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा करते हुए उन्हें इस महत्वपूर्ण यात्रा के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर शोध दल के सदस्य, इतिहासकार डॉ. हेमू यदु और साहित्यकार श्री अमरनाथ त्यागी भी उपस्थित थे।
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