खनिजों के अवैध परिवहन और उत्खनन रोकने कम्प्यूटरीकृत व्यवस्था लागू की जाएगी :मुख्यमंत्री ने खनिज विभाग के अधिकारियों को दिए निर्देश
खनिज विभाग की समीक्षा बैठक सम्पन्न
रायपुर, 17 नवम्बर 2011

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रदेश के खनिजों के अवैध खनन और परिवहन को रोकने के लिए आधुनिकतम तकनीक, जी.पी.एस. प्रणाली का उपयोग करने के निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए ऐसी पुख्ता व्यवस्था करने के निर्देश दिए, जो पूरे देश के लिए मॉडल बन सके। उन्होंने कहा कि ट्रॉजिट पास जारी करने की कम्प्यूटरीकृत व्यवस्था की जानी चाहिए, जिससे अवैध परिवहन के मामलों में रोक लगेगी। डॉ सिंह ने उक्त निर्देश गत दिवस मंत्रालय में खनिज साधन विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को दिए। मंत्रालय में संपन्न बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री गौरी शंकर अग्रवाल, राज्य योजना मंडल के उपाध्यक्ष श्री शिवराज सिंह, मुख्य सचिव श्री पी. जॉय. उम्मेन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि राज्य के खनिज राजस्व में लगातार वृध्दि हो रही है। वर्ष 2003-04 में राज्य को 637 करोड़ रूपए खनिज राजस्व प्राप्त हुआ था, जो वर्ष 2010-11 में बढ़कर 2461.46 करोड़ रूपए हो गया। वर्ष 2011-12 के लिए 2700 करोड़ रूपए का खनिज राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य रखा गया है, इसमें से अगस्त तक 1327 करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त हो चुका है, जो पूर्व वर्ष की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक है। राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में खनन का योगदान 9.1 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा
2.5 प्रतिशत है। वर्ष 2007-08 में लौह अयस्क में 52.80 करोड़ की रायल्टी की तुलना में वर्ष 2010-11 में 1031 करोड़ की रायल्टी प्राप्त हुई। अधिकारियों ने बताया कि खनिजों के अवैध खनन परिवहन और भण्डार की प्रभावी रोकथाम के लिए प्रमुख मार्गों पर 45 खनिज जांच चौकी लगायी गयी है। कोयला धारित क्षेत्रों में महत्वपूर्ण मार्गों में स्थित जांच चौकियों में इलेक्ट्रॉनिक रोडवे ब्रिज लगाए गए हैं। राज्य और जिला स्तर पर खनिज, पुलिस, परिवहन, वन और राजस्व विभागों के अधिकारियों को शामिल कर टास्कफोर्स बनाया गया है, जिसके द्वारा अवैध खनिज परिवहन के नियंत्रण की कार्रवाई की जाती है। बैठक में आगामी वर्ष की कार्ययोजना के संबंध में बताया गया कि कांकेर, नारायणपुर और बस्तर जिलों के अधिसूचित क्षेत्रों में लौह अयस्क के भण्डारण के आंकलन के लिए सर्वेक्षण किया जाएगा। सरगुजा के दो स्थानों में कोयला खनिज के लिए और रायपुर जिले के अधिसूचित क्षेत्र में मैगनिज खनिज के लिए सर्वेक्षण किया जाएगा।
इसके अलावा रायपुर, राजनांदगांव, बस्तर और दंतेवाड़ा जिलों में चूना-पत्थर भण्डारों के लिए, जांजगीर-चाम्पा जिले में डोलोमाइट के लिए और कांकेर, बस्तर और दंतेवाड़ा जिलों में विभिन्न रंगों के ग्रेनाईट के लिए सर्वेक्षण किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार जिला मंत्रालय द्वारा छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम को पांच कोल ब्लॉक आवंटित किए गए हैं। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2003 से 2010-11 तक 277 करोड़ से अधिक की राशि पंचायतों को सूदृढ़ीकरण के लिए दिए गए है। एक अप्रैल 2006 से रेत के उत्खनन और व्यवसाय के सम्पूर्ण अधिकार पंचायतों और नगरीय निकायों को दिए गए हैं। बैठक में प्रमुख सचिव आवास एवं पर्यावरण् श्री एन. बैजेन्द्र कुमार, सचिव खनिज श्री विजयेन्द्र, सचिव ऊर्जा श्री अमन सिंह, विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी श्री विक्रम सिसोदिया सहित खनिज विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
क्रमांक- 3702/हर्षा

