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मुख्यमंत्री के निर्देश पर मलेरिया की रोकथाम के लिए प्रभावित गांवों में विशेष चिकित्सा शिविर

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बीमारी की रोकथाम के हर संभव उपाय : स्थिति अब नियंत्रण में

रायपुर, 15 नवम्बर 2010

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मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य के राजनांदगांव जिले में मलेरिया के प्रकोप की सूचनाओं को गंभीरता से लिया है। उन्होंने जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों का सघन दौरा करने और वहां मलेरिया पीड़ितों के इलाज की समुचित व्यवस्था सहित बीमारी की रोकथाम के हर संभव उपाय करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने आज रात यहां अपने निवास पर आयोजित राजनांदगांव के विकास कार्यो की समीक्षा बैठक में वहां के कलेक्टर श्री सिध्दार्थ कोमल परदेशी से जिले में मलेरिया की स्थिति के बारे में भी जानकारी ली डॉ. रमन सिंह ने राजनांदगांव कलेक्टर को प्रभावित गांवों में विशेष चिकित्सा शिविर लगाने के भी निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रभावित गांवों सहित जिले के सभी क्षेत्रों में सतर्कता की दृष्टि से मच्छर नाशक रसायन डी.डी.टी. इत्यादि का भी छिड़काव कराया जाए।
     मुख्यमंत्री के निर्देश पर राजनांदगांव कलेक्टर ने आज सवेरे जिले के मोहला विकासखण्ड के मलेरिया प्रभावित गांव गोटाटोला, शेरपार, बीरसिंग टोला और कुम्हली का दौरा किया। उन्होंने गोटाटोला के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सहित शेरपार, कुम्हली तथा बीरसिंग टोला में लगाए गए विशेष चिकित्सा शिविरों का भी निरीक्षण किया। इन शिविर में मरीजों के नि:शुल्क इलाज के साथ-साथ उनके लिए चाय, नाश्ता और नि:शुल्क भोजन की व्यवस्था करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए गए हैं। जिले के मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.के. सक्सेना और जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी भी कलेक्टर के साथ थे।
    उधर बस्तर (जगदलपुर) जिले में भी प्रशासन द्वारा मलेरिया से जन-जीवन की सुरक्षा के लिए गांवों का सघन सर्वेक्षण कराया जा रहा है। हालांकि बस्तर जिले में मलेरिया का प्रकोप नहीं हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा पूरी सतर्कता बरती जा रही है। वहां के मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अब्दुल रसीद ने बताया कि रेपीड फीवर सर्वे के लिए प्रत्येक विकासखण्ड के मलेरिया की दृष्टि से संवेदनशील समझे जाने वाले 881 गांवों में मच्छर नाशक रसायन का छिड़काव दो चक्रों में किया जा चुका है। सभी गांवों के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और मितानिनों को मलेरिया के इलाज और बीमारी के बचाव के लिए पर्याप्त मात्रा में जीवन रक्षक दवाई भी उपलब्ध करा दी गयी हैं।
    उल्लेखनीय है कि मलेरिया की शिकायत मिलते ही जिला प्रशासन द्वारा कुम्हली, शेरपार, मुच्चर, बीरसिंग टोला और मुकादाह में डॉक्टरों तथा पैरामेडिकल कर्मचारियों की टीम भेजी गयी, जिनके द्वारा इन गांवों में शिविर लगाकर बुखार और मलेरिया पीड़ितों का इलाज किया जा रहा है। इन गांवों के 42 मरीजों को राजनांदगांव के शासकीय जिला अस्पताल और 15 मरीजों को पड़ोसी दुर्ग जिले के दल्लीराजहरा स्थित शहीद अस्पताल में इलाज के लिए दाखिल कराया गया है। कलेक्टर ने बताया कि इन गांवों में स्थिति फिलहाल पूरी तरह नियंत्रण में हैं। सभी प्रभावित गांवों में बुखार और मलेरिया के इलाज के लिए रक्त परीक्षण तथा जरूरी दवाईयों की पर्याप्त व्यवस्था की गयी है। स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर बुखार पीड़ितों का पता लगा रहे हैं। ग्रामीणों में जागरूकता लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से पर्चे भी बांटे जा रहे हैं। कलेक्टर ने कुम्हली के दो ग्रामीणों के घर पहुंचकर उनके परिवार के लोगों के स्वास्थ्य की भी जानकारी ली।

    क्रमांक-3748/स्वराज्य
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