जन समस्या निवारण शिविरों के लिए बनेगी चार महीने की विशेष कार्ययोजना : मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश
जन शिकायतों का निराकरण तत्परता से करें अधिकारी : डॉ. रमन सिंह
रायपुर 22 नवम्बर 2011
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने जिला कलेक्टरों को जनसमस्या निवारण शिविरों के आयोजन के लिए अगले चार माह की विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि हितग्राही मूलक योजनाओं में अधिक से अधिक संख्या में हितग्राहियों को तत्परता से लाभ पहुंचाने का प्रयास होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा है कि इन विशेष जन समस्या निवारण शिविरों में संबंधित जिलों के प्रभारी मंत्रियों सहित सांसदों, विधायकों, जिला पंचायत अध्यक्षों और जनपद पंचायतों अध्यक्षों को भी आमंत्रित किया जाए। डॉ. सिंह ने कल यहां मंत्रालय में आयोजित कलेक्टर्स कॉन्फ्रेन्स में कहा कि इन शिविरों में संबंधित जिलों के प्रभारी सचिव भी शामिल होंगे। कलेक्टर इन शिविरों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे। उल्लेखनीय है कि राज्य शासन के जनशिकायत निवारण विभाग द्वारा प्रत्येक जिले में हर महीने कम से कम दो जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण्ा शिविरों का आयोजन करने और आवेदन पत्रों का निराकरण यथा संभव शिविर स्थल पर ही करने के निर्देश भी पहले ही दिए जा चुके हैं। चालू कैलेण्डर वर्ष 2011 में माह जनवरी से अक्टूबर तक सभी 18 जिलों में कुल 191 शिविर लगाए गए, जिनमें 77 हजार 710 आवेदन प्राप्त हुए इनमें से 67 हजार 696 का निराकरण किया जा चुका है। लगभग दस हजार आवेदन लंबित हैं।
विभिन्न स्तरों पर लंबित जनशिकायतों के निराकरण की ताजा स्थिति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कलेक्टर्स कॉन्फ्रेन्स मेंं कहा कि राष्ट्रपति प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, राज्य मानव अधिकार आयोग, राष्ट्रीय एवं राज्य अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग, महिला आयोग जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं को मिलने वाले आवेदन निराकरण के लिए राज्य सरकार के माध्यम से संबंधित विभागों और कलेक्टरों भेजे जाते हैं। उनके निराकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कलेक्टरों को प्रत्येक 15 दिन में इसकी समीक्षा और मॉनिटरिंग भी करनी चाहिए। सांसदों और विधायकों के माध्यम से भी जनता के कई आवेदन प्राप्त होते हैं। उन्हें भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आवेदन पत्रों को किसी भी स्थिति में अनिर्णित अथवा लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। नियम-कानून और प्रक्रिया के अन्तर्गत जिन आवेदनों का निराकरण हो सकता है, उनके निपटारे की कार्रवाई तत्परता से की जानी चाहिए। आवेदनों पर अंतिम रूप से कोई निर्णय नहीं लिए जाने तक उन्हें निराकृत नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि ऐसे आवेदन जिनका निराकरण नियमों के तहत संभव नहीं है, उनके बारे में आवेदकों को संतोषजनक कारण सहित सूचित कर दिया जाना चाहिए। अधिकारियों को चाहिए कि वे सभी आवेदकों को उनके आवेदनों के बारे में मौके पर ही संतोषजनक मार्गदर्शन दें और उन्हें संतुष्ट करने का प्रयास करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आवेदन पत्रों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लेने और उनके बारे में आवेदकों को और जिन कार्यालयों से आवेदन प्राप्त हुए हैं, उन्हें वस्तुस्थिति के बारे में समय पर सूचित नहीं किए जाने के कारण लोगों में भ्रांतियां फैलती हैं और आवेदक अपनी अर्जियों को लेकर इधर-उधर परेशान होते रहते हैं। इसलिए सभी आवेदनों पर की गयी निराकरण की कार्रवाई की जानकारी संबंधितों को अनिवार्य रूप से दी जाए। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों से कहा कि वे कलेक्टोरेट में स्वयं जनशिकायतों के निराकरण की निगरानी करें। कार्य में सुविधा की दृष्टि से प्रत्येक कलेक्टोरेट में किसी वरिष्ठ अधिकारी को जनशिकायत निवारण प्रकोष्ठ का प्रभारी भी बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को आम जनता के लिए हमेशा उपलब्ध रहने और पूरी संवेदनशीलता के साथ लोगों की सुनवाई करने के निर्देश दिए। बैठक में जनशिकायतों के निराकरण के लिए मंत्रालय से लेकर प्रत्येक कलेक्टोरेट तक विकसित की गयी वीडियो कॉन्फ्रेसिंग प्रणाली की भी समीक्षा की गयी। इस प्रणाली में शिकायतकर्ता की उपस्थिति में ही शिकायत के निराकरण का प्रयास किया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को भी वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के निर्धारित दिवस पर कलेक्टोरेट में उपस्थित रहने के निर्देश दिए जाएं।
कलेक्टर्स कॉन्फ्रेन्स के प्रथम सत्र में मुख्य सचिव श्री पी. जॉय उम्मेन, अपर मुख्य सचिव श्री सुनिल कुमार, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री एन. बैजेन्द्र कुमार, प्रमुख सचिव पंचायत और ग्रामीण विकास तथा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति श्री विवेक ढांड, प्रमुख सचिव राजस्व एवं लोक निर्माण श्री एम.के. राउत, प्रमुख सचिव एवं कृषि उत्पादन आयुक्त श्री डी.एस.मिश्रा, सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री आर.एस.विश्वकर्मा, सचिव आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास श्री मनोज पिंगुआ सभी राजस्व संभागों के कमिश्नर और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

