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छत्तीसगढ़ के विकास में सिक्ख समाज का भी महत्वपूर्ण योगदान: डॉ. रमन सिंह

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When Apr 04, 2011
from 03:40 PM to 03:40 PM
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मुख्यमंत्री ने ‘बैशाखी दी रात’ में शामिल होकर दी बधाई

रायपुर, 04 अप्रैल 2011

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि सिक्ख समाज ने भी छत्तीसगढ़ की माटी में रच-बस कर अन्य समाजों के साथ प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। देश और स्वाभिमान की रक्षा के लिए सिक्ख समाज के गुरुओं ने जो बलिदान दिया है, इतिहास उसका गवाह है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु 49-040411गोविंद सिंह ने 13 अप्रैल सन् 1699 में खालसा पंथ की स्थापना की थी। समाज के लोगों ने गुरुओं द्वारा स्थापित धर्म रक्षा, देश और समाज की रक्षा तथा आत्म बलिदान की गौरवशाली परम्परा का बखूबी निर्वाह करते हुए दुनिया के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री ने कल रात यहां छत्तीसगढ़ सिक्ख फोरम द्वारा आयोजित ‘बैशाखी दी रात’ एवं ‘सांस्कृतिक संध्या’ कार्यक्रम में इस आशय के विचार व्यक्त किए।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सिक्ख समाज सहित सभी लोगों को बैशाखी और नवरात्रि की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारतीय टीम द्वारा क्रिकेट का विश्व जीतने से बैशाखी की खुशियां दोगुनी हो गयी हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना तथा व्यापार और वाणिज्य सहित विभिन्न क्षेत्रों में समाज के लोगों ने उल्लेखनीय प्रगति की है। लोकसभा सांसद श्री रमेश बैस ने सभी लोगों को बैशाखी की बधाई देते हुए इस बात पर प्रसन्नता जाहिर की कि छत्तीसगढ़ सिक्ख फोरम की स्थापना द्वारा समाज को एकजुट करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि सामाजिक-धार्मिक कार्यों में यह नवगठित संस्था अपनी अग्रणी और प्रभावशाली भूमिका निभाएगी।
छत्तीसगढ़ सिक्ख फोरम के अध्यक्ष श्री जगजीत सिंह अरोड़ा ने संस्था के इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दो माह पहले छत्तीसगढ़ के सिक्ख समाज को जोड़ने के उद्देश्य से फोरम की स्थापना की गयी है। विधायक द्वय श्री गुरुमुख सिंह होरा और श्री कुलदीप जुनेजा, रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री सुनील सोनी, छत्तीसगढ़ सिक्ख फोरम के संयोजक श्री बलदेव सिंह भाटिया और महिला विंग की अध्यक्ष श्रीमती परमजीत जुनेजा सहित समाज के अनेक पदाधिकारी और सदस्य बड़ी संख्या में इस अवसर पर उपस्थित थे। इस अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या के कार्यक्रम में अनेक प्रसिद्ध कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में अतिथियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।

क्रमांक-49/सोलंकी




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