बारहमासी सड़क नेटवर्क विस्तार के लिए मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना का प्रस्ताव
छह वर्षीय कार्य योजना : मुख्यमंत्री ने दी सैध्दांतिक सहमति
रायपुर, 19 जनवरी 2011

ग्रामीण क्षेत्रों में बारहमासी सड़कों के नेटवर्क के विकास और विस्तार के लिए छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना शुरू करने की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के समक्ष आज यहां मंत्रालय में पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग की ओर से इस प्रस्तावित कार्य योजना के बारे में कम्प्यूटर आधारित प्रस्तुतिकरण दिया गया। विभाग के मंत्री श्री रामविचार नेताम, राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष श्री शिवराज सिंह, प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव श्री पी.जॉय उम्मेन और अपर मुख्य सचिव श्री सरजियस मिंज, वित्त विभाग के सचिव श्री आर.एस. विश्वकर्मा सहित संबंधित वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।
विभागीय अधिकारियों ने मुख्यमंत्री कों बताया कि प्रदेश की ऐसी साढ़े पांच हजार से अधिक ग्रामीण बसाहटों को, जिन्हें वर्तमान में किसी भी योजना में सड़कों से जोड़ने का प्रावधान नहीं है, उनको मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना में शामिल करने के लिए छह वर्षीय कार्ययोजना प्रस्तावित की गयी है, जिसका प्राक्कलन तीन हजार 250 करोड़ रूपए अनुमानित है। इस कार्य योजना में आठ हजार 555 किलोमीटर सड़कों के निर्माण का प्रस्ताव है। इसके अन्तर्गत दो प्रकार की बसाहटों को सड़कों से जोड़ने का लक्ष्य है। इनमें 250 से 499 तक जनसंख्या वाली 913 बसाहटें और 250 से कम आबादी की चार हजार 690 बसाहटें शामिल हैं। इन दोनों प्रकार की बसाहटों के लिए वित्तीय वर्ष 2011-12 से वर्ष 2016-17 तक आठ हजार 555 किलोमीटर की कुल तीन हजार 914 सड़कों के निर्माण का प्रस्ताव है। इसके लिए वर्षवार लक्ष्य भी प्रस्तावित किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने प्रस्तुतिकरण देखने के बाद इस प्राक्कलन को सैध्दांतिक सहमति प्रदान कर दी। उन्होंने विभाग को इसके क्रियान्वयन के लिए ग्रामीण यांत्रिकी सेवा को एजेंसी के रूप में अधिकृत करने तथा पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए। प्राक्कलन पर चर्चा के बाद यह भी तय किया गया कि कार्ययोजना पर अमल के लिए प्रथम तीन वर्ष में साढ़े चार हजार किलोमीटर सड़कों के निर्माण के लिए आगे की कार्रवाई जल्द शुरू की जाए। वर्षवार प्रस्तावित लक्ष्यों के अनुसार वर्ष 2011-12 में एक हजार किलोमीटर, वर्ष 2012-13 में एक हजार 500 किलोमीटर, वर्ष 2013-14 में दो हजार किलोमीटर, वर्ष 2014-15 में एक हजार 500 किलोमीटर, वर्ष 2015-16 में भी एक हजार 500 किलोमीटर और वर्ष 2016-17 में एक हजार 055 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जाना है। इन पर वर्ष 2011-12 में 380 करोड़ रूपए, वर्ष 2012-13 में 570 करोड़, वर्ष 2013-14 में 760 करोड़, वर्ष 2014-15 में 570 करोड़, वर्ष 2015-16 में 570 करोड़ और वर्ष 2016-17 में 400 करोड़ रूपए की लागत अनुमानित है।
बैठक में बताया गया कि सभी जिलों में कलेक्टरों की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समन्वय समिति का गठन किया जाएगा। समिति में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन अभियंता सदस्य सचिव होंगे। उनके अलावा जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, वन मंडलाधिकारी, लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता और जिले के खनिज अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे। कलेक्टर द्वारा आवश्यकता के अनुसार अन्य जिला अधिकारियों को भी समिति में आमंत्रित किया जा सकेगा। कार्ययोजना में प्रस्तावित कार्यों का चयन ग्राम सभाओं के माध्यम से किए जाने और उन्हें जिला योजना समितियों से अनुमोदित कराने का भी प्रावधान रहेगा। जिला योजना समितियों द्वारा अनुमोदित कार्यों का अनुमोदन मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति द्वारा किया जाएगा। प्रस्तावित सड़कों का निर्माण प्रत्येक विकासखंड की कुल सड़कों के क्लस्टर बनाकर किया जाएगा।

