राष्ट्रीय मूल्यों को बचाने प्रशासन में नवीन कार्य शैली की जरूरत : डॉ. रमन सिंह
मुख्यमंत्री ने किया 'प्रशासन में नवाचार' पर वृत्त चित्रों का लोकार्पण
रायपुर, 16 फरवरी 2011

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने देश में सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्यों में आ रही गिरावट पर गहरी चिंता प्रकट की है। उन्होने कहा है कि हमें सत्य, अहिंसा और सामाजिक समरसता जैसे अपने राष्ट्रीय मूल्यों और आदर्शो को बचाने तथा सुराज और सुशासन की स्थापना के लिए आम जनता को विश्वास में लेकर काम करने की जरूरत है, ताकि इसके जरिए प्रशासन तंत्र में नवीन कार्य-शैली विकसित की जा सके। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रेरक विचारों को अपनाकर प्रशासन में गांधीवादी और मानवतावादी कार्यशैली के जरिए यह कार्य आसानी से किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ सरकार अपनी जन-कल्याणकारी नीतियों और योजनाओं के माध्यम से इसी दिशा में काम रही है।
मुख्यमंत्री ने आज सवेरे यहां अपने निवास पर 'प्रशासन में नवाचार' विषय पर निर्मित चार अलग-अलग वृत्त चित्रों की सी.डी. का लोकार्पण करते हुए इस आशय के विचार व्यक्त किए। डॉ. सिंह ने इन वृत्त चित्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि शासकीय नीतियों, नियमों और निर्देशों के अनुरूप जन-सेवा के कार्य करना सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों का बुनियादी कर्तव्य है। उन्हें अपने दायित्वों के निर्वहन के दौरान शासकीय सेवा की इस मूल भावना को ध्यान में रखकर प्रशासन में नवाचार के लिए सूझ-बूझ और कल्पनाशीलता से काम करना चाहिए। महिला और बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री सुश्री लता उसेण्डी और अध्यक्ष जिला पंचायत रायपुर श्रीमती लक्ष्मी वर्मा सहित बड़ी संख्या में प्रबुध्दजन इस अवसर पर उपस्थित थे। मुख्यमंत्री और आमंत्रितों के समक्ष इस मौके पर 'सेवा सदन' वृत्त चित्र का प्रदर्शन भी किया गया।
लोकार्पण के सादगीपूर्ण और संक्षिप्त समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरणा लेकर छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में नशा मुक्त समाज निर्माण के लिए सार्थक पहल शुरू कर दी है। इसी कड़ी में हाल ही में यह निर्णय लिया गया है कि दो हजार तक जनसंख्या वाले गांवों में अब आगामी वित्तीय वर्ष याने कि एक अप्रैल से शराब की दुकाने नहीं खोली जाएंगी। यह भी प्रशासन में नवाचार की दिशा में राज्य शासन का एक नया प्रयोग है। मुख्यमंत्री द्वारा लोकार्पित इन वृत्त चित्रों में बस्तर जिले के मुख्यालय जगदलपुर स्थित कलेक्टोरेट का नामकरण गांधी जी के सिध्दांतों के अनुरूप 'सेवा सदन' किए जाने की पृष्ठ भूमि पर निर्मित वृत्त चित्र भी शामिल है। उन्होंने इसके अलावा बाल विवाह की रोकथाम और सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान पर राजनांदगांव पैटर्न को लेकर निर्मित वृत्त चित्रों के साथ-साथ शहर सौन्दर्यीकरण के जगदलपुर (बस्तर) पैटर्न पर निर्मित वृत्त चित्र का भी लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि शासकीय नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन में जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कई जिलों में प्रशासनिक नवाचार के तहत कई ऐसे प्रयोग भी होते हैं, जो अन्य जिलों के लिए भी अनुकरणीय हो सकते हैं।
डॉ. रमन सिंह ने इन चारों वृत्त चित्रों में बस्तर और राजनांदगावं जिलों के तत्कालीन कलेक्टर श्री गणेश शंकर मिश्रा द्वारा राज्य शासन की भावना के अनुरूप वहां प्रशासनिक सुधार के लिए जन-सहयोग से किए गए कार्यो का भी उल्लेख किया। श्री मिश्रा वर्तमान में प्रदेश सरकार के सचिव वाणिज्यिक कर और आबकारी आयुक्त के पद पर कार्यरत हैं। मुख्यमंत्री ने चारों वृत्त चित्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रशासन में नवाचार के लिए बस्तर और राजनांदगांव जिलों में हुए कार्य प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी उदाहरण बन सकते हैं। प्रशासनिक अधिकारियों की सूझ-बूझ और कल्पनाशीलता से ऐसे रचनात्मक कार्य सभी जिलों में हो सकते हैं। अधिकारियों को इसके लिए पहल करनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वास्तव में शासकीय नीतियों के अनुरूप जनहित में लिए जाने वाले किसी भी फैसले पर तत्परता से अमल करना प्रशासन तंत्र के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होता है। लोगों की मानसिकता में बदलाव धीरे-धीरे आता है, लेकिन जनता को विश्वास में लेकर किए जाने वाले कार्यो को सफलता जरूर मिलती है। इन वृत्त चित्रों का मुख्य संदेश भी यही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन प्रशासन द्वारा लोकहित में संचालित योजनाओं की कामयाबी के लिए उनमें व्यापक जनभागीदारी का होना भी बहुत जरूरी है।
डॉ. रमन सिंह ने 'सेवा सदन' वृत्त चित्र का उल्लेख करते हुए कहा कि जगदलपुर कलेक्टोरेट को 'सेवा सदन' में तब्दील करने की अनोखी पहल को राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के लोगों ने वहां आकर देखा है और तारीफ की है। डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि वहां के कलेक्टोरेट में कर्मचारियों और अधिकारियों द्वारा प्रतिदिन कार्य शुरू करने से पहले गांधी जी के प्रिय भजन 'वैष्णव जन तो तेने कहिए-जे पीर पराई जाने रे' को सुनना और उससे दोहराना एक अदभुत प्रयोग है। इस प्रकार की प्रार्थना से व्यक्ति के हृदय में एक अलग तरह की पवित्र भावना जाग्रत होती है और उसे आंतरिक सुख और शांति मिलती है। आचरण और कार्यशैली में भी सुधार आता है, जिसका सकारात्मक प्रभाव शासकीय काम-काज में भी होता है। उन्होंने कहा कि इसी तरह जगदलपुर शहर का सौन्दर्यीकरण भी आम जनता की सहमति और जन-सहयोग से किया गया। दोनों जिलों में सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत गांवों में लोगों के घरों में शासकीय अनुदान पर पक्के शौचालय निर्माण की दिशा में किए गए प्रयासों को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। कई ग्राम पंचायतों को निर्मल ग्राम पुरस्कार से नवाजा गया।
लोकार्पण समारोह में श्री गणेश शंकर मिश्रा ने चारों वृत्त चित्रों की पृष्ठ भूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को जिला प्रशासन प्रमुख के रूप में राज्य सरकार की नीतियों के अनुरूप योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए काम करने की प्रेरणा दी है। मुख्यमंत्री की प्रेरणा से ही नव रात्रि के दौरान राजनांदगांव जिले में बम्लेश्वरी माता के मंदिर (डोंगरगढ़) और बस्तर संभाग में दंतेवाड़ा के दंतेश्वरी मंदिर के वार्षिक मेलों में हजारों-लाखों की संख्या में आने-जाने वाले तीर्थ यात्रियों को प्रशासन द्वारा बेहतर से बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं। इन मेलों में योजनाबध्द यातायात प्रबंधन के फलस्वरूप सड़क हादसों में भी काफी कमी आयी है। श्री मिश्रा ने बताया कि बस्तर (जगदलपुर) कलेक्टोरेट को सेवा सदन का नाम देकर वहां दैनिक काम-काज शुरू होने से पहले प्रतिदिन सवेरे 10.30 बजे प्रार्थना सभा की परम्परा शुरू की गयी और इसमें कलेक्टर सहित सभी चार सौ से ज्यादा अधिकारी और कर्मचारी एक साथ बैठकर गांधी जी के प्रिय भजन 'वैष्णव जन तो तेने कहिए-जे पीर पराई जाने रे' को सुनना और दोहराना शुरू किया। वहां इसके लिए वार्षिक रोस्टर भी बनाया गया है। इस रोस्टर के अनुसार प्रतिदिन इस प्रार्थना सभा से पहले तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के तैल-चित्र पर माल्यार्पण भी करते हैं। इस मिश्रा ने बताया कि वहां कलेक्टोरेट के तीनों प्रमुख प्रवेश द्वारों का नामकरण महात्मा गांधी के एकादश व्रत के तीन सूत्रों- सत्य, अहिंसा और अपरिग्रह के नाम से किया। कलेक्टोरेट की ओर जाने वाली सड़क का नामकरण कस्तूरबा मार्ग और कलेक्टर कार्यालय के पहुंचमार्ग का नामकरण 'सत्य पथ' किया गया। छत्तीसगढ़ का राजनांदगांव जिला देश का पहला ऐसा जिला है, जहां बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को दूर करने के लिए स्थानीय समाज और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से विशेष जन-जागरण अभियान चलाया गया। सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत राजनांदगांव और बस्तर जिलों में अनेक ग्राम पंचायतों को भारत सरकार के प्रतिष्ठित निर्मल ग्राम पुरस्कार से भी सम्मानित होने का अवसर मिला।

