'सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं' : डॉ. रमन सिंह
मुख्यमंत्री ने बाल स्मृति-एक सृजन छाया प्रदर्शनी का अवलोकन किया
रायपुर, 11 मार्च 2011

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज रात यहां महंत घासीदास संग्रहालय परिसर में यूनिसेफ द्वारा आदिवासी बहुल बस्तर संभाग के नक्सल हिंसा पीड़ित स्कूली बच्चों की चित्रकला प्रदर्शनी का अवलोकन किया। संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था यूनीसेफ द्वारा यह दो दिवसीय प्रदर्शनी आयोजित की गयी है। आज इसका पहला दिन था। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर इन बच्चों के हाथों निर्मित चित्रों की प्रशंसा की और उनका हौसला बढ़ाया। डॉ. सिंह ने इस अवसर पर लोगों को सम्बोधित करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर अंचल बहुत जल्द नक्स
ल हिंसा और आतंक से मुक्त होगा। वहां एक बार फिर शांति और खुशहाली का वातावरण बनेगा। तब वहां फिर से ढोल एवं मांदर की थाप गूंजने लगेगी। मुख्यमंत्री ने छायाचित्र प्रदर्षनी के अवलोकन के बाद चित्र पटल पर लिखा - 'सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं'। यूनिसेफ द्वारा रूबरू होकर उनकी अभिव्यक्ति को चित्र प्रदर्शनी के रूप में उभारने का प्रयास किया है। यह एक सराहनीय कदम है। बच्चों के कोमल हृदय के तारों को झंकृत करने का काम किया है। इससे बच्चों में रचनात्मक अभिव्यक्ति, आत्म चिंतन एवं आत्म विश्वास जागृत होगा।'
उल्लेखनीय है कि यूनिसेफ संस्था द्वारा बस्तर अंचल के कोंटा-दोरनापाल, इंजरम-बीजापुर एवं नारायणपुर क्षेत्रों में आश्रम छात्रावास स्कूलों में रह रहे विद्यार्थियों से रूबरू बातचीत कर बस्तर के वर्तमान परिदृष्य पर बच्चों द्वारा निर्मित ड्राइंग चित्र प्रदर्शनी के माध्यम से उनके कोमल मस्तिष्क द्वारा तैयार की गई चित्र प्रदर्शनी को संकलित किया गया है। दो दिवसीय यह चित्र प्रदर्शनी आम लोगों के लिए कल शनिवार को भी खुली रहेगी।
मुख्यमंत्री ने चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन करने के बाद अपने उदबोधन में नक्सलियों को आड़े हाथों लिया। डॉ. सिंह ने कहा कि बस्तर के लोगों को 18 वीं सदी में जीने के लिए मजबूर करने वाले वे कौन लोग हैं जो हमारे बच्चों के स्कूल आश्रम को ध्वस्त कर रहे हैं। अस्पतालो को ध्वस्त कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ और बस्तर अंचल की जनता को ऐसे हिंसक और अराजक लोगों की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री ने प्रति प्रष्न किया कि बस्तर के सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों की निष्छल हंसी और उनका बचपन किसने बंधक बनाकर रखा है। मुख्य
मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा जो कुछ भी संभव होगा हर संभव मदद की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अंचल में हिन्दी के अलावा आंचलिक बोलियों हल्बी, गोण्डी, भतरी एवं उड़ीसा एवं आन्ध्रप्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में बोली जाने वाली बोलियों शिक्षा देने की व्यवस्था की जा रही है। डॉ. सिंह ने कहा कि बस्तर अंचल के विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग एवं चिकित्सा शिक्षा में प्रवेश दिलाने के लिए आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा राजधानी रायपुर में प्रयास नामक आवासीय छात्रावास का संचालन किया जा रहा है। इस अवसर पर यूनिसेफ के नई दिल्ली स्थित उप संचालक श्री डेविड एवं युनिसेफ की छत्तीसगढ़ प्रभारी सुश्री शाहिन निलोफर ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

