कैम्पा योजना की समीक्षा : क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण की धीमी गति पर मुख्यमंत्री ने जताई नाराजगी
शिवनाथ के दोनों किनारों पर वृक्षारोपण के निर्देश
रायपुर 25 मई 2011

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज शाम यहां मंत्रालय में छत्तीसगढ़ राज्य क्षतिपूर्ति वनीकरण कोष प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (कैम्पा) के कार्यों की समीक्षा की। डॉ. सिंह ने कैम्पा के तहत वनीकरण सहित अन्य विकास कार्यों की धीमी प्रगति पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए इन कार्यो में तेजी लाने के लिए कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कुछ लापरवाह अधिकारियों को फटकार भी लगायी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कैम्पा के कार्यो में तेजी लाने के लिए हरसंभव उपाय किए जाएं। उन्होंने कार्यों में तेजी लाने के लिए वित्तीय अधिकार को विकेन्द्रीकृत करते हुए सरलीकरण करने के निर्देश भी दिए। इसके साथ ही कैम्पा कोष के अंतर्गत श्रमिकों की मजदूरी भुगतान भी नगद करने के निर्देश दिए। बैठक में वन मंत्री श्री विक्रम उसेण्डी सहित अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन विभाग) श्री नारायण सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अमन कुमार सिंह और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने बैठक में कहा कि कैम्पा की वर्तमान कार्ययोजना में कोई ऐसे कोई बड़े स्तर के कार्य शामिल नहीं है, जिन्हें पूरा करने में अत्यधिक विलंब हो। उन्होंने कहा आमतौर पर कैम्पा मद के कार्य भी वन विभाग के कार्यो की तरह छोटे स्तर के ही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वन विभाग द्वारा ऐसे नियम बनाया जाना चाहिए कि छोटे-छोटे कार्यों की स्वीकृति के लिए अधिकारियाेंं को बार-बार मुख्यालय तक आने की जरूरत नहीं पड़े। उन्होंने वन संरक्षक और वन मण्डलाधिकारियों की वर्तमान वित्तीय स्वीकृति सीमा से दस गुना अधिक वित्तीय अधिकार सौंपने के निर्देश दिए। इसके अलावा मजदूरी भुगतान में विलंब को देखते हुए कैम्पा योजना के कार्यों का भुगतान भी अब वन विभाग के अन्य कार्यों की तरह किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कैम्पा की संचालन समिति की जल्द बैठक आयोजित कर इसका प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जंगल हमारी नैसर्गिक सम्पदा है। इनका संरक्षण और संवर्धन के लिए हमें विशेष कार्ययोजना बनाकर उस पर अमल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हरियर छत्तीसगढ़ अभियान में कैम्पा योजना की महत्वपूण्र्ा भूमिका हो सकती है। उन्होंने इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक विकासखण्ड में वातावरण को हरा-भरा बनाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए ऑक्सीजन जोन निर्माण करने के निर्देश भी दिए। डॉ. सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नदियों के दोनों तटों पर भी इस योजना के तहत व्यापक पैमाने पर वृक्षारोपण किया जानाा चाहिए। उन्होंने दुर्ग जिले की शिवनाथ नदी का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि इसके दोनो तटों पर दो सौ मीटर तक की चौड़ाई में खाली स्थान उपलब्ध हैं। इन स्थानों पर इस वर्ष मानसून में सघन वृक्षारोपण किया जाए। डॉ. सिंह ने नया रायपुर में प्रस्तावित वनस्पति उद्यान (बॉटनिकल गार्डन) और बार नवापारा अभ्यारण के विस्थापितों के पुनर्वास कार्य में और तेजी लाने को कहा । डॉ. सिंह ने कहा कि सघन वन क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा के लिए स्थापित वॉच टॉवराें और वन कर्मचारियों के आवास गृहों पर भी कैम्पा योजना के तहत सौर ऊर्जा से प्रकाश की व्यवस्था किया जाना चाहिए। उन्होंने बस्तर के विख्यात कोटमसर गुफाओं में भी सोलर लाईट से रोशन करने का सुझाव दिया।
बैठक में वन विभाग के अधिकारियों ने कैम्पा योजना के तहत अब तक के कार्यों की प्रगति का कम्प्यूटर आधारित प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के खाते में केन्द्र शासन द्वारा वर्ष वन विकास के लिए एक हजार 767 करोड़ रुपए की राशि जमा की जा चुकी है। इनमें से वित्तीय वर्ष 2009-10 में 123 करोड़ 21 लाख और वर्ष 2010-11 में 134 करोड़ 10 लाख रुपए की राशि प्राप्त हो चुकी है। कैम्पा योजना के तहत प्रदेश में विभिन्न सड़कों के दोनो किनारों पर 945 किलोमीटर क्षेत्र लम्बाई में वृक्षारोपण किया गया । इसके साथ ही पांच हजार 480 हेक्टेयर क्षेत्र में 57 लाख पौधे लगाए गए। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में कुल छह केन्द्रीय रोपणियों का विकास कैम्पा मद से किया जा रहा है। इन रोपणियों मे ंउच्च तकनीक से गुणवत्ता पूर्ण पौधे तैयार किए जाएंगे। कैम्पा मद के अंतर्गत सम्पूर्ण राज्य में दो करोड़ पौधे सागौन, बांस, आंवला आदि के विकसित किये जा रहे हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव श्री अमन कुमार सिंह सहित प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री धीरेन्द्र शर्मा, प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम श्री आर.के शर्मा, मुख्य वन्यप्राणि अभिरक्षक श्री रामप्रकाश और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

